पुरखों के यह खास दिन, देखे कैसे करे पूजा पितृपक्ष में

दिल्ली,डेस्क रिपोर्ट। आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि से पितृपक्ष आरंभ होंगे। पितृ पक्ष अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि से कुल 17 दिनों का होगा। इस साल पितृ पक्ष 20 सितंबर से शुरू होकर छह अक्तूबर तक रहेंगे। मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष में पितरों का तर्पण करने पर उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष में पूर्वजों का तर्पण किया जाता है। पितृ पक्ष में मृत्यु की तिथि के अनुसार श्राद्ध किया जाता है। अगर किसी मृत व्यक्ति की तिथि ज्ञात न हो तो ऐसी स्थिति में अमावस्या तिथि पर श्राद्ध किया जाता है। इस दिन सर्वपितृ श्राद्ध योग माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि 20 सितंबर से शुरू होने वाले प्रथम पक्ष इस बार 17 दिन का होगा। द्वितीया तिथि वृद्धि के कारण 17 दिन श्राद्ध होंगे। इस दौरान शुभ व मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी।

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शास्त्रों के अनुसार 17 दिन श्राद्ध तिथि में एक अतिरिक्त वृद्धि होना शुभ नहीं है। पितृ पक्ष में प्रतिदिन स्नानोपरांत दक्षिण दिशा की ओर मुख कर पितरों के प्रति जल का अर्घ्य देना चाहिए और पितरों से जीवन के मंगल की प्रार्थना करनी चाहिए। पौराणिक और शास्त्रोक्त वर्णन के अनुसार, पितृलोक में जल की कमी है, जिस कारण पितृ तर्पण में जल अर्पित करने का बड़ा महत्व है। जो भी व्यक्ति पितृ पक्ष में श्रद्धापूर्वक पितरों के निमित्त श्राद्ध करता है, उसकी श्रद्धा और आस्था भाव से तृप्त होकर पितृ उसे शुभ आशीर्वाद देकर अपने लोक को चले जाते हैं।

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कब करें किन लोगों का श्राद्ध
पूर्णिमा श्राद्ध
उन सबका श्राद्ध किया जायेगा, जिनका स्वर्गवास किसी भी महीने की पूर्णिमा को हुआ हो। पूर्णिमा के दिन श्राद्ध करने से श्राद्ध करने वाले को और उसके परिवार को अच्छी बुद्धि, पुष्टि, पुत्र-पौत्रादि और ऐश्वर्य की प्राप्त होती है।

प्रतिपदा श्राद्ध
प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध 21 सितंबर को किया जायेगा। इस दिन उन लोगों का श्राद्ध किया जायेगा, जिनका स्वर्गवास किसी भी महीने के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को हुआ हो। इसे प्रौष्ठप्रदी श्राद्ध भी कहते हैं। प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध करने वाले व्यक्ति की धन-सम्पत्ति में वृद्धि होती है।

द्वितीया तिथि श्राद्ध
द्वितीया तिथि का श्राद्ध 22 सितंबर को किया जायेगा। इस दिन द्वितीया तिथि में उन लोगों का श्राद्ध किया जायेगा, जिनका स्वर्गवास किसी भी महीने के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की द्वितीया को हुआ हो। इस दिन श्राद्ध कर्म करने से व्यक्ति को हर तरह के सुख-साधन मिलते हैं।

तृतीया तिथि श्राद्ध
तृतीया तिथि का श्राद्ध 23 सितंबर को किया जायेगा। तृतीया तिथि में उन लोगों को श्राद्ध किया जायेगा, जिनका स्वर्गवास किसी भी महीने के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की तृतीया को हुआ हो। तृतीया तिथि में श्राद्ध करने से व्यक्ति को शत्रुओं से छुटकारा मिलता है और समस्त कष्टों से मुक्ति मिलती है।

चतुर्थी तिथि का श्राद्ध
चतुर्थी तिथि का श्राद्ध 24 सितंबर को किया जायेगा। चतुर्थी तिथि में उन लोगों का श्राद्ध किया जायेगा, जिनका स्वर्गवास किसी भी महीने के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हुआ हो। इस दिन श्राद्ध करने से व्यक्ति को शत्रुओं से होने वाले अहित का पहले से ही ज्ञान हो जाता है।

पंचमी तिथि का श्राद्ध
पंचमी तिथि का श्राद्ध 25 सितंबर को किया जायेगा। पंचमी तिथि को उनका श्राद्ध किया जायेगा, जिनका स्वर्गवास किसी भी महीने के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की पंचमी को हुआ हो। साथ ही जिनका देहांत अविवाहित अवस्था में, यानि कि शादी से पहले ही हो गया हो, उनका श्राद्ध भी इसी दिन किया जायेगा। इस दिन श्राद्ध कर्म करने वाले व्यक्ति को उत्तम लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।

षष्ठी तिथि का श्राद्ध
षष्ठी तिथि का श्राद्ध 27 सितंबर को किया जायेगा। बता दें, षष्ठी श्राद्ध दोपहर के समय किया जाता है और 26 तारीख की दोपहर 1 बजकर 4 मिनट तक पंचमी तिथि रहेगी उसके बाद षष्ठी तिथि शुरू हो जायेगी जो 27 सितंबर की दोपहर 3 बजकर 43 मिनट तक रहेगी, लिहाजा षष्ठी तिथि का श्राद्ध 27 सितंबर को ही किया जायेगा। आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार इस दिन उन लोगों का श्राद्ध किया जायेगा, जिनका स्वर्गवास किसी भी महीने के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिट्ठी को हुआ हो। इस दिन श्राद्ध करने वाला व्यक्ति सब जगह सम्मान पाने का हकदार होता है।

