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HAPPY NEW YEAR 2018: भारत में साल में पांच बार मनाया जाता है नया साल

भोपाल| नया साल आने वाला है। इस ख़ास अवसर को मनाने के सबके अलग-अलग तरीके होते हैं। कोई जमकर पार्टी करता है, तो कोई भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर, गुरुद्वारे जाता है। मगर दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो बहुत अलग अंदाज़ में नया साल मनाते हैं। वहीं भारत एक ऐसा देश है जहां साल में पांच बार नया साल मनाया जाता है| भारत देश अलग अलग बोलियों और संस्कृतियों का देश जिसके अनुसार हर संस्कृति में अलग अलग परम्परा है| जिसको मानते हुए लोग अपने अपने त्योहारों पर नया साल मनाते हैं| इन सबके बाद भी एक जनवरी को भी नए साल के जश्न में कोई कमी नहीं होती, इस दिन भी धूमधाम से लोग नए साल का स्वागत करते हैं| 

दुनिया में सबसे अधिक देशों में ईसाई नव वर्ष मनाए जाने की परंपरा है। ईसाई वर्ष 1 जनवरी से शुरू होकर 31 दिसंबर तक 12 महीनों में बंटा हुआ है।  हर धर्म में नववर्ष की तिथि अलग मानी गई है। खास बात यह है कि भले ही दुनिया के सभी धर्मों के रीति-रिवाज अलग-अलग हों लेकिन 1 जनवरी को सभी देशों में नए साल की धूम रहती है।


ईसाई नववर्ष 1 जनवरी से

1 जनवरी से नए साल की शुरुआत 15 अक्टूबर 1582 से हुई। इसके कैलेंडर का नाम ग्रिगोरियन कैलेंडर है। जूलियस सीजर ने ईसा पूर्व 45वें वर्ष में जूलियन कैलेंडर बनाया। तब से 1 जनवरी को नववर्ष मनाते हैं।


हिंदू नववर्ष

चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से | हिंदू नववर्ष का प्रारंभ चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से माना जाता है। इसे हिंदू नव संवत्सर या नया संवत भी कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा ने इसी दिन से सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। इसी दिन से विक्रम संवत के नए साल की शुरुआत होती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह तिथि अप्रैल में आती है। इसे गुड़ी पड़वा, उगादी आदि नामों से भारत के कई क्षेत्रों में मनाया जाता है।


पारसी नववर्ष : नवरोज से

पारसी धर्म का नया वर्ष नवरोज उत्सव के रूप में मनाया जाता है। आमतौर पर 19 अगस्त को नवरोज का उत्सव मनाया जाता है। 3000 वर्ष पूर्व शाह जमशेदजी ने नवरोज मनाने की शुरुआत की थी।


पंजाबी नववर्ष: वैशाखी

पंजाब में नया साल वैशाखी पर्व के रूप में मनाया जाता है। जो अप्रैल में आती है। सिख नानकशाही कैलेंडर के अनुसार होली के दूसरे दिन से नए साल की शुरुआत मानी जाती है।


जैन नववर्ष

दीपावली के अगले दिन से | जैन नववर्ष दीपावली के अगले दिन से शुरू होता है। इसे वीर निर्वाण संवत भी कहा जाता है। इसी दिन से जैनी अपना नया साल मनाते हैं।

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