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नहीं थमा विपक्ष का हंगामा, संसद का शीतकालीन सत्र एक दिन पहले ही समाप्त

Written by:Atul Saxena
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नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट।  23 दिसंबर तक चलने वाला संसद का शीतकालीन सत्र (winter session of parliament) विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण दोनों सदनों (लोक सभा और राज्य सभा) की कार्यवाही को एक दिन पहले 22 दिसंबर को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। विपक्षी सांसद 12 निलंबित सांसदों का निलंबन वापस लेने और गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के इस्तीफे पर ही अड़े रहे। विपक्ष के हंगामे के कारण सदन में कोई काम नहीं हो पाए और फिर सत्र एक दिन पहले ही समाप्त घोषित कर दिया गया।

29 नवम्बर से शुरू हुआ संसद का शीतकालीन सत्र 23 दिसंबर तक निर्धारित था, इस सत्र में तीनों कृषि कानूनों की वापसी जैसा महत्वपूर्व विषय भी था जिसे सरकार ने पूरा किया और कृषि कानून वापस ले लिए।  सत्र के दौरान ही CDS बिपिन रावत सहित 14 लोग हेलीकॉप्टर दुर्घटना में अपनी जान गंवा बैठे। सदन ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

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हालाँकि सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण बिल पास करा लिए लेकिन इस सत्र के दौरान विपक्ष लगातार हंगामा और अमर्यादित व्यवहार करता रहा जिसका नतीजा ये हुआ कि राज्य सभा के 12 सदस्यों को निलंबित कर दिया गया। निलंबन के बाद विपक्ष हमलावर हो गया और दबाव बनाने लाग कि सांसदों का निलंबन वापस किया जाये।  विपक्ष लखीमपुर खीरी  हिंसा मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के इस्तीफे पर भी अड़ा रहा और हंगामा करता रहा।

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आज बुधवार को सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्ष ने फिर हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष सांसदों का निलंबन वापस लेने के लिए शोर शराबा करने लगा। सरकार ने गतिरोध दूर करने के लिए फिर कहा कि सदस्य अपने व्यव्हार के लिए माफ़ी मांग ले तो निलंबन वापस ले लेंगे लेकिन विपक्ष इस पर राजी नहीं हुआ। हंगामा थमता नहीं देखते हुए दोनों सदनों की कार्यवाही को एक दिन पहले आज बुधवार 22 दिसंबर को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। यानि संसद का शीतकालीन सत्र तय समय से एक दिन पहले ही ख़त्म हो गया।

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Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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