मुंद्रा पोर्ट से बरामद 9000 करोड़ रुपये की हेरोइन मामला, आंध्र प्रदेश की कंपनी ने मँगवाई थी

कच्छ,डेस्क रिपोर्ट। गुजरात के कच्छ जिले के मुंद्रा पोर्ट पर रविवार को मादक पदार्थ हिरोइन का दो कंटेनर राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने जब्त किए जिसकी कीमत 9000 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि मुंद्रा पोर्ट मशहूर औद्योगिक घराना अडानी ग्रुप का हिस्सा है। अडाणी ग्रुप द्वारा संचालित मुंद्रा बंदरगाह देश के सबसे बड़े बंदरगाहों में से एक है। जानकारों की माने तो गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर बरामद की गई इस तीन टन हेरोइन की मात्रा नशीले पदार्थों की चल रही तस्करी का एक छोटा सा हिस्सा भर है। और यह खेल लंबे समय से जारी है।

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एक रिपोर्ट के मुताबिक, तीन टन से पहले नशीले पदार्थों के सौदागर 24 टन हेरोइन बाहर से देश में मंगा चुके हैं जिसकी देश के अलग-अलग हिस्सों में सप्लाई की जा चुकी है। और यह खेप खप चुकी है। राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) के अनुमानों के मुताबिक़ रविवार को ज़ब्त की गई हेरोइन की कीमत 9000 करोड़ रुपये थी। लेकिन हेरोइन की जो खेप इससे पहले तस्करी के रास्ते भारत पहुंचने में कामयाब रही, उसकी क़ीमत 70,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा थी। जांच से पता चला है कि आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में स्थित आशी ट्रेडिंग कंपनी ने इस साल जून में कथित तौर पर 25 टन की खेप मंगवाई। इसे ट्रेंडिंग कंपनी ने ‘सेमी कट टैलकम पाउडर ब्लॉक्स’ बताया था।
ये वही चीज थी जिसे डीआरआई ने रविवार को कब्जे में लिया।

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विजयवाड़ा की कंपनी की ये शिपमेंट दिल्ली के एक कारोबारी को जिस ट्रक से भेजी गई थी, वो मुंद्रा पोर्ट और नई दिल्ली के 1176 किलोमीटर लंबे रास्ते के किसी भी टोलगेट से नहीं गुजरी। हालांकि, अब दिल्ली के उस कुलदीप सिंह नाम के कारोबारी की पहचान भी फर्जी बताई जा रही है। सूत्रों के हवाले से खबर सामने आई है कि, “या तो ये सामान गुजरात में ही है, जिसकी संभावना कम है या फिर इसे दूसरी जगहों पर भेज दिया गया है।” यह खेप एक लॉरी नंबर RJ01 GB 8328 से भेजी गई थी, जो कथित तौर पर राजस्थान स्थित जयदीप लॉजिस्टिक्स की मिल्कियत में है। विजयवाड़ा की कंपनी को पिछले साल काकिनाडा पोर्ट से चावल एक्सपोर्ट करने के लिए रजिस्टर्ड कराया गया था। कंपनी के नाम से बाहर से अभी तक यही एक शिपमेंट आई थी।

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आशी ट्रेडिंग कंपनी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता, माचवरापू सुधाकर है जिसका निवास स्थान चेन्नई बताया गया है। सुधाकर ने अपनी पत्नी वैशाली के नाम पर एक प्रोपराइटरशिप फर्म की स्थापना की और लाइसेंस प्राप्त किया।
गौरतलब है कि केंद्रीय जीएसटी प्राधिकरण जिनके माध्यम से सुधाकर ने माल और सेवा कर पहचान संख्या (GSTIN) हासिल की थी, ने विजयवाड़ा के सीतारामपुरम डिवीजन में सत्यनारायणपुरम में दिए गए आवासीय पते के माध्यम से व्यापार इकाई की मैपिंग की थी, जो बेंज सर्कल डिवीजन में आता है।