प्राचीन मंदिर में पड़वा पर दूध चढ़ाने से बन जाता है तालाब, यह है परंपरा

सिहोर। दुनिया में जहां आदमी चाँद पर घर बसाने की राह पर चल रहा है, तो दूसरी ओर हमारे देश में अंधी परम्पराए रुकने का नाम ही नही ले रही है। ऐसे में किसानों और आदिवासियों द्वारा अपने पशुओं की समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना में हजारों टन दूध सीहोर की  इछावर तहसील के  गाँव देवपुरा स्थित बाराखम्बा मंदिर में मौजूद भगवान पशुपतिनाथ की सिला पर  हर वर्ष दीपावली की पड़वा को चढ़ाया जाता है। 

हालात यह बनती है दूध की मोटी धारा लगातार मंदिर के पीछे एक दूध के तालाब का निर्माण कर देती है। शायद आप को सहसा भरोसा ना हो मगर प्राचीन मिथकों और अंधी परम्पराओं से जुड़ा एक अजीबोगरीब दस्तूर है की, किसान और आदिवासी अपने दुधारु पशुओं की समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए उनका एक दिन का पूरा दूध इछावर तहसील के गाँव देवपुरा स्थित बाराह खम्बा मंदिर  में मौजूद भगवान पशुपतिनाथ की सिला पर हर वर्ष दीपावली की पड़वा को चढ़ाते है। वहीं  इस दिन दूध की एक बूंद का इस्तेमाल पशु मालिको के द्वारा नही किया जाता है। 

दरअसल सीहोर जिले की इछावर तहसील मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर रिमोट एरिये में स्थित गाँव देवपुरा में प्राचीन बाराखम्बा मंदिर में मौजूद भगवान पशुपतिनाथ की सिला पर हर वर्ष दीपावली की पड़वा को आसपास और जिले के बाहर के हजारो किसान और आदिवासी अपने दुधारु पशुओं की समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए एक दिन का पूरा दूध चढ़ाते है।  यहाँ एक वृहद मेले की शक्ल में हजारो लोग अपनी आस्था ..श्रद्धा और विश्वास की त्रिवेणी को मूर्त  रूप देते है। हालात यह बनती है चढ़ाए हुए दूध की मोटी दो धाराए लगातार मंदिर के पीछे एक दूध के तालाब का निर्माण कर देती है। इसके पीछे मान्यता है की पशुओं के रक्षक भगवान पशुपतिनाथ दुधारू पशुओं में वर्ष बाहर कोई संक्रामक रोग नही होने देते है। इसलिए किसान और आदिवासी आज भी इस मान्यता का निर्वहन करते चले आ रहे है। इस बार जिले के कलेक्टर अजय गुप्ता ने यहाँ सबसे पहले पशुपतिनाथ की सिला की पूजन की। इस मौके पर  प्रदेश के गैस राहत और जिला प्रभारी मंत्री आरिफ अकील भी पहुंचे और उन्होंने मेले स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। लगभग पूरा जिला प्रशासन इस मौके पर हजारो की संख्या में आई भीड़ को नियंत्रिंत करने यहाँ मौजूद रहते है। जिला प्रभारी मंत्री आरिफ अकील ने स्थानीय मीडिया से चर्चा में कहा की ग्राम खेरी से मंदिर तक के उखड़े मार्ग का नया निर्माण बारिश के कारण शुरू नही किया जा सका लेकिन अब शीघ्र शुरू किया जायेगा। 

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