राज्य सरकार ने डीएफओ शैलेंद्र गुप्ता को किया निलंबित, ये रही निलंबन की वजह

इसके बाद उन्होंने 21 जनवरी को कालपी डिपों में हुई नीलामी से जुड़े दस्तावेजों को जब्त करते हुए एक रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी।

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जबलपुर, संदीप कुमार। प्रदेश के बड़े वन काष्ठ (लकड़ी) डिपों में शुमार जबलपुर सर्किल के कालपी(मंडला) डिपों में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला उजागर होने के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। इस भ्रष्टाचार में लंबी चली जांच के बाद वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) स्तर के एक अधिकारी पर गाज गिरी है। इस कार्रवाई के बाद यह बात तो शीशे की तरह साफ है कि घालमेल तो हुआ था, जिस पर अभी तक पर्दा डाला जा रहा था।

शैलेंद्र गुप्ता को शासन ने किया निलबिंत

इस घोटाले में डीएफओं उत्पादन शैलेंद्र गुप्ता को शासन ने निलंबित करते हुए उन्हें मुख्यालय अटैच कर दिया है। बताया जाता है कि इस कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय तक फाइल गई थी। वहीं उनके स्थान पर अब डीएफओं बासु कनौजिया को डीएफओ उत्पादन बना कर भेजा गया है।

ठेकेदार की शिकायत पर जागा अमला

जानकारी के मुताबिक चीएफ कन्जव्रेटर फॉरेस्ट (सीसीएफ) जबलपुर सर्किल आरडी मेहला को फोन पर डीएफओं (उत्पादन) शैलेंद्र गुप्ता द्वारा नीलामी प्रक्रिया में की जा रही वित्तीय अनियमितता की शिकायत मिली थी। शिकायत शहर के एक काष्ठ ठेकेदार द्वारा ही की गई थी। जिसके बाद सीसीएफ आर.डी मेहला ने कालपी डिपों में जाकर लकड़ी नीलामी से जुड़े दस्तावेजों की जांच की तो उन्हें प्रारंभिक तौर पर भारी गोलमाल नजर आया। इसके बाद उन्होंने 21 जनवरी को कालपी डिपों में हुई नीलामी से जुड़े दस्तावेजों को जब्त करते हुए एक रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी।

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भारी वित्तिय अनियमितता

मामला वित्तीय अनियमितता से जुड़ा हुआ था। लिहाजा मुख्यालय ने एपीसीसीएफ एस.पी शर्मा,सी.सी.एफ आरडी मेहला एवं अन्य दो डीएफओं की एक जांच कमेटी का गठन करते हुए डीएफओ शैलेंद्र गुप्ता के कार्य क्षेत्र में आने वाले कालपी सहित अन्य दो काष्ठ डिपों में हुई नीलामियों की जांच की गई। जांच कमेटी ने प्रारंभिक जांच में पाया कि डीएफओ शैलेंद्र गुप्ता द्वारा बिड शीट में छेड़छाड़ कर शासन को लाखों रूपए का चूना लगाया गया है।

13 लाख का गोलमाल

जांच कमेटी ने पाया कि 21 जनवरी को हुई जंगली काष्ठ की नीलामी में प्रक्रिया के पूर्ण होने के बाद डीएफओ शैलेंद्र गुप्ता ने बिड शीट में छेड़छाड़ की थी। शीट में नीलामी प्रक्रिया में 13 लाख की गफलत किए जाने की बात सामने आई। सबसे आश्चर्य की बात तो यह कि 21 जनवरी को हुई नीलामी का ज्यादात्तर ठेकेदारों ने बहिष्कार कर रखा था। हालांकि जांच प्रक्रिया में देरी का लाभ उठाते हुए डीएफओ शैलेंद्र गुप्ता ने कई नोट शीटों को कमेटी के पहुंचने के पहले ही बदल लिया था,लेकिन 21 जनवरी के ऑक्सन से जुड़े दस्तावेजो को सीसीएफ मेहला पूर्व में ही जप्त कर चुके थे। लिहाजा उसमें वित्तीय अनियमितता उजागर हो गई।

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