सीहोर : 13 दिनों से धरने पर बैठी आशा कार्यकर्ताओं का फूटा गुस्सा, कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन

सोमवार को सीएम शिवराज को ग्रेसेस होटल पर ज्ञापन देने पहुंची थी लेकिन कार्यकर्ताओं को उनसे मिलने नहीं दिया गया। जिसके बाद आक्रोशित जिलेभर की आशा कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट गेट पर आज धरना दिया।

सीहोर, अनुराग शर्मा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Chief Minister Shivraj Singh Chouhan) के गृह जिले सीहोर (Sehore) की आशा कार्यकर्ताओं (ASHA workers) ने आज कलेक्ट्रेट पहुंच कर जमकर प्रदर्शन किया। जहां सभी कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट गेट पर नारेबाजी करके बैठी है। दरअसल छह सूत्री मांगों को लेकर 13 दिन से लगातार कार्यकर्ता धरने पर बैठी थी। वहीं सोमवार को सीएम शिवराज को ग्रेसेस होटल पर ज्ञापन देने पहुंची थी लेकिन कार्यकर्ताओं को उनसे मिलने नहीं दिया गया। जिसके बाद आक्रोशित जिलेभर की आशा कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट गेट पर आज धरना दिया। और शिवराज के खिलाफ नारेबाजी भी की।

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गौरतलब है कि आशा, ऊषा और आशा सहयोगिनी संघ की प्रदेश स्तरीय हड़ताल जारी है। जिसके तहत सीहोर के स्थानीय बाल बिहार ग्राउण्ड में आशा, ऊषा एवं सहयोगिनी कार्यकर्ताओं की 6 सूत्रीय मांगों में प्रमुख मांगों को लेकर हड़ताल पर है। जिसके कारण सभी ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाऐं चरमरा गई हैं। वहीं कोविड-19 टीकाकरण अभियान एवं आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं की सेवाओं के अभावा में गर्भवती महिलाओं की जांचें, माता व नवजात शिशुओं की देखभाल, हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की जांचे, परिवार नियोजन के साधन का वितरण और टीकाकरण भी 100 प्रतिशत नहीं हो पा रहा है। बीपी-सुगर के मरिजों का फॉलव एवं दवाई वितरण आशाओं के द्वारा किया जाता है। वह भी नहीं हो पा रहा है। संस्थागत प्रसव में भी कमी हो रही है, लोग होम डिलेवरी करवाने पर मजबूर हो रहे हैं। आशा द्वारा किये जा रहे सर्वे भी नहीं हो पा रहे हैं, मलेरिया वाले मरिजों की सिलाईट व दवाई भी नहीं दी जा रही है। टीवी के मरिजों का भी फॉलव नहीं पा रहा है। इसी तरह आशा द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाऐं चरमरा गई है। इसके बावजूद भी सरकार द्वारा आशा-ऊषा और आशा सहोगिनी की मांगों को पूर्ण करने में देरी की जा रही है। जिससे आम जनता स्वास्थ्य सेवाऐं नही मिलने से परेशान हो चुकी है।

आशा कार्यकर्ताओं की मांग 

• उन्हें सरकारी कर्मचारी का पद दिया जाए।
• मानधन बढ़ाया जाए।
•आशा सहयोगी यों को पर्यवेक्षक का पद दिया जाए।
•सभी आशा कार्यकर्ताओं के परिवार वालों का निजी और सरकारी अस्पताल में निशुल्क इलाज कराया जाए।
•सर्वे के दौरान किसी भी तरह की अनहोनी होने पर तुरंत कार्रवाई की जाए
• अगर किसी भी आशा कार्यकर्ताओं की ड्यूटी के दौरान मृत्यु होती है तो उनके परिवार को बीमा दिया जाए।
•कोरोण महामारी में काम करने के अंतर्गत 10 हजार की सुरक्षा राशि दी जाए।

इधर सीहोर में कलेक्ट्रेट गेट पर पहुंचकर कलेक्टर चंद्रमोहन ठाकुर ने आशा कार्यकर्ताओं का आवेदन लेकर आश्वासन दिया है। कलेक्टर ने कहा कि मांगों को लेकर सरकार को यह पत्र भेज दिया जायेगा।

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