मप्र विधानसभा: अनिश्चितकालीन समय के लिए मानसून सत्र स्थगित, हंगामे के बीच विधेयक पास

वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा वर्ष 2021-22 के लिए पहला अनुपूरक बजट पेश किया।

मप्र विधानसभा

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। एक बार फिर मप्र विधानसभा का मानसून सत्र (Monsoon Session of MP assembly) हंगामे की भेंट चढ़ गया है। विधानसभा को अनिश्चितकालीन के लिए स्थगित कर दिया गया है।सोमवार 9 अगस्त से शुरु हुआ यह विधानसभा सत्र 12 अगस्त तक चलना था, लेकिन विपक्ष के हंगामे के चलते 4 दिन का सत्र डेढ़ दिन भी ना चल सका और खत्म हो गया। हालांकि हंगामे के बीच आज प्रदेश की शिवराज सरकार (Shivraj Government) की तरफ से वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा (Finance Minister Jagdish Deora)  वर्ष 2021-22 के लिए पहला अनुपूरक बजट पेश किया।

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इसके अलावा हंगामे के बीच शिवराज सरकार (Shivraj Government) ने अनुपूरक बजट और दो संशोधन विधेयक पास करा लिए।इसमें सरकार ने अवैध कॉलोनी को वैध करने और जहरीली शराब से मौत पर फांसी की सजा के प्रावधान वाले विधेयक शामिल थे। अब दोनों विधयकों को राज्यपाल मंगूभाई पटेल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और फिर ये प्रदेश में लागू हो जाएंगे।

आज विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन महंगाई और ओबीसी आरक्षण (OBC reservation) को लेकर जमकर हंगामा हुआ। सत्ता पक्ष और विपक्ष के आरोप-प्रत्योराप के बीच एक बार कार्यवाही भी स्थगित की गई।ओबीसी आरक्षण को लेकर कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा में गांधी प्रतिमा के पास काला एप्रेन पहनकर प्रदर्शन किया। इस पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष को जमकर घेरा और पूछा 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण बरकरार रखने के लिए कांग्रेस ने क्या किया, जवाब दे कमलनाथ ?

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इससे पहले सोमवार को विधानसभा में आदिवासियों और शब्दों पर बैन जैसे कई मुद्दों पर चर्चा हुई और जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया और आसंदी के सामने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करने लगे।इसके बाद सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित कर दी गई।वही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Chief Minister Shivraj Singh Chouhan) ने घोषणा की 15 नवंबर को जनजाति गौरव दिवस मनाया जाएगा और उस दिन ऐच्छिक अवकाश रहेगा।

इतना ही नहीं विधायकों पर शब्दों की आचार संहिता लगाए गए बैन पर भी जमकर बवाल मचा। भोपाल हुजूर क्षेत्र से बीजेपी विधायक (BJP MLA) व पूर्व प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने कहा है कि बंटाढार और नक्लवाद जैसे शब्दों को असंसदीय ना मानते हुए विलोपित करने की मांग उठाई, तो कांग्रेस विधायक  सज्जन सिंह वर्मा (Congress MLA Sajjan Singh Verma) ने भी मामू जैसे कई शब्दों को खत्म करने की मांग की।