अलविदा जनरल, आप हमेशा हमारे दिल में अमर रहेंगे

जन्म जन्म का साथ, पंचतत्व में विलीन हुए बिपिन-मधुलिका

डेस्क रिपोर्ट। शुक्रवार शाम को CDS बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका के पार्थिव शरीर पंचतत्वों में विलीन हो गए। सीडीएस बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत को पूरे देश ने ससम्मान विदाई दी। भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका को भावपूर्ण श्रद्धांजलि देने के लिए मानो समूचा राष्ट्र उमङ पड़ा हो। उनके आवास से लेकर बरार स्क्वायर श्मशान घाट तक का अंतिम सफर लोगों की अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि और पुष्पांजलि से भरा रहा। 14 अप्रैल 1986 को अपने दांपत्य जीवन की शुरुआत करने वाले मधुलिका और बिपिन सात जन्म के साथ के वादे के साथ सात फेरे लेने से लेकर अंतिम समय तक एक दूसरे से जुदा नहीं हुए। दोनों की पार्थिव देह भी एक ही चिता पर सजाई गई। बेटी कीर्तिका और तारिणी ने उन्हें एक साथ मुखाग्नि दी। जनरल बिपिन रावत की दोनों बेटियों ने अपने माता-पिता को एक साथ दिल्ली कैंट बरार स्क्वॉयर में मुखाग्नि दी,  तमिलनाडु के कुन्नूर में हेलिकॉप्टर दुर्घटना में जान गंवाने वाले CDS जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका के पार्थिव शरीर जब दिल्ली के आर्मी कैंट पहुंचे। तो यहां मौजूद हर आंख नम हो गई, यहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और तीनों सेना प्रमुखों ने CDS को श्रद्धांजलि दी। इससे पहले जनरल रावत की अंतिम यात्रा उनके निवास से शुरू हुई। उनके अंतिम दर्शन के लिए दिल्ली की सड़कों पर भारी भीड़ उमड़ी। सड़क के दोनो तरफ बड़ी संख्या में लोग हाथों में फूल और बैनर लेकर पहुंचे, शव वाहन के आसपास भी कई लोग दौड़ते नजर आए। लोगों ने हाथ में तिरंगा और बैनर लेकर बिपिन रावत अमर रहें के नारे लगाए।

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जनरल रावत और उनकी पत्नी का अंतिम संस्कार दिल्ली कैंट बरार स्क्वॉयर मे किया गया । प्रोटोकॉल के मुताबिक जनरल रावत को 17 तोपों की सलामी दी गई और इस दौरान 800 मिलिट्री पर्सनल मौजूद रहें। जनरल रावत की यूनिट 5/11 गोरखा राइफल्स उनके अंतिम संस्कार की सारी व्यवस्था संभाली। इससे पहले जनरल रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत का पार्थिव शरीर उनके आवास पर लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल समेत केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य जनरल रावत को श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

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जनरल रावत के साथ जान गंवाने वाले ब्रिगेडियर एल.एस. लिड्डर का भी आज दिल्ली कैंट के बराड़ स्क्वायर में अंतिम संस्कार किया गया। आज सुबह उनके पार्थिव शरीर को आर्मी के बेस अस्पताल से शंकर विहार में उनके आवास ले जाया गया। ब्रिगेडियर लिड्डर को अंतिम विदाई देने के लिए सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे, नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वी.आर. चौधरी भी पहुंचे। उन्हें श्रद्धांजलि देने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी पहुंचे।

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तमिलनाडु के कुन्नूर में सैन्य हेलिकॉप्टर दुर्घटना में भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS)  की दुर्भाग्यपूर्ण निधन से पूरा देश स्तब्ध है। इस घटना में जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत सहित 13 लोगों की जान चली गई।

 हेलीकॉप्टर दुर्घटना में जान गंवाने वाले 11 सैन्यकर्मियों के परिचय
ब्रिगेडियर एल. एस. लिद्दर : उन्हें दिसंबर 1990 में जम्मू-कश्मीर राइफल्स (जेएकेआरएफ) में शामिल किया गया था। ब्रिगेडियर लिद्दर ने कांगो में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के साथ जेएकेआरएफ की एक बटालियन की कमान संभाली थी। उन्होंने भारत की उत्तरी सीमाओं पर एक ब्रिगेड की कमान भी संभाली। उन्होंने सैन्य संचालन निदेशालय में निदेशक के रूप में कार्य किया। ब्रिगेडियर लिद्दर जनवरी 2021 से सीडीएस के रक्षा सहायक थे। उन्हें मेजर जनरल रैंक देने को मंजूरी दी जा चुकी थी। उन्हें एक डिविजन का प्रभार संभालना था। ब्रिगेडियर लिद्दर के परिवार में पत्नी गीतिका लिद्दर और बेटी आशना लिद्दर है। उनका जन्म 26 जून 1969 को हुआ था।

