मध्यप्रदेश में गर्माया राजनीतिक पारा, बीजेपी-कांग्रेस ने झोंकी ताकत

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। इस बार प्रदेश में होने जा रहे उप चुनावों के नतीजों (Result Of By-election In Anchal) से तीन परिणाम सामने आने वाले हैं। एक शिवराज सिंह सरकार (Shivraj Government) की उम्र का पता चलेगा, दूसरा फिर सत्ता में वापसी का सपना देख रही कांग्रेस (Congress) के सपने साकार होंगे या नहीं और तीसरा मध्य भारत (Central India) की राजनीति (Politics) में सिंधिया परिवार (Scindia Family) भाजपा में भी उतना ताकतवर भूमिका में रह पाएगा या नहीं, ये साफ होगा। यही वजह है कि भाजपा ने बीते पखवाड़े से ग्वालियर को मिनी राजधानी (Mini Capital Gwalior) बना लिया है। सिंधिया पहली बार यहां दिन रात एक कर रहे हैं।

कमलनाथ के बाद किसी बड़े नेता का कार्यक्रम नहीं हुआ
जब उप चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हुई थी तब कांग्रेस नेता दावा कर रहे थे कि कांग्रेस अपना वॉर रूम ग्वालियर में (War Room Of Congress In Gwalior) ही बनाएगी। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Former Chief Minister Kamal Nath) ग्वालियर को ही हेड-क्वार्टर (Headquarter) बनाएंगे, उसके लिए यहां मकान खोजे जा रहे हैं। फिर 4 बार उनका ग्वालियर आगमन रद्द हुआ हालांकि वह 2 दिन के लिए जब पिछले महीने ग्वालियर गए थे तो भाजपा और ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) दोनों के लिए यह चौंकाने वाला था। प्रेक्षकों के अनुसार यह ग्वालियर का अब तक का सबसे जबरदस्त भीड़ वाला रोड शो था, लेकिन इसके बाद से अंचल में कांग्रेस के किसी बड़े नेता का कार्यक्रम नहीं हुआ।

भाजपा ने संभाला है मोर्चा
कमलनाथ की यात्रा के बाद भाजपा ने मोर्चा संभाला और अभी भी उसे गति दिए हुए हैं। भाजपा ने सभी 16 सीटों के चुनाव प्रचार अभियान को आगे बढ़ाने के लिए एक होटल को अपने वॉर रूम में तब्दील कर दिया। भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रभात झा 24 घंटे इसी में रहते हैं। प्रचार के लिए भाजपा ने यहां एक सुव्यवस्थित और आधुनिक साधनों से सुसज्जित मीडिया सेंटर बनाया गया है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर (State Media Incharge Lokendra Parashar) एक पखवाड़े से यहीं जमे हैं और हर खबर पर नजर रख रहे हैं।

बीजेपी कर रही पॉलिटिकल क्लाउड की रणनीति पर काम
नेताओं के दौरों के मामले में भाजपा पॉलिटिकल क्लाउड (Political Cloud) की रणनीति पर काम कर रही है। मसलन हर दिन हर विधानसभा क्षेत्र में कोई ना कोई नामी नेता मौजूद रहे, जिसे मीडिया में स्पेस मिले। पहले केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Central Minister Narendra Singh Tomar) लगभग सभी क्षेत्रों में गए और कार्यकर्ताओं की बैठक की। उनके दौरे के पूरे होने के पहले ही सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 5 दिन का दौरा किया। वह भी हर ब्लॉक तक गए, सुबह शाम को ग्वालियर में वह भाजपा और आरएसएस के नेताओं से निजी मुलाकात करते रहे। उन्होंने संघ के प्रांतीय कार्यवाहक यशवंत इंदापुरकर के घर जाकर उनसे भी गुप्त मंत्रणा की।

जातिगत समीकरण के हिसाब से प्रचार
सिंधिया के समानांतर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के दौरे शुरू हो गए, वह भी सभी क्षेत्रों में गए। इसके अलावा प्रभात झा, डॉ नरोत्तम मिश्रा, अनूप मिश्रा और तमाम वर्तमान और पूर्व मंत्रियों के दौरे हुए। इन्हें जातीय समीकरण के हिसाब से पार्टी भेज रही है। औसत हर दूसरे दिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अंचल में आते ही हैं।

कांग्रेस का संभागीय कार्यालय खाली
इसके उलट कांग्रेस का अभी तक ना कोई मीडिया सेंटर बना है और ना कोई वॉर रूम। कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा अकेले दम पर मोर्चा संभाले हुए हैं। हालांकि लगातार आक्रमण से वह सिंधिया को परेशान और भाजपा को असहज बनाए हुए हैं। मुरैना में बृजेंद्र सिंह राठौर एक माह से डेरा डाले हैं। लिहाजा उन्होंने स्थिति ठीक कर रखी है। लेकिन संभागीय मुख्यालय खाली पड़ा है। यहां तक कि इनके प्रत्याशियों के चुनाव कार्यकाल के उद्घाटन में भी कोई बड़ा नेता नहीं गया।

संगठन ही सब कुछ तय करता है – भाजपा
ग्वालियर सांसद विवेक शेजवलकर कहते हैं कि भाजपा प्रचार अभियान में बहुत आगे निकल गई है क्योंकि हमारा संगठन सब कुछ तय करता है, सबको कब कहां जाना है या पार्टी तय करती है। इसे सैनिक की तरह पालन करना होता है। जबकि कांग्रेस का दावा है कि हम हो हल्ला नहीं जमीनी काम कर रहे हैं। कार्यकर्ता लोगों से सीधे मिल रहे हैं।

एकतरफा हमारे पक्ष में है परिणाम – कांग्रेस
कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक सिंह कहते हैं मैं तीन लोक सभा चुनाव लड़ चुका हूं, मैंने अपने पिता स्वर्गीय राजेंद्र सिंह के भी चुनाव देखे। लेकिन कार्यकर्ताओं में ऐसी एकजुटता और समर्पण तथा जनता का नैतिक गुस्सा पहली दफा देखा है। भाजपा कार्यकर्ता अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। जबकि कांग्रेसी बदला लेने को उत्साहित। यह चुनाव जनता बनाम सरकार गिराने वालों के बीच है। परिणाम एकतरफा कांग्रेस के पक्ष में है। हालांकि अभी सभी के पास सिर्फ दावे हैं और नतीजे आने पर ही इन दावों की असलियत सामने आएगी।

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