Budget 2021-22: कर्मचारी नेता का दावा,आंकड़ों के नाम पर प्रदेश भर के कर्मचारियो को भ्रमित कर रही सरकार

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भोपाल,डेस्क रिपोर्ट। आज के अखबारों में कर्मचारियों को सातवें वेतनमान की 75% राशि देने की बात कह कर मीडिया कर्मचारियों को बड़ी राहत की खबर दे रही है। जबकि इसका सच तो किसी को पता ही नहीं है। सच तो यह है कि 22 जुलाई 2017 को सातवां वेतनमान देने के आदेश होने के बाद 1 जनवरी 2016 से जून 2017 तक 18 महीने की राशि को सरकार द्वारा मई 2018 ,मई 2019 और मई 2020 में देने की बात कही गई थी। लेकिन, यह राशि भी पूरी नगद न देकर 50% जीपीएफ खाते में एवं 50% नगद भुगतान के आदेश जारी हुए।

इसे उदाहरण के साथ समझा जा सकता है तृतीय श्रेणी कर्मचारी की 18 महीने की राशि 114654 रुपए बनती है। इसकी पहली किस्त मई 2018 में 38218 रुपए दूसरी किस्त मई 2019 में 38218 और तीसरी अंतिम किस्त मई 2020 में 38218 रुपए मिलनी थी। 2018 और 2019 की राशि तो मिल गई लेकिन कोरोना के कारण मई 2020 में यह राशि नहीं मिली नवंबर 2020 में 25% राशि देने के आदेश हुए थे।

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लेकिन, 38218 रुपए में से 25% के हिसाब से 9555 दे दी जानी चाहिए थी, उसमें से भी 1147 रुपए कर्मचारियों के खाते में जमा कर 8408 नगद दिए गए ।

तो अब जो राशि बची है यानी कि 38218 में से 28663। उसी को 75% बता कर सरकार वाहवाही लूट रही है जबकि यह राशि कर्मचारी को मई 2020 में ही मिल जानी थी। इसी प्रकार एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को 18 महीने की कुल राशि 74616। जो कि 3 किस्तों में देनी थी। इसके लिए सरकार को हर किस्त में 24872 रुपए मिलने थे। मई 2018 एवं 2019 में 24872 की राशि मिली लेकिन 2020 में मिलने वाली राशि उक्त राशि में से 25% दिए है। 746 खाते में जमा करने के बाद ₹5472 मिले शेष 75% ₹18654 की राशि को देने की बात कही जा रही है इसमें से भी 12% राशि सामान्य भविष्य निधि विभागीय भविष्य निधि में जमा कर दी जाएगी। समाचार पत्रों में सरकार द्वारा खबर को लेकर ऐसा लग रहा है कि कर्मचारियों को बहुत मिल गया ।

कर्मचारी को जो राशि मई 2020 में एक किश्त में मिलनी थी। वह भी किस्तों में 25% और 75% दी जा रही है। जो कर्मचारियों के साथ घोर अन्याय है । इसी प्रकार अखबार में छपे लेख में वित्त मंत्री जी के अनुसार कहा कि केंद्र सरकार 5% देगी तो हम दे देंगे जबकि हकीकत में प्रदेश के कर्मचारियों को जुलाई 19 से 5% महंगाई भत्ता केंद्रीय कर्मचारियों से कम मिल रहा है। केंद्र के कर्मचारियों को 17% महंगाई भत्ता मिल रहा है। वहीं राज्य के कर्मचारियों को 12% महंगाई भत्ता मिल रहा है। 5% पहले से ही पीछे हैं बजट को देखते हुए ऐसा लग रहा है कर्मचारियों की कीमत सरकार ने बहुत ही कमतर आंकी ।बजट मे कर्मचारियों को कुछ न देकर कर्मचारी के साथ विश्वासघात धोखा किया है। माननीय मुख्यमंत्री जी से मांग है प्रदेश के कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों की तरह जुलाई 19 से 17% महंगाई भत्ता एवं कोरोना काल में रोकी गई वेतन वृद्धि तत्काल जारी करना चाहिए।