चुनावी रंजिश में किया गैंगरेप, पूर्व सरपंच सहित दो आरोपियों को 20-20 साल की सजा

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नीमच। चुनावी रंजिश में महिला से गैंगरेप के मामले में आरोपी को कोर्ट ने कड़ी सजा सुनाई है|  प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश विवेक कुमार की कोर्ट ने 2 लोगों को 20-20 साल का कारावास सुनाया। ग्राम पंचायत चुनावी प्रतिस्पर्धा के चलते वर्ष 2015 में डांगरी गांव की महिला से गैंग रेप के मामले में पूर्व सरंपच सहित दो आरोपी है| दोषियों में एक की उम्र अभी 60 साल है तो दूसरे की उम्र 59 साल है। नामांकन भरे जाने के बाद यह घटनाक्रम हुआ था। सजा सुनाए जाने के साथ दोनों को कनावटी जिला जेल भेज दिया गया। वहीं कोर्ट द्वारा एक आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने के आदेश दिए हैं। 

घटना मनासा ब्लॉक में 30 जनवरी 2015 की है, लोक अभियोजक मनीष जोशी ने बताया कि मनासा के डांगरी गांव निवासी एक युवती ने मनासा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पीडि़ता के अनुसार उसके मां मामाजी के पुत्र की शादी में हाड़ीपिपल्या गई थी। वह घर पर अकेली थी। रात करीब ढा़ई बजे उसके मामाजी के लड़के के नाम से किसी ने आवाज लगाई और कहा कि दरवाजा खोल। इस पर उसने जाकर दरवाजा खोला तो दो व्यक्ति अंदर आए और बोले कि तू चुनाव लड़। दोनों ने उसे हाथ पकड़कर पलंग पर पटक दिया तथा दोनों ने बारी-बारी उसके साथ दुष्कर्म किया। 

चुनावी रंजिश में किया रेप

तबीयत खराब होने से महिला बेहोश हो गई थी। उसे परिजन जिला अस्पताल लाए थे। नीमच कैंट के बाद मनासा थाने में केस दर्ज हुआ। महिला की पल्स रेट डाउन थी, ऐसे में मृत्यु पूर्व कथन लिए गए, जिसमें महिला ने ज्यादती करने के मामले में कालू सरपंच उर्फ कन्हैयालाल रावत, नंदलाल कछावा व अनिल बटवाल नामक व्यक्ति समेत 2 अन्य पर शंका जताई थी। घटना के वक्त कमरे में कुल 5 लोग होने की बात कही। जांच में सामने आया था कि महिला और आरोपी कन्हैयालाल जनपद चुनाव लड़ रहे थे, वहां से रंजिश पनपी। हालांकि गैंगरेप घटना के बाद नतीजों में कन्हैयालाल चुनाव हार गया था। 

यह मिली सजा 

न्यायालय ने आरोपी कन्हैयाला रावत और नंदलाल कछावा को धारा 376 डी में 20-20 वर्ष सश्रम कारावास, 20 हजार रुपए जुर्माना तथा धारा 450 के तहत 5-5 वर्ष सश्रम करावास व पांच हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर 3-3 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतने का प्रावधान है।

‘बालात्कार एक ऐसा अनुभव है, जो पीडि़ता के जीवन की बुनियाद हिला देता है’

इस मामले में पीडि़ता ने आरोपियों की पहचान नहीं की थी, सिर्फ संदेह जताया था। जिसके आधार पर डीएनए टेस्ट और एफएसएल रिपोर्ट में पुष्टि होने के बाद आरोपियों पर कार्रवाई हुई है। जघन्य प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए न्यायाधीश ने फैसले में टिप्पणी की कि -‘यहां यह कहना सुसंगत है कि बलात्कार एक ऐसा अनुभव है जो पीड़िता के जीवन की बुनियाद हिला देता है और बहुत सी स्त्रियों के लिए इसका दुष्परिणाम लंबे समय तक बना रहता है। व्यक्तिगत संबंधों को बुरी तरीके से प्रभावित करता है। व्यवहार और मूल्यों को आतंकित करता है, यह किसी भी महिला के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। इस सुस्थापित सिद्धांत को दृष्टिगत रखते हुए ही ऐसे प्रकरणों में फैसला दिया जाना न्यायोचित है।

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