25 जुलाई को धरती के करीब से गुजरेगा Asteroid, NASA की पैनी नजर, क्या डालेगा असर?

NASA वैज्ञानिकों की मानें तो अभी की स्थिति में Asteroid से धरती को कोई खतरा नहीं है, फिर भी नजर रखी जा रही है।

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नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। सौर तूफान (Solar Storm 2021) के बाद धरती (Earth) पर एक बार फिर बड़ा खतरा मंडराने हुआ दिखाई दे रहा है। इसका कारण ताजमहल से 3 गुना बड़े एस्टेरॉयड (Asteroid Alert) का तेजी से धरती पर आना है, जो 25 जुलाई 2021 को करीब 3 बजे पृथ्वी के बिल्कुल करीब से गुजरने वाला है, ऐसे में एस्टेरॉयड के धरती से टकराने की आशंका बहुत ही कम हैं । लेकिन गुरुत्वाकर्षण से प्रभावित होकर इससे टकरा भी सकता है, यदि ऐसा होता है तो धरती के किसी खास हिस्सों को नुकसान हो सकता है।

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह 25 जुलाई को भारतीय समयानुसार रात में 3 बजे धरती से गुजरेगा, तब धरती से इनकी दूरी 47 लाख किलोमीटर होगी। सभी वैज्ञानिक इस एस्टेरॉयड पर लगातार नजर बनाए हुए है।अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक यह धरती के गुरुत्वाकर्षण से प्रभावित होकर इससे टकरा भी सकता है, यदि ऐसा होता है तो धरती के किसी खास हिस्सों को भारी नुकसान हो सकता है। इस एस्टेरॉयड का आकार लगभग चीन के बर्ड नेस्ट स्टेडियम के बराबर है,  जिस कक्षा से यह एस्टेरॉयड गुजरेगा, उसे अपोलो कहा जाता है। नासा ने इसे खतरनाक एस्टेरॉयड की श्रेणी में रखा है।

NASA वैज्ञानिकों की मानें तो अभी की स्थिति में Asteroid से धरती को कोई खतरा नहीं है, फिर भी नजर रखी जा रही है। नासा वैज्ञानिकों ने Asteroid को 2008 GO20 नाम दिया है। इसका आकार 220 मीटर है। ये धरती से करीब 2870847.607 km की दूरी से निकलेगा। ये दूरी धरती से चांद की दूरी से करीब 8 गुना ज्यादा है, इसकी रफ्तार 8 किमी प्रति सेकंड की है, ऐसे में चिंता का कारण है इसका 150 मीटर से अधिक व्यास और 7.5 मिलियन किलोमीटर से कम की दूरी।

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बता दे कि यह पहला मौका नहीं है, हाल ही में धरती की कक्षा से एस्टेरॉयड 2020 PMZ भी गुजरा था, जिसकी लंबाई सैन फ्रांसिस्को के गोल्डन गेट ब्रिज इतनी लंबी थी, हालांकि यह धरती से करीब 18 लाख मील की दूरी से गुजरा था।

क्या होते हैं Asteroids

Asteroid वे चट्टानें होती हैं जो किसी ग्रह की तरह ही सूरज के चक्कर काटती हैं लेकिन ये आकार में ग्रहों से काफी छोटी होती हैं। 4.5 अरब साल पहले जब हमारा सोलर सिस्टम बना था, तब गैस और धूल के ऐसे बादल जो किसी ग्रह का आकार नहीं ले पाए और पीछे छूट गए, वही इन चट्टानों यानी ऐस्टरॉइड्स में तब्दील हो गए। यही वजह है कि इनका आकार भी ग्रहों की तरह गोल नहीं होता। कोई भी दो ऐस्टरॉइड एक जैसे नहीं होते हैं। सोलर सिस्टम में ज्यादातर ऐस्टरॉइड्स मंगल ग्रह और बृहस्पति यानी मार्स और जूपिटर की कक्षा में ऐस्टरॉइड बेल्ट में पाए जाते हैं। कहा जाता है कि