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नई दिल्ली/भोपाल | अपने भाषणों और सोशल मीडिया पर एक दुसरे के खिलाफ तल्ख़ टिप्पणी करने वाले दो दिग्गज नेता का राज्यसभा में भी आमना सामना हो गया| बात कर रहे हैं गृह मंत्री अमित शाह और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की|   राज्यसभा में आतंकवाद के खिलाफ UAPA संशोधन बिल पास हो गया|  इस बिल पर चर्चा के दौरान अमित शाह और दिग्विजय सिंह के बीच तीखी नोंकझोंक देखने को मिली|

चर्चा के दौरान कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इस विधेयक में संशोधन का विरोध किया। दिग्विजय सिंह ने भाजपा पर आतंकवाद से समझौता करने का आरोप लगाया। सिंह ने इस विधेयक के प्रावधानों के दुरूपयोग की आशंका जताते हुए कहा कि कोरेगांव मामले में उनका भी नाम जोड़ा गया है| उन्होंने आशंका जताई, “आप (सरकार) सबसे पहले मुझे ही उसमें (आतंकवादी की सूची में) डालेंगे.”| गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें जवाब देते हुए कहा, ”दिग्विजय सिंह जी कह रहे हैं कि मुझे ही आतंकी घोषित कर दो। आपका गुस्सा जायज है, वे क्योंकि अभी-अभी चुनाव हारे हैं। लेकिन मैं भरोसा दिलाता हूं कि आप कुछ नहीं करोगे तो कुछ नहीं होगा।” 

अमित शाह ने कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह के उन सवालों का भी जवाब दिया जिसमें उन्होंने NIA के द्वारा केस साबित ना करने का आरोप लगाया था| गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में बताया कि NIA के तीन मामलों में ही सजा नहीं हुई है और तीनों ही मामले राजनीतिक द्वेष से पीड़ित थे. इस दौरान अमित शाह ने मामलों को भी गिनाया और साथ ही तर्क भी दिए| अमित शाह ने बताया कि समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट मामले में शुरुआत में कुछ लोग पकड़े गए थे, लेकिन बाद में चुनाव आ गए और फिर कांग्रेस की सरकार ने उन लोगों को छोड़ दिया. और कुछ विशेष लोगों को नकली मामला बनाकर पकड़ा|