Sehore: लॉकडाउन के बीच गहराने लगा दवाइयों का संकट

सीहोर।अनुराग शर्मा।

लॉकडाउन लंबा खिंचने की आशंका के चलते प्रशासन ने जरूरी दवाइयों के मंडराते संकट के निराकरण में तत्परता नहीं दिखाई। सीहोर में भी लॉक डाउन के हालात बनते देर नहीं लगी कोरोना के लक्षण सर्दी-खांसी-बुखार होने से अधिकांश लोगों द्वारा इन दवाइयों की अत्यधिक मात्रा में खरीदी करने से ये दवाइयां मार्केट में कम हो ही रही हैं।  इसके साथ ही बीपी, किडनी और शुगर मरीज के लिए नियमित डोज वाली दवाइयों का संकट भी गहराने लगा है।

यही नहीं जिन मरीज को सप्ताह में दो बार डायलिसिस कराना होती है वे भी तनाव ग्रस्त हैं। प्रशासन ने दवाई दुकानें खुली रखने की अनुमति दे रखी है। एक से दूसरे स्थान पर दवाइयां ले जाने वाले दुकानदारों को भी सहूलियत दे रखी है। इस सबके बाद भी दवाइयों का संकट गहराने लगा है तो उसका मुख्य कारण है दवा बाजार के थोक दुकानदारों तक ही दवाइयां नहीं पहुंच पा रही हैं। भोपाल दवा बाजार में थोक-रिटेल मिलाकर करीब 450 दुकानें हैं जिनमें से करीब 250 दुकानें नियमित खुल रही हैं किंतु कई दवाइयां इनके पास भी नहीं है।

दवाइयों की सप्लाय में इसलिए है परेशानी

कंपनियां सीधे दवा बाजार के थोक व्यापारी को माल भेजते हैं और उनसे खुदरा व्यापारी दवाइयां लेते हैं। इस महामारी के विश्वव्यापी असर के चलते चीन, जर्मनी आदि देशों से भारतीय दवा निर्माता कंपनियों को रा मटेरियल की सप्लाय नहीं हो पा रही है। देश की प्रमुख दवा निर्माता कंपनियों में उत्पादन बंद होने का प्रमुख कारण रा मटेरियल के साथ ही कर्मचारियों का नहीं आ पाना, ट्रांसपोर्टेशन, कोरियर सर्विस आदि बंद होना भी है।

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