सरकार से नाराज कर्मचारी, निकाय चुनाव में बिगड़ सकता है समीकरण

भोपाल| मध्य प्रदेश में कर्मचारी अधिकारियों की नाराजगी एक बार फिर सरकार की मुश्किलें बढ़ा रही है| पिछली सरकार में अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर हड़ताल आंदोलन करने वाले कर्मचारियों को सत्ता परिवर्तन के बाद उम्मीद बढ़ी थी| लेकिन सरकारी खजाने की माली हालत के चलते उनकी बड़ी मांगे अब तक अटकी हुई हैं| जिससे कर्मचारियों का आक्रोश बढ़ गया है|  नाराज कर्मचारियों ने अक्टूबर तक का अल्टीमेटम देते हुए नवंबर से आंदोलन की चेतावनी दी है। आंदोलन जनवरी तक चलेगा। इसके बाद काम-काज ठप कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की रणनीति बनी है। इसका असर आगामी समय में होने वाले निकाय चुनाव और झाबुआ उपचुनाव पर पड़ेगा| कर्मचारियों की नाराजी सरकार के समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं| 

सत्ता में आने से पहले कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में संविदा कर्मचारी, अतिथि शिक्षक, रोजगार सहायकों से नियमितीकरण का वादा किया था। इसके अलावा अन्य कर्मचारियों की वेतन विसंगति समेत अन्य मांगें पूरी करने की बात कही थी| लेकिन कर्मचारियों को अब भी अपनी मांगे पूरी होने का इन्तजार है|  फरवरी माह में सरकार ने कैबिनेट कमेटी का गठन किया था। कमेटी को तीन माह में अनुशंसा करना थी, लेकिन सात माह बाद भी नहीं दे सकी। कोई भी संविदा कर्मचारी नौकरी से नहीं निकाला जाएगा, लेकिन इसका भी पालन नहीं हो रहा है। हालांकि इस सम्बन्ध में निर्देश जारी हो चुके हैं| नियमित कर्मचारियों की नाराजगी भी सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकती है| सालों से प्रमोशन का इंतजार कर रहे इन कर्मचारियों को भरोसा दिया गया था कि सशर्त प्रमोशन मिलेगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। वेतन विसंगति आज भी बनी है। सिर्फ आश्वासन मिल रहे हैं जिससे कर्मचारी संगठन आंदोलन की राह पर आने की तैयारी कर रहे हैं| 

मध्यप्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के बैनर तले लघु वेतन कर्मचारी संघ, वाहन चालक कर्मचारी संघ सहित अन्य संगठनों की सामूहिक बैठक में निर्णय किया गया कि नवंबर के दूसरे सप्ताह में ब्लॉक और तहसील स्तर पर ज्ञापन सौंपे जाएंगे। दिसंबर के दूसरे सप्ताह में जिलास्तर पर धरना एवं प्रदर्शन कर रैली आयोजित कर कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन सौंपा जाएगा। जनवरी माह के दूसरे सप्ताह में भोपाल में प्रदेशस्तर का धरना आयोजित किया जाएगा, जिसमें संघ के पदाधिकारी सम्मिलित होंगे एवं रैली निकालकर मुख्य सचिव को मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन सौंपा जाएगा। 

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