सासन पावर फिर अपराध करने की तैयारी में, प्रदूषण की चपेट में लोग

सिंगरौली। राघवेन्द्र सिंह गहरवार।

10 अप्रैल को सासन अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट का सिद्धिकला स्थित एक डैम टूट जाने के कारण हज़ारों टन राखड़ गोहवैया नदी से होते हुए रिहंद में जा मिला था साथ ही 6 लोगों की मृत्य भी हो गयी थी। चिरायु जन कल्याण समिति की टीम ने जब मौके का जायजा लिया तो पाया कि कंपनी अब आनन फानन में वहां से राखड़ उठा कर हर्रहवा स्थित डैम के किनारे पाटना शुरू कर दिया है। गर्मी में यह राख उड़ कर ग्रामीणों के घरों तक पहुंचेगा जिससे ग्रामीण इस प्रदुषण के चपेट में आ कर भिन्न भिन्न प्रकार की बीमारियों से ग्रसित होंगे। ये राखड़ उड़ कर गाँव के जल स्रोत को प्रदूषित करेगा और इसके कारण इंसान और मवेशी दोनों को स्वास्थ सम्बंधित दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

चिरायु जन कल्याण समिति के अध्यक्ष शशि देव पाण्डेय ने बताया कि वहां पर हर्रहवा स्थित डैम से केमिकल का रिसाव भी हो रहा है। जिसके कारण वहीँ के ग्रामीण पूर्व से ही प्रभावित हैं। उनके घर के पास कई गड्ढों में खतरनाक केमिकल भर गया है। इस केमिकल के कारण वहां पर यूकेलिप्टस और सीसम के कुछ पेड़ भी मुर्झा गए हैं। ग्रामीण वहां का प्रदूषित जल पीने के लिए पहले से ही विवश थे कि कंपनी ने हवा में जहर घोलने का कसर भी नहीं छोड़ा। बारिश में यह राखड़ बह के भूमि को चपेट में लेते हुए रिहंद में जा कर मिलेगा और पहले से एन.टी.पी.सी के द्वारा प्रदूषित किये पानी को और प्रदूषित करेगा और उस पानी पे निर्भर करीब 20 लाख लोगों के नसों में जहर घोलने का काम करेगा। भ्रमण के दौरान चिरायु की टीम ने यह भी देखा कि रोड पर राखड की गीली परत देखी जा सकती है जो कुछ ही दिनों में सुख कर आने जाने वाले वाहन चालकों एवं पैदल चलने वाले लोगों को सांस भी नहीं लेने देगा। वैसे भी राख को उठाकर वापस एस डाइक में ही भरना चाहिए। बाहर गांव में परमिशन ही नहीं है भरने की तो कैसे बाहर डंप किया जा रहा है? लो लाइंग एरिया को फीलिंग करने हेतु कभी भी गीले राख का उपयोग नहीं किया जाता और हर्रह्वा में जो राख पाटी जा रही है वह गीली राख है जो 10 अप्रैल को राखी बांध टूटने से चारों तरफ फैल गई थी। अतः हर्रह्वा में गीली राख भराव गलत किया जा रहा है। स

भी पावर स्टेशंस के ऐश डाईक निर्माण हेतु पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र में यह विशेष कंडिका रहती है कि राखड बांध के बाहरी मेड़ों पर 50 मीटर की सघन वृक्षारोपण किया जाना सुनिश्चित करना होता है इसी तरह सासन पावर प्लांट के राखड बांध जो हर्रह्वा ग्राम में स्थित है, वहां भी 50 मीटर के चौड़ाई में राखड बांध पर सघन वृक्षारोपण किया जाना था परंतु चिरायु जनकल्याण की टीम ने जब दौरा किया तो देखा गया कि कोई वृक्षारोपण नहीं हुआ है। और इसे लेकर अधिवक्ता आशीष पाण्डेय ने भी नाराजगी जताई और कहा कि यह तो पहले से ही सासन पावर प्लांट पर्यावरण अनापत्ति की शर्तों का उल्लंघन करते चला आ रहा है और यह प्रकृति एवं मानव स्वास्थ्य के लिए प्रतिकूल होने से एक अपराध की श्रेणी में भी आता है।