रतलाम में ऑक्सीजन का ऑडिट शुरू, मरीज को अधिक ऑक्सीजन देने पर हुआ था हंगामा

रतलाम जिले में सीएम शिवराज के निर्देश के बाद ऑक्सीजन का ऑडिट शुरू हो गया है। पढ़िए पूरी खबर....

रतलाम, सुशील खरे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chauhan) के निर्देश के बाद रतलाम (Ratlam) जिले में ऑक्सीजन (Oxygen) का ऑडिट शुरू हो गया है। प्रशासन द्वारा निजी अस्पतालों से ही ऑक्सीजन की उपलब्धता, खपत और मांग की जानकारी ली जा रही है। प्रशासन का दावा है कि निजी अस्पतालों को आवश्यकता से अधिक ऑक्सीजन की लगातार आपूर्ति की जा रही है। मरीजों और उनके परिजन को परेशान होने की जरूरत नहीं है।

यह भी पढ़ें:-दूसरी खेप लेकर मध्यप्रदेश पहुंची ऑक्सीजन एक्सप्रेस, जबलपुर को मिले दो टैंकर

कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड (Collector Gopal Chandra Dad) ने बताया कि प्रशासन द्वारा ऑक्सीजन का ऑडिट कराया जा रहा है। इसके लिए अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है जो निजी अस्पतालों से ही वहां भर्ती मरीजों की संख्या उनके ऑक्सीजन का लेवल, उन्हें लग रही ऑक्सीजन की मात्रा, संस्थान में उपलब्ध ऑक्सीजन सहित सभी जानकारियां एकत्र की जा रही हैं। दरअसल एक मरीज को अधिक ऑक्सीजन देने से उसकी तबीयत बिगड़ गई। जिसे अरविंदो हॉस्पिटल इंदौर में भर्ती कराया है। जिसको लेकर बुधवार रात बंजली स्थित भाजपा नेता डॉ राजेश शर्मा के शिवशक्तिलाल शर्मा आयुष अस्पताल में जमकर हंगामा हुआ था। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि अधिक ऑक्सीजन लेकर निजी अस्पतालों द्वारा छोटे सिलेंडर में भरकर बेची जा रही थी। कलेक्टर ने चेतावनी दी है कि यदि कोई ऑक्सीजन का दुरुपयोग करते पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

यह भी पढ़ें:-दतिया को गृह मंत्री की बड़ी सौगात, 15 दिनों में शुरू होगा ऑक्सीजन प्लांट

बता दें कि पिछले दो दिनों से शहर के निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन की किल्लत की शिकायत मिल रही है। इससे मरीजों के परिजनों में घबराहट है। निजी अस्पतालों के प्रबंधन द्वारा ऑक्सीजन की कमी बताकर भर्ती मरीजों को अन्यत्र शिफ्ट करने के लिए कहा जा रहा है। शुक्रवार को भी कई मरीजों के परिजनों को यही बात कही गई। मामले में कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड ने स्पष्ट किया कि गुरुवार को निजी अस्पतालों के प्रबंधन की मीटिंग ली गई थी। इसमें उन्हें निर्धारित बेड से अधिक मरीजों को भर्ती नहीं करने के लिए कहा गया ताकि व्यवस्थाएं ना बिगड़े। यह भी निर्देश दिए गए कि खाली बेड होने पर मरीजों को भर्ती हो करने से मना ना करें।