सुबह का बोला, शाम को भूला: कोरोना मौत के आंकड़ों पर एक अधिकारी के दो अलग-अलग बयान

अब सवाल यही है कि आखिरकार सच क्या है? और यदि सच में सच को छुपाने की कोशिश की गई है तो इससे बड़ी लापरवाही और शर्म की बात कुछ नहीं।

भोपाल, गौरव शर्मा। कोरोना (corona) से उज्जैन (ujjian) जिले में हुई मौतों के आंकड़ों को लेकर एक अधिकारी के दो अलग-अलग बयान सामने आए हैं। दरअसल सुबह अधिकारी ने जो बयान दिया वह कमलनाथ (kamalnath) के ट्वीट (tweet) करते ही शाम होते-होते बदल गया। आखिर बयान क्यों बदला, किसके दबाव में बदला, यह जांच का विषय है।

उज्जैन जिले में शनिवार को एक दिलचस्प मामला हुआ। दरअसल महिला बाल विकास विभाग (Women and Child Development Department) के असिस्टेंट डायरेक्टर साबिर अहमद सिद्दीकी मीडिया को यह बता रहे थे कि किस तरह से राज्य सरकार कोरोना के कारण पीङित हुए उन बच्चों की मदद करने जा रही है जिनके सिर से मां बाप का साया या अकेले पिता का साया छिन गया है। सिद्दीकी साहब यह बताते बताते वह आंकड़ा भी बता गए जो शायद उन्हें बताना नहीं था।

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उन्होंने कहा कि जिले में 1311 ऐसे बच्चे चिन्हित किए गए हैं जिनके माता-पिता या सिंगल पैरंट की मृत्यु कोरोना के कारण हुई है। बस, फिर क्या था। कांग्रेस ने इस बयान को पकङ लिया। प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ का बयान आया कि जब जिले में कुल कोरोना से हुई मौतों का कुल सरकारी आंकड़ा ही 171 है तो फिर 1311 का आंकड़ा कैसे आया? कमलनाथ ने यह भी कहा कि अब तो मुख्यमंत्री स्वीकार कर लें कि वास्तव में सरकार ने मौतों के आंकड़े छुपाने की बड़ी साजिश की है।

दरअसल कमलनाथ करीब डेढ़ माह पहले सरकार पर यह आरोप लगा चुके हैं कि उसने कोरोना से हुई मौतों के आंकड़े छुपाए हैं और प्रदेश में सवा लाख से ज्यादा लोग कोरोना के कारण कालवित हुए हैं। कमलनाथ के ट्वीट करते ही भूचाल आ गया और आनन-फानन में जिला प्रशासन ने असिस्टेंट डायरेक्टर महिला बाल विकास महोदय की क्लास ले डाली। उन्हें बयान जारी करना पड़ा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मेरा बयान गलत तरीके से चलाया जा रहा है। हालांकि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया व प्रिंट मीडिया सभी के पास उनका सुबह का भी वह बयान मौजूद है जिसमें वह खुद 1311 मुद्दों की बात स्वीकार कर रहे हैं। अब सवाल यही है कि आखिरकार सच क्या है? और यदि सच में सच को छुपाने की कोशिश की गई है तो इससे बड़ी लापरवाही और शर्म की बात कुछ नहीं।