सप्तमी तिथि का श्राद्ध
सप्तमी तिथि का श्राद्ध 28 सितंबर को किया जायेगा। सप्तमी तिथि को उन लोगों को श्राद्ध किया जायेगा, जिनका स्वर्गवास किसी भी महीने के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की सप्तमी को हुआ हो। इस दिन श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को महान यज्ञों के बराबर पुण्यफल मिलता है और वह श्रेष्ठ विचारों का धनी होता है।

अष्टमी तिथि का श्राद्ध
अष्टमी तिथि का श्राद्ध 29 सितंबर को किया जायेगा। अष्टमी तिथि को उन लोगों का श्राद्ध किया जायेगा, जिनका स्वर्गवास किसी भी महीने के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की अष्टमी को हुआ हो। इस दिन श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को सम्पूर्ण समृद्धियों की प्राप्ति होती है।

नवमी तिथि का श्राद्ध
नवमी तिथि का श्राद्ध 30 सितंबर को किया जायेगा। नवमी तिथि को उनका श्राद्ध किया जायेगा, जिनका स्वर्गवास किसी भी महीने के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की नवमी को हुआ हो। साथ ही सौभाग्यवती स्त्रियों, जिनकी मृत्यु उनके पति से पूर्व ही हो गई हो, उनका श्राद्ध कर्म भी 30 सितंबर को ही किया जायेगा। इसके अलावा माता का श्राद्ध भी इसी दिन किया जाता है, जिसके चलते इसे मातृ नवमी भी कहते हैं।  इस दिन श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है और मनचाहा दाम्पत्य सुख मिलता है।

दशमी तिथि का श्राद्ध 
दशमी तिथि का श्राद्ध 1 अक्टूबर को किया जायेगा। दशमी तिथि को उन लोगों का श्राद्ध किया जायेगा, जिनका स्वर्गवास किसी भी महीने के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की दशमी को हुआ हो। इस दिन श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को कभी लक्ष्मी की कमी नहीं होती। उसके पास धन-सम्पदा बनी रहता है।

एकादशी तिथि का श्राद्ध 
एकादशी तिथि का श्राद्ध 2 अक्टूबर को किया जायेगा। एकादशी तिथि को उन लोगों का श्राद्ध किया जायेगा, जिनका स्वर्गवास किसी भी महीने के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की एकादशी को हुआ हो। इस दिन श्राद्ध करना सबसे पुण्यदायक माना गया है। इस दिन श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को वेदों का ज्ञान प्राप्त होता है और उसे निरंतर ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

द्वादशी तिथि का श्राद्ध 
द्वादशी तिथि का श्राद्ध 30 अक्टूबर को किया जायेगा। द्वादशी तिथि को उन लोगों का श्राद्ध किया जायेगा, जिनका स्वर्गवास किसी भी महीने के कृष्ण या शुक्ल पक्ष पक्ष की द्वादशी को हुआ हो। साथ ही जिन लोगों ने स्वर्गवास से पहले सन्यास ले लिया हो, उन लोगों का श्राद्ध भी 30 अक्टूबर को ही किया जायेगा।  इस दिन श्राद्ध करने वाले के घर में कभी भी अन्न की कमी नहीं होती।

त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध
त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध 4 अक्टूबर को किया जायेगा। त्रयोदशी तिथि को उन लोगों का श्राद्ध किया जायेगा, जिनका स्वर्गवास किसी भी महीने के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को हुआ हो। साथ ही नवजात शिशुओं का श्राद्ध भी 4 अक्टूबर को ही किया जायेगा। इस दिन श्राद्ध करने से व्यक्ति को श्रेष्ठ बुद्धि, संतति, धारणा शक्ति, स्वतंत्रता, दीर्घायु और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध
चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध 5 अक्टूबर को किया जायेगा। चतुर्दशी तिथि को उन लोगों का श्राद्ध किया जायेगा, जिनका स्वर्गवास किसी भी महीने के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को हुआ हो। साथ ही उन लोगों का श्राद्ध भी इसी दिन किया जायेगा, जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो, यानि जिनकी मृत्यु किसी एक्सीडेंट या किसी शस्त्र आदि से हुई हो। इस दिन श्राद्ध करने से व्यक्ति को किसी भी अज्ञात भय का खतरा नहीं होता है।

अमावस्या तिथि का श्राद्ध
अमावस्या तिथि का श्राद्ध 6 अक्टूबर को किया जायेगा। इस दिन उन लोगों का श्राद्ध किया जायेगा, जिनका स्वर्गवास किसी भी महीने की अमावस्या को हुआ हो। साथ ही मातामह, यानी नाना का श्राद्ध भी इसी दिन किया जायेगा। इसमें दौहित्र, यानी बेटी का बेटा ये श्राद्ध कर सकते है। भले ही उसके नाना के पुत्र जीवित हों, लेकिन वो भी ये श्राद्ध करके उनका आशीर्वाद पा सकता है। बस श्राद्ध करने वाले के खुद के माता-पिता जीवित होने चाहिए। इसके अलावा जुड़वाओं का श्राद्ध, तीन कन्याओं के बाद पुत्र या तीन पुत्रों के बाद कन्या का श्राद्ध भी इसी दिन किया जायेगा। इसके अलावा अज्ञात तिथियों वालों का श्राद्ध, यानि जिनके स्वर्गवास की तिथि ज्ञात न हो, उन लोगों का श्राद्ध भी अमावस्या के दिन ही किया जाता है। साथ ही पितृ विसर्जन और सर्वपैत्री भी इसी दिन मनाया जायेगा और अमावस्या के श्राद्ध के साथ ही इस दिन महालया की भी समाप्ति हो जायेगी। इस श्राद्ध को करने वाला व्यक्ति अत्यंत सुख को पाता है।