शिवराज सरकार की बड़ी उपलब्धि, लॉकडाउन के बावजूद रोजगार देने के मामले में टॉप पर काबिज

इसके अलावा टॉप टेन राज्य में छत्तीसगढ़ को भी शामिल किया गया। छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर 3.00% आंकी गई है।

MP News

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। कोरोना काल (Corona Era) के दौरान एक तरफ जहां देश आर्थिक महामारी (Economic epidemic) से जूझ रहा है। वहीं दूसरी तरफ बेरोजगारों (unemployed) की संख्या में भी वेतन वृद्धि होती जा रही है हालांकि इस बीच CMIE की एक रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश सरकार (MP Government) को बड़ी कामयाबी मिली है। दरअसल रोजगार देने के मामले में मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर शामिल है। वहीं प्रदेश में बेरोजगारी दर 1.4% रिकॉर्ड की गई है। जबकि पहले स्थान पर असम को शामिल किया गया है।

दरअसल कोरोना काल और लॉक डाउन के बावजूद मध्यप्रदेश बड़ी उपलब्धि हासिल की है। शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chauhan) के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में बनी शिवराज सरकार (shivraj government) ने युवाओं को रोजगार देने के मामले में देश में दूसरे नंबर पर अपनी उपलब्धि दर्ज कराई है। सेंटर फॉर मोनेट्री इंडियन इकोनॉमी (Center for Monetary Indian Economy) के आंकड़ों की माने तो मध्य प्रदेश में बेरोजगारी दर 1.4 फीसदी रिकॉर्ड की गई है। पहले स्थान पर 0.2% के साथ असम को रखा गया है जबकि मध्य प्रदेश और मेघालय 1.4% बेरोजगारी दर के साथ दूसरे नंबर पर काबिज हुए हैं।

Read More: सीएम शिवराज के अधिकारियों को निर्देश- ना करें अभद्रता, इन कलेक्टर्स से जाहिर की नाराजगी

इसके अलावा टॉप टेन राज्य में छत्तीसगढ़ को भी शामिल किया गया। छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर 3.00% आंकी गई है। वही CMIE के आंकड़ों के अनुसार देश में बेरोजगारी दर 11.4% बताई गई है। इससे पहले देश में बेरोजगारी दर 2020 में 21 फीसद आंकी गई थी, जो अब घटकर 11.2% पर पहुंच गई है। वहीं नवंबर में छत्तीसगढ़ की बेरोजगारी दर 3.5% रिकॉर्ड की गई थी जो अब घटकर 3% पर पहुंच गई है। 27.3% के साथ 26 नंबर पर दिल्ली (Delhi) को रखा गया है। वहीं राजस्थान (Rajasthan) 28% के साथ 27 नंबर पर शामिल है।

बता दें कि मध्य प्रदेश में कोरोना के दूसरे चरण में पूर्ण रूप से लॉकडाउन में ना लगाकर कोरोना कर्फ्यू को लागू किया गया था। इसके साथ ही साथ शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में बनी शिवराज सरकार द्वारा लगातार प्रवासियों मजदूर सहित अनेकों बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध कराए गए थे। अब ऐसी स्थिति में जहां कोरोना से आर्थिक स्थिति चरमरा गई है। वहीं लॉकडाउन की वजह से जहां व्यवसायिक और औद्योगिक इकाइयां बंद है। ऐसी स्थिति में मध्यप्रदेश के लिए आखिरी निश्चय ही संतोषजनक होंगे।