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लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह : 17 अप्रैल, 1978 को जन्मे हरजिंदर सिंह को सितंबर 2001 में भारतीय सेना में शामिल किया गया था। उन्होंने गोरखा राइफल्स रेजिमेंट में रहते हुए देश के उत्तर-पूर्व में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) और जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर भी काम किया। लेफ्टिनेंट कर्नल सिंह ने सिक्किम स्काउट्स के साथ-साथ कोर मुख्यालय में एक स्टाफ अधिकारी के रूप में कार्य किया। उन्होंने देहरादून में भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में प्रशिक्षक के रूप में भी सेवाएं दीं। उनके परिवार में पत्नी मेजर (रिटायर्ड) एग्नेस पी मेनेजेस और बेटी प्रीत कौर हैं।

हवलदार सतपाल राय : सतपाल राय गोरखा राइफल्स रेजिमेंट का हिस्सा थे। वह मार्च 2002 में भारतीय सेना में भर्ती हुए। उन्होंने सियाचिन, नौशेरा, नगालैंड और साथ ही मणिपुर में भी सेवाएं दी। उनका बेटा पिछले एक साल से उसी यूनिट में सेवारत है, जहां वह कार्यरत थे।
नायक गुरुसेवक सिंह : गुरुसेवक सिंह पैरा स्पेशल फोर्सेज का हिस्सा थे। वह मार्च 2004 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे। गुरुसेवक सिंह ने लद्दाख के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर में भी अपनी सेवाएं दीं। वह विध्वंस विशेषज्ञ और हथियार रहित युद्ध और करीब से होने वाली लड़ाई लड़ने में भी माहिर थे।
लांस नायक विवेक कुमार : विवेक कुमार पैरा स्पेशल फोर्सेज का हिस्सा थे। वह दिसंबर 2012 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ चीन सीमा पर भी सेवाएं दीं। लांस नायक कुमार कॉम्बैट फ्री फॉल के विशेषज्ञ थे। वह संचार विशेषज्ञ होने के साथ-साथ हथियार रहित युद्ध में भी माहिर थे।

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लांस नायक जितेंद्र कुमार : लांस नायक जितेंद्र कुमार पैरा स्पेशल फोर्स का हिस्सा थे। वह मार्च 2011 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे। उन्होंने भारत-पाक सीमा पर रेगिस्तानी इलाकों में सेवाएं दीं। उन्होंने पिथौरागढ़ और जम्मू-कश्मीर के पास एलएसी पर भी काम किया। वह एक विशेषज्ञ स्नाइपर और संचार युद्ध के माहिर थे।
लांस नायक बी साई तेजा : बी साई तेजा पैरा स्पेशल फोर्स का हिस्सा थे। वह जून 2013 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में एलएसी पर अत्यधिक ऊंचे इलाके में अपनी सेवाएं दीं। लांस नायक तेजा मणिपुर और नगालैंड में आतंकवाद रोधी अभियान में भी शामिल थे। वह मिश्रित मार्शल आर्ट, हथियार रहित युद्ध, संचार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के विशेषज्ञ थे।
विंग कमांडर पीएस चौहान : पीएस चौहान जून 2002 में एक हेलीकॉप्टर पायलट के रूप में भारतीय वायु सेना (आईएएफ) में शामिल किया गया था और वह आगरा के रहने वाले थे।
स्क्वाड्रन लीडर कुलदीप : कुलदीप को जून 2015 में एक हेलीकॉप्टर पायलट के रूप में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था और वह राजस्थान के घरदाना खुर्द से ताल्लुक रखते थे।
जूनियर वारंट अधिकारी आर पी दास : आर पी दास जून 2006 में भारतीय वायुसेना में भर्ती हुए हुए थे और एक फ्लाइट इंजीनियर थे। वह अंगुल, ओडिशा के रहने वाले थे।
जूनियर वारंट अधिकारी ए प्रदीप : प्रदीप जनवरी 2004 में भारतीय वायुसेना में भर्ती हुए थे। वह एक फ्लाइट गनर थे। वह केरल के त्रिशूर से ताल्लुक रखते थे।