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डीजीपी बोले..रेत और शराब पकड़ना पुलिस का काम नहीं

पन्ना| दारू और बालू पकड़ना पुलिस का काम नहीं है लेकिन पुलिस सारे काम छोड़कर यही करने में लगी है। यह बयान किसी और का नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ऋषि कुमार शुक्ला का है। पन्ना दौरे पर आए शुक्ला ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए यह बात कही। 

दरअसल पूरे मध्यप्रदेश में रेत और शराब को लेकर सड़क पुलिस की भूमिका पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं । आए दिन रेत के वाहनों को पकड़ना और उनसे वसूली करना या लगातार रेत माफियाओं के साथ में मिलीभगत के आरोप पुलिस पर लगते रहे हैं। भिंड जिले में तो पूरे के पूरे लहार थाने के ऊपर एक करोङ रुपए प्रति माह रेत माफियाओ से लेने का संगीन आरोप खुद कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह ने लगाया था।  ऐसे ही आरोपों के चलते एक थाने के 22 से ज्यादा सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया गया था । बावजूद इसके पुलिस रेत और शराब इन दोनों कामों में लगातार रुचि ले रही है जिसका एक बड़ा कारण इन दोनों कामों से होने वाली अवैध कमाई भी है।  पिछले दिनों खुद खनिज मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा था कि नई रेत नीति के तहत किसी भी रेत के वाहन को पकड़ना पुलिस की जवाबदेही नहीं है और यदि कोई पुलिस वाला ऐसा करता है तो यह ठीक उसी तरह का अपराध माना जाएगा जिस तरह का अवैध उत्खनन । मंत्री के इस बयान के बाद भी पुलिस की हालत नहीं सुधरी और लगातार रेत की वाहनों को पकड़ना उनकी चेकिग करना या थाने में खड़ा करना इस तरह के मामले लगातार पुलिस के सामने आ रहे हैं। 

हालत इतनी खराब है कि अभी हाल ही में इंदौर में आबकारी विभाग और पुलिस के बीच टकराव होते-होते बचे | जब पुलिस ने एक व्यवहार से निकलने शराब के ट्रक को यह कहकर पकड़ लिया कि अवैध परमिट पर जा रहा था। ऐसे में अब जब पुलिस महानिदेशक यह बात कह रहे हैं कि पुलिस को शराब या रेत में किसी भी तरह से नहीं पङना चाहिए तो क्या पुलिसकर्मी उनकी बात का पालन करेंगे ,यह देखने वाली  बात होगी क्योंकि कहीं ना कहीं  रेत हो या शराब दोनों के ही माध्यम से होने वाली एक मोटी कमाई जब बंद होगी तो दिक्कत तो होना स्वाभाविक है| 

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