Bada Mangal: हनुमान जी की कृपा पाने के लिए करें ये विशेष उपाय, दूर होंगे सभी कष्ट

Bada Mangal: ज्येष्ठ माह का बड़ा मंगल हनुमान जी की भक्ति और आशीर्वाद प्राप्त करने का उत्तम अवसर है। आज निर्जला एकादशी के साथ मिलकर इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इसलिए, यदि आप अपने जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता प्राप्त करना चाहते हैं, तो आज बड़े मंगल के दिन हनुमान जी की पूजा अवश्य करें और प्रेतराज चालीसा का पाठ जरूर करें।

भावना चौबे
Published on -
hanuman ji

Bada Mangal: ज्येष्ठ माह का अंतिम मंगलवार, 18 जून 2024, निर्जला एकादशी के पावन पर्व के साथ विशेष महत्व प्राप्त कर रहा है। इस दिन बड़ा मंगल मनाया जा रहा है, जो भगवान हनुमान जी और राम परिवार की भक्ति का पर्व है। बड़े मंगल का यह शुभ अवसर दुखों और संकटों से मुक्ति, मनोकामना पूर्ति और हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त करने का उत्तम अवसर है। इस दिन हनुमान जी के निमित्त मंगलवार का व्रत रखने और विशेष पूजा करने से व्रतियों को अनेक लाभ मिलते हैं। आइए, इस पावन अवसर पर जानते हैं बड़े मंगल का महत्व, पूजा विधि और प्रेतराज चालीसा का महत्व।

बड़े मंगल का महत्व

मान्यता है कि बड़े मंगल के दिन हनुमान जी की पूजा करने से सभी प्रकार के दुखों और संकटों से मुक्ति मिलती है। हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है। उनकी पूजा करने से हर मनोकामना पूरी होती है। बड़े मंगल के दिन हनुमान जी की पूजा करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। मंगलवार हनुमान जी का दिन माना जाता है। इस दिन उनका व्रत रखने से विशेष लाभ मिलता है।

पूजा विधि

स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। घर या मंदिर में भगवान हनुमान जी और राम परिवार की प्रतिमा स्थापित करें। दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें। फूल, फल और मिठाई का भोग लगाएं। हनुमान चालीसा और प्रेतराज चालीसा का पाठ करें। हनुमान जी की आरती गाएं। प्रसाद वितरित करें।

