Railway Fact: ट्रेनों में क्यों होता है लाल, नीला, भूरा और हरा डिब्बा? जानें इसका मतलब

Railway Coach Colour Fact

Railway Fact : ट्रेन से सफर करते समय बहुत से सवाल हमारे दिमाग में आते हैं। कुछ सवाल इस प्रकार होते हैं जैसे कि स्टेशन का नाम, दूरी, रूट, वेतन, ट्रेन का स्थान, आदि। इसके अलावा ट्रेन की सुविधाओं, खाने की व्यवस्था, स्थान, उच्चतम गति, ट्रेन संचालन, आदि संबंधित सवाल भी हो सकते हैं लेकिन आपको सफर के दौरान तीन रंग के डिब्बों वाली कोच देखने को मिलती है तो क्या आपने कभी इसके बारे में सोचा है कि आखिर अलग रंग के कोच का क्या मतलब है। तो चलिए आज के आर्टिकल में हम आपको इन रंगों के कोच से जुड़ी सारी जानकारी विस्तार से बताएंगे…

Railway Coach Colour Fact

नीले रंग के डिब्बे

नीले रंग के इंटीग्रल कोच सबसे ज्यादा कॉमन होते हैं और इन्हें ज्यादातर ट्रेनों में इस्तेमाल किया जाता है। इन कोचों को तमिलनाडु राज्य के चेन्नई में स्थित फैक्ट्री में बनाया जाता है जो भारतीय रेलवे के अधीन है। इस फैक्ट्री में जनरल, एसी, स्लीपर, डेमू और मेमू सभी प्रकार के कोच बनते हैं। इंटीग्रल कोच लोहे से बनते हैं और इनमें एयरब्रेक लगे होते हैं। इन कोचों को मेल एक्सप्रेस या सुपरफास्ट ट्रेनों में इस्तेमाल किया जाता है और इन ट्रेनों की रफ्तार 70 से 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है। ये कोच विभिन्न वातावरण में चलने की क्षमता रखते हैं और यात्रियों के लिए आरामदायक सुविधाएं प्रदान करते हैं।

लाल रंग के डिब्बे

लाल रंग के लिंक हॉफमेन बुश (LHB) कोच खास तरह के होते हैं। लाल रंग के इन कोचों को नवंबर 2018 तक 4700 से भी ज्यादा बनाया जा चुका है और भारतीय रेलवे द्वारा चलाई जाने वाली शताब्दी, राजधानी जैसी ट्रेनों में इनका उपयोग किया जाता है। ये कोच एल्युमिनियम से बने होते हैं, जिससे इन्हें आरामदायक बनाया जा सकता है। इनमें डिस्क ब्रेक लगे होते हैं जो इन्हें अधिक सुरक्षित बनाते हैं।

इन कोचों की रफ्तार 160 से 200 किमी प्रति घंटा होती है और इन्हें अधिक धीमी रफ्तार पर चलाने की अनुमति नहीं होती है लेकिन इनकी उन्नत तकनीक और सुरक्षा उपकरणों के कारण ये देश की सबसे सुरक्षित ट्रेनों में से एक हैं। फिलहाल, इन कोचों को पंजाब के कपूरथला में बनाया जाता है। इस कारखाने में लगभग 1,500 कामगार काम करते हैं और लगभग 500 LHB कोच प्रति वर्ष उत्पादित किए जाते हैं।

हरे रंग के डिब्बे

आमतौर पर हरे रंग के कोच गरीबरथ में इस्तेमाल किए जाते हैं। ये कोच एक क्लासिक रूप से बुना गया होता है और लोगों को सस्ते और उपलब्ध आवास की सुविधा प्रदान करते हैं। हरे रंग के कोचों का उपयोग लंबी दूरी के सफरों के लिए किया जाता है। रेलवे ट्रेनों के अलग- अलग कोचों को अलग- अलग रंगों में रंगा जाता है ताकि यात्रियों को अलग-अलग क्लास और विभिन्न सुविधाओं के बीच भेद करने में मदद मिल सके।

भूरे रंग के डिब्बे

भूरे रंग के कोच लंबे सफरों के लिए अधिक आरामदायक होते हैं इसलिए मीटर गेज ट्रेनों में उपयोग किए जाते हैं। इनमें बहुत सारी विशेषताएं होती हैं जो दुसरे रेल गेज के कोच में नहीं होती हैं, जैसे कि अधिक जगह, आरामदायक सीटें, विशेष तौर पर सफर करने वालों के लिए प्रदान की जाने वाली सुविधाएं आदि।

रंग चयन के पीछे कई कारण

ट्रेन के डिब्बों के रंग चयन के पीछे कई कारण हो सकते हैं। रेलवे इंजीनियरिंग में रंग का उपयोग अलग-अलग उद्देश्यों के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए लाल रंग के डिब्बे एक्सप्रेस और शताब्दी ट्रेन्स के लिए चुने जाते हैं। हरे रंग के डिब्बे स्थानीय ट्रेनों के लिए उपयोग किए जाते हैं जबकि नीले रंग के डिब्बे अक्सर वातानुकूलित गाड़ियों में उपयोग किए जाते हैं। भूरे रंग के डिब्बे अक्सर काम के डिब्बे होते हैं और ट्रेन के अन्य भागों से अलग होते हैं।
(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना अलग-अलग जानकारियों पर आधारित है। MP Breaking News किसी भी तरह की जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।)

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Sanjucta Pandit

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मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं।

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