MP पंचायत चुनाव: सरकार ने कलेक्टर्स को जारी किए आदेश, 17 जनवरी से शुरू होगी प्रक्रिया

वार्ड प्रभारियों से 17 जनवरी तक उनके क्षेत्र की जनसंख्या से संबंधित जानकारी मांगी गई है।

पंचायत चुनाव

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश में पंचायत चुनाव (MP Panchayat Elections) पर बड़ी अपडेट सामने आ रही है। दरअसल पंचायत चुनाव निरस्त होने के बाद अब सरकार द्वारा एक नए आदेश (order issued) जारी किया गया है। राज्य शासन द्वारा कलेक्टर्स (Collectors) को आदेश जारी किए गए। जिसके मुताबिक पंचायतों में परिसीमन का आदेश जारी कर दिया गया।

दरअसल पंचायत विभाग ने सभी जिला कलेक्टर्स को परिसीमन (delimitation) के आदेश जारी कर दिए हैं। जिसके बाद त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रक्रिया एक बार फिर से शुरू हो गई है। पंचायत एंड ग्रामीण विकास विभाग (Panchayat and Rural Development Department) मध्यप्रदेश द्वारा जारी आदेश में वार्ड प्रभारियों से 17 जनवरी 2022 तक उनके क्षेत्र की जनसंख्या से संबंधित जानकारी मांगी गई है।

वही बताया जा रहा है कि परिसीमन की प्रक्रिया 17 जनवरी से शुरू होकर 25 फरवरी 2022 तक चलेगी। मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव निरस्त होने के बाद लगातार कोई ना कोई बड़े आदेश से देखने को मिल रहे हैं। इस बीच पंचायतों के संचालन के लिए पहले राज्य शासन द्वारा सरपंच और सचिवों को जिम्मेदारी दी गई थी। बाद में शिवराज सरकार ने अपना फैसला वापस ले लिया था। जिसके बाद सरपंच-सचिव द्वारा वित्तीय अधिकार की मांग वापस की जा रही थी। इस मामले में सरपंच सरकार के खिलाफ लामबंद होते नजर आ रहे थे। जिस पर अब सरकार ने आदेश जारी किया है। नए आदेश के मुताबिक 17 जनवरी से पंचायत सचिवों से जानकारी मांगी गई है।

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ज्ञात हो कि इससे पहले विपक्ष द्वारा परिसीमन को लेकर शिवराज सरकार को घेरा गया था। इस मामले में भाजपा और कांग्रेस के बीच विवाद होता देख कर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था। वही शिवराज सरकार द्वारा कमलनाथ सरकार द्वारा लिया गया फैसला निरस्त किया गया था। बाद में नए सिरे से परिसीमन की घोषणा की गई थी।

वहीं पंचायत चुनाव पर ओबीसी आरक्षण का मामला अभी कोर्ट में लंबित है। इस पर लगातार सुनवाई की जा रही है। माना जा रहा है कि जब तक 27% ओबीसी आरक्षण को कोई फैसला नहीं हो जाता। तब तक पंचायत चुनाव की घोषणा नहीं की जा सकेगी। प्रदेश में पंचायत चुनाव पिछले 2 सालों से ज्यादा समय से रुके हुए हैं। इस दौरान सरपंचों का 5 साल का कार्यकाल भी बढ़कर 7 साल का हो चुका है। अभी हाल में पंचायतों के वित्तीय अधिकार के लिए एक बार फिर से सभी सरपंच लामबंद होते नजर आ रहे थे।

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