प्रेतराज चालीसा

दोहा

गणपति की कर वंदना,गुरु चरनन चितलाय।

प्रेतराज जी का लिखूं,चालीसा हरषाय॥

जय जय भूताधिप प्रबल,हरण सकल दु:ख भार।

वीर शिरोमणि जयति,जय प्रेतराज सरकार॥

चौपाई

जय जय प्रेतराज जग पावन।

महा प्रबल त्रय ताप नसावन॥

विकट वीर करुणा के सागर।

भक्त कष्ट हर सब गुण आगर॥

रत्न जटित सिंहासन सोहे।

देखत सुन नर मुनि मन मोहे॥

जगमग सिर पर मुकुट सुहावन।

कानन कुण्डल अति मन भावन॥

धनुष कृपाण बाण अरु भाला।

वीरवेश अति भृकुटि कराला॥

गजारुढ़ संग सेना भारी।

बाजत ढोल मृदंग जुझारी॥

छत्र चंवर पंखा सिर डोले।

भक्त बृन्द मिलि जय जय बोले॥

भक्त शिरोमणि वीर प्रचण्डा।

दुष्ट दलन शोभित भुजदण्डा॥

चलत सैन काँपत भूतलहू।

दर्शन करत मिटत कलि मलहू॥

घाटा मेंहदीपुर में आकर।

प्रगटे प्रेतराज गुण सागर॥

लाल ध्वजा उड़ रही गगन में।

नाचत भक्त मगन हो मन में॥

भक्त कामना पूरन स्वामी।

बजरंगी के सेवक नामी॥

इच्छा पूरन करने वाले।

दु:ख संकट सब हरने वाले॥

जो जिस इच्छा से आते हैं।

वे सब मन वाँछित फल पाते हैं॥

रोगी सेवा में जो आते।

शीघ्र स्वस्थ होकर घर जाते॥

भूत पिशाच जिन्न वैताला।

भागे देखत रुप कराला॥

भौतिक शारीरिक सब पीड़ा।

मिटा शीघ्र करते हैं क्रीड़ा॥

कठिन काज जग में हैं जेते।

रटत नाम पूरन सब होते॥

तन मन धन से सेवा करते।

उनके सकल कष्ट प्रभु हरते॥

हे करुणामय स्वामी मेरे।

पड़ा हुआ हूँ चरणों में तेरे॥

कोई तेरे सिवा न मेरा।

मुझे एक आश्रय प्रभु तेरा॥

लज्जा मेरी हाथ तिहारे।

पड़ा हूँ चरण सहारे॥

या विधि अरज करे तन मन से।

छूटत रोग शोक सब तन से॥

मेंहदीपुर अवतार लिया है।

भक्तों का दु:ख दूर किया है॥

रोगी, पागल सन्तति हीना।

भूत व्याधि सुत अरु धन छीना॥

जो जो तेरे द्वारे आते।

मन वांछित फल पा घर जाते॥

महिमा भूतल पर है छाई।

भक्तों ने है लीला गाई॥

महन्त गणेश पुरी तपधारी।

पूजा करते तन मन वारी॥

हाथों में ले मुगदर घोटे।

दूत खड़े रहते हैं मोटे॥

लाल देह सिन्दूर बदन में।

काँपत थर-थर भूत भवन में॥

जो कोई प्रेतराज चालीसा।

पाठ करत नित एक अरु बीसा॥

प्रातः काल स्नान करावै।

तेल और सिन्दूर लगावै॥

चन्दन इत्र फुलेल चढ़ावै।

पुष्पन की माला पहनावै॥

ले कपूर आरती उतारै।

करै प्रार्थना जयति उचारै॥

उनके सभी कष्ट कट जाते।

हर्षित हो अपने घर जाते॥

इच्छा पूरण करते जनकी।

होती सफल कामना मन की॥

भक्त कष्टहर अरिकुल घातक।

ध्यान धरत छूटत सब पातक॥

जय जय जय प्रेताधिप जय।

जयति भुपति संकट हर जय॥

जो नर पढ़त प्रेत चालीसा।

रहत न कबहूँ दुख लवलेशा॥

कह भक्त ध्यान धर मन में।

प्रेतराज पावन चरणन में॥

दोहा

दुष्ट दलन जग अघ हरन,समन सकल भव शूल।

जयति भक्त रक्षक प्रबल,प्रेतराज सुख मूल॥

विमल वेश अंजिन सुवन,प्रेतराज बल धाम।

बसहु निरन्तर मम हृदय,कहत भक्त सुखराम॥

(Disclaimer- यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं के आधार पर बताई गई है। MP Breaking News इसकी पुष्टि नहीं करता।)


About Author
भावना चौबे

भावना चौबे

इस रंगीन दुनिया में खबरों का अपना अलग ही रंग होता है। यह रंग इतना चमकदार होता है कि सभी की आंखें खोल देता है। यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि कलम में बहुत ताकत होती है। इसी ताकत को बरकरार रखने के लिए मैं हर रोज पत्रकारिता के नए-नए पहलुओं को समझती और सीखती हूं। मैंने श्री वैष्णव इंस्टिट्यूट ऑफ़ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन इंदौर से बीए स्नातक किया है। अपनी रुचि को आगे बढ़ाते हुए, मैं अब DAVV यूनिवर्सिटी में इसी विषय में स्नातकोत्तर कर रही हूं। पत्रकारिता का यह सफर अभी शुरू हुआ है, लेकिन मैं इसमें आगे बढ़ने के लिए उत्सुक हूं। मुझे कंटेंट राइटिंग, कॉपी राइटिंग और वॉइस ओवर का अच्छा ज्ञान है। मुझे मनोरंजन, जीवनशैली और धर्म जैसे विषयों पर लिखना अच्छा लगता है। मेरा मानना है कि पत्रकारिता समाज का दर्पण है। यह समाज को सच दिखाने और लोगों को जागरूक करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। मैं अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करूंगी।

Other Latest News