शिवपुरी: जनपद पंचायत कार्यालय के शौचालय निर्माण में करोड़ों का घोटाला, FIR दर्ज

स्वच्छ भारत अभियान के तहत एक बड़ा घोटाला सामने आया है। प्रधानमंत्री मोदी सरकार के स्वच्छ भारत मिशन NLB के तहत ब्लॉक समन्वयक ने 1 करोड़ 44 हजार रुपए से अधिक का पलीता लगा दिया है। खास बात ये है कि पोर्टल पर 1048 ग्रामीणों के नाम पर दूसरे खाते दर्ज कर फर्जी तरीके से भुगतान जारी कर घोटाला कर दिया।

शिवपुरी

शिवपुरी, शिवम पाण्डेय। शिवपुरी (shivpuri) की पिछोर जनपद पंचायत लंबे समय से भ्रष्टाचार (corruption) का अखाड़ा बनी हुई है। पिछोर जनपद पंचायत ने ग्राम पंचायतो के करोड़ो रूपये का घोटाला (scam) करने के लिए अधिकारियों (officers) ने एक ऐसा कारनामा किया जिसके बारे में जानकर अचंभित रह जाएंगे।

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स्वच्छ भारत अभियान के तहत एक बड़ा घोटाला सामने आया है। प्रधानमंत्री मोदी सरकार के स्वच्छ भारत मिशन NLB के तहत ब्लॉक समन्वयक ने 1 करोड़ 44 हजार रुपए से अधिक का पलीता लगा दिया है। खास बात ये है कि पोर्टल पर 1048 ग्रामीणों के नाम पर दूसरे खाते दर्ज कर फर्जी तरीके से भुगतान जारी कर घोटाला कर दिया गया।
पिछोर में पदस्थ स्वच्छ भारत मिशन के ब्लॉक कॉर्डिनेटर रामनिवास राजपूत ने 1048 शौचालयों के लिए जारी हुई एक करोड़ 24 लाख 76 हजार की राशि में से एक करोड़ 44 हजार रुपये की राशि हितग्राहियों को न देते हुए अन्य माध्यमों को ट्रांसफर कर दी। इसकी विभागीय जांच चल रही थी। जांच पूरी होने पर अधिकारियों ने एफआइआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे, इसे लेकर मंगलवार को एफआइआर दर्ज करा दी गई है। ऑनलाइन भुगतान के लिए जनपद पंचायत के शौचालय का फोटो खींचकर ही कई शौचालयों की जिओ-टैगिंग कर दी गई थी।

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धरातल पर जब एक विशेष टीम द्वारा यह जांच की गई तो खुलासा हुआ एक गरीब मध्यम वर्गीय परिवार के घर पर शौचालय बनना था जिसके तहत इतना बड़ा घोटाला हुआ। स्वच्छ भारत मिशन के ब्लॉक समन्वयक रामनिवास राजपूत ने  विभागीय अधिकारियों के साथ मिलकर इस संपूर्ण भ्रष्टाचार को अंजाम दिया लेकिन विभागीय अधिकारी ने खुद को बचाने के चक्कर में एक व्यक्ति को आरोपी बना दिया। इस संपूर्ण भ्रष्टाचार की जानकारी हालांकि हितग्राहियों को भी लग गई तो उन्होंने सीएम हेल्पलाइन और कलेक्टर के यहां लिखित शिकायत की जिसके बाद जिला पंचायत सीईओ ने एक विशेष टीम को जांच के आदेश के दिए जिसके बाद ये खुलासा हुआ।

गुप्त सूत्रों की मानें तो इसमें जिले तक के कई वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत है और मुख्य बात यह है जिन अधिकारियों ने जांच की थी वे खुद इस घोटाले के भागीदार रहे थे।