Char Dham Yatra को लेकर बड़ा खुलासा, 20 दिनों में 57 श्रद्धालुओं की हो चुकी मौत

देश के प्रमुख तीर्थों में से एक उत्तराखंड चार धाम यात्रा में बड़ी संख्या में मौत हो गयी है। उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग ने जो आंकड़े जारी किये हैं उसके अनुसार अब तक तीर्थयात्रा में 20 लोगों की जान जा चुकि है।

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। देश के प्रमुख तीर्थों में से एक उत्तराखंड चार धाम यात्रा में बड़ी संख्या में मौत हो गयी है। उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग ने जो आंकड़े जारी किये हैं उसके अनुसार अब तक तीर्थयात्रा में 20 लोगों की जान जा चुकि है। 3 मई 2022 से गंगोत्री और यमुनोत्री उद्घाटन के साथ चार धाम की यात्रा शुरू हुई थी, अक्षय तृतीया के दिन।

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केदारनाथ यात्रा 6 मई को शुरू हुई और उसके बाद 8 मई से बद्रीनाथ यात्रा शुरू हुई। गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के खुलने के 6 दिनों में कुल 14 मौतें हुई हैं। जिनमें से 10, बाद में सोमवार (9 मई) तक हुई हैं। केदारनाथ में खुलने के केवल 4 दिनों में पांच तीर्थयात्रियों की मौत हुई है, जबकि बद्रीनाथ यात्रा के दौरान एक की मौत हुई। मौतों का कारण और असामान्य रूप से अधिक संख्या का कारण बताया जा रहा है, एवं इसके अलावा हृदय संबंधी समस्याओं और ऊंचाई इसका एक कारण है।

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इस साल चार धाम यात्रा में असामान्य रूप से अधिक मौतों पर, सिक्स सिग्मा हेल्थकेयर के डॉ प्रदीप भारद्वाज जो कि तीर्थयात्रियों के मार्ग पर मुफ्त चिकित्सा सुविधा प्रदान करते हैं, बताया कि लोग बड़ी संख्या में उच्च ऊंचाई वाले मंदिरों में आ रहे हैं। इससे पहले वह अपने अनुकूल जगह पर थे। “वे कम ऊंचाई से सीधे 10,000-12,000 फीट की दूरी पर स्थित स्थानों पर आ रहे हैं। इस तरह अचानक जलवायु परिवर्तन का सामना करने में लोगों को दिक्कत हो रही है। यात्रा शुरू होने से पहले इस बार तीर्थयात्रियों का कोई चिकित्सकीय परीक्षण नहीं किया जा रहा है।

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चढ़ाई पर आने से पहले तीर्थयात्रियों का स्वास्थ्य जांच जरुरी है। जो लोग फिट हैं केवल उन्हें ही आगे बढ़ने की अनुमति देनी चाहिए। तीर्थयात्रियों को हम स्वास्थ्य जाँच प्रदान कर रहे हैं। जितना हमारे द्वारा मुमकिन है उतनी सेवा मैं और मेरी टीम कर रही है।

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उत्तरकाशी के एक अधिकारी ने बताया कि उच्च मृत्यु दर का एक अन्य कारण यह भी है कि इस बार यात्रा में भीड़ बहुत अधिक है और कोविड -19 का भी कोई प्रतिबंध नहीं है। राज्य द्वारा दैनिक तीर्थयात्रियों की सीमा लगाई गई थी, लेकिन पुजारियों के विरोध के बाद प्रतिबंध को हटाने का फैसला लिया गया है। मंदिरों के रास्तों पर तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ है। इसके अलावा होटल और धर्मशालाओं में भीड़ की तो कोई सीमा नहीं है।