ब्लैक फंगस मरीजों के लिए राहत की खबर, IIT Hyderabad ने बनाई कम कीमत की ओरल वैक्सीन

वही ब्लैक फंगस के गंभीर स्थिति से पीड़ित मरीजों को इस दवा के 70 डोज जरूरी किए गए हैं।

हैदराबाद, डेस्क रिपोर्ट। कोरोना की दूसरी लहर में कोरोना (corona) से ठीक होने के बाद देशभर में ब्लैक फंगस (black fungus) के मरीजों में अचानक से बढ़ोतरी देखी गई है। जिसके बाद पोस्ट कोविड (post covid) ब्लैक फंगस से प्रभावित रोगियों के उपचार के लिए amphotericin B इंजेक्शन (injection)  को जीवन रक्षक दवाइयों में शामिल किया गया है।

वही आईआईटी हैदराबाद (IIT Hyderabad)  की टीम ने 2 साल के कड़े शोध के बाद amphotericin B के एक ओरल रूप को विकसित किया है। इस दवा को कालाजार नामक एक घातक फंगल इंफेक्शन के लिए भी उपयोग में लाया जा सकता है। इसके साथ ही एएमबी (AMB) की एक दवा की कीमत 3000 रूपए से अधिक है और इसे 30 दिन के इलाज के दौरान ठीक किया जा सकता है।

इस मामले में डॉक्टर सप्तर्षी मजूमदार (saptarshi majumdar) ने कहा के कई PhD विद्वान के नेतृत्व में एक टीम तैयार की गई थी। जिसमें 2 सालों के शोध और प्रयोगशाला स्तर के परीक्षण के बाद नैनोफाइबर का उपयोग कर एएमबी (AMB) के ओरल स्वरूप को तैयार किया है। वही ब्लैक फंगस से पीड़ित एक मरीज को उसकी गंभीरता के अनुसार ठीक होने के लिए 70 दवा की आवश्यकता होती है। इसके अलावा उस मरीज को 30 दिन अस्पताल में डॉक्टर की निगरानी में रखा जाता है।

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डॉक्टर सप्तर्षि मजूमदार ने बताया की 1 डोज की कीमत 3000 से अधिक रखी गई है। यह एक कम लागत में तैयार किया गया दवा है। वही डॉक्टर सप्तर्षि मजूमदार और डॉक्टर शेखर चंद्र शर्मा ने बताया दवा का उपयोग ब्लैक फंगस के साथ-साथ कालाजार के उपचार में भी किया जा सकेगा। वहीं उन्होंने कई फार्मा कंपनियों से अपील की है कि वह आगे आए और इस दवा का उपयोग परीक्षण कर बड़े पैमाने पर इसे वितरण के लिए तैयार करें।

क्या है Amphotericin B

Amphotericin B एक एंटीफंगल दवाई जिसका उपयोग गंभीर फंगल संक्रमण के लिए किया जाता है। इस जगह का उपयोग कालाजार के लिए भी किया जाता है। इस दवा में एस्पेरगिलोसिस ब्लास्टोमीकॉसिस और क्रिप्टोकाकोसिस शामिल है। यह आमतौर पर नस में दिया जाने वाला इंजेक्शन है लेकिन आईआईटी हैदराबाद की एक टीम ने इसके ओरल स्वरूप को विकसित किया है

बता दें कि इस दवा के तहत अनुचित दवा खुराक या अधिक मात्रा में गुर्दे की विफलता को ठीक किया जाता है। डॉक्टर की देखरेख में और इस दवा के नियंत्रण खुराक से ब्लैक फंगस के मरीजों को ठीक किया जा रहा है। वही ब्लैक फंगस के गंभीर स्थिति से पीड़ित मरीजों को इस दवा के 70 डोज जरूरी किए गए हैं।