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जल गंगा संवर्धन अभियान : सीएम मोहन यादव ने कहा ‘पृथ्वी को जीवंत रखने के लिए जल स्त्रोतों की सुरक्षा आवश्यक’, प्रदेशभर में लगाए जाएँगे साढ़े 5 करोड़ पौधे

Written by:Shruty Kushwaha
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मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी संस्कृति में सारे व्रत त्योहार पर्व ऋतुओं के अनुसार मनाए जाते हैं। जैसे ग्रीष्म ऋतु में गंगा दशमी मनाई जाती है। हम जल स्त्रोतों से समृद्ध हैं और हमारा कर्तव्य है कि इन्हें सुरक्षित रखें। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हम हरियाली अमावस्या पर पौधारोपण का काम शुरु करेंगे।
जल गंगा संवर्धन अभियान : सीएम मोहन यादव ने कहा ‘पृथ्वी को जीवंत रखने के लिए जल स्त्रोतों की सुरक्षा आवश्यक’, प्रदेशभर में लगाए जाएँगे साढ़े 5 करोड़ पौधे

Jal Ganga Sanvardhan Abhiyan : सीएम डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में आयोजित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ में सहभागिता की सभी लोगों से जल स्त्रोतों के संवर्धन और संरक्षण का आह्वान किया। पर उन्होंने कहा कि हमें अपनी नदियों, तालाब, बावड़ी सहित सभी जल स्त्रोतों को साफ़ रखने, प्रदूषण मुक्त करने और संरक्षित करने के लिए अपना योगदान देना चाहिए। बता दें कि 5 जून को पर्यावरण दिवस से प्रारंभ हुआ जल गंगा संवर्धन अभियान 16 जून गंगा दशमी तक चलेगा।

‘पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए जल स्त्रोतों की सुरक्षा जरूरी’

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विश्व पर्यावरण दिवस पर रायसेन जिले में झिरी बहेडा स्थित बेतवा नदी के उद्गम स्थल पर जल गंगा संवर्धन अभियान का शुभारंभ किया था। इस अभियान के दौरान जल संवर्धन और संरक्षण के लिये आम लोगों को प्रेरित करने के लिये विविध गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत वो देश है जिसने प्रकृत के साथ तालमेल मिलाने का काम किया है। हमने जल में भी जीव देखा, वनस्पति में भी जीव देखा। हमारी सृष्टि का अस्तित्व जल के बिना संभव नहीं। पृथ्वी पर सत्तर प्रतिशत जल है। जल में भी जीव है। जल भी मरता है। अगर आप अपने घर में किसी बोतल में जल लाकर रख लें तो कुछ समय बाद वो प्रदूषित हो जाता है। लेकिन कुएँ-नदियों-तालाब में जल सुरक्षित रहता है। ये नदी की संरचना है। पृथ्वी को जीवित रखने के लिए नदियों का सुरक्षित रहना ज़रूरी है।

नदियों को जीवित रखने के लिए की जाएगी हरसंभव कोशिश

सीएम ने कहा कि हमारी संस्कृति में त्योहारों का भी ऋतुओं के साथ ही महत्व है। सारे व्रत त्योहार पर्व ऋतुओं के अनुसार मनाए जाते हैं। जैसे ग्रीष्म ऋतु में गंगा दशमी मनाई जाती है। गंगाजी अधिकांश नदियों को स्वयं में समाहित करती है। गर्मियों के चरण में गंगा दशमी मनाई जाती है। हम पर्यावरण दिवस से लेकर गंगा दशमी तक लगातार पंद्रह दिन तक हमारे जल स्त्रोतों के संवर्धन के लिए अभियान चलाएँगे। हमने अपने ग्रामीण मंत्रालय के माध्यम से तय किया कि मध्य प्रदेश में 212 नदियां हैं..हमने उनमें से बड़ी बड़ी नदियों की सूची बनाई हैं। इन सभी को संवर्धित किया जाएगा। मध्य प्रदेश नदियों का केंद्र बिंदु है। हमारे यहाँ नर्मदा जी हैं..जो प्रदेश की जीवनरेखा है। हमारे बार ताप्ती, बेतवा जैसी नदियाँ हैं। हमने केन-बेतवा जैसे प्रोजेक्ट शुरु किया है।  हम नदी से नदी को जोड़कर उन्हें जीवित रखने के लिए हर प्रयास कर रहे हैं। भोपाल के लिए तो कहावत भी है…तालों में ताल बाकी सब तलैया। हम जल स्त्रोतों से समृद्ध हैं और हमारा कर्तव्य है कि इन्हें सुरक्षित रखें।

प्रदेशभर में लगाए जाएँगे साढ़े 5 करोड़ पौधे

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हम हरियाली अमावस्या पर पौधारोपण का काम शुरु करेंगे। इस दौरान प्रदेशभर में साढ़े 5.5 करोड़ पौधारोपण किया जाएगा। इंदौर में कैलाश विजयवर्गीय जी ने एक दिन में 51 लाख पौधारोपण का लक्ष्य रखा है। इस तरह हम अपने मध्य प्रदेश को हरा-भरा रखने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। जितने अधिक से अधिक पौधे लगाए जा सकें..उसके लिए प्रयास किया जाएगा। सीएम ने कहा कि आने वाले समय हम इस तरह के कार्यों को और गति देंगे। बता दें कि जल गंगा संवर्धन विशेष अभियान में जल संरचनाओं के उन्नयन कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर कराये जाएंगे। जल संरचनाओं से मिलने वाले गंदे पानी के नाले अथवा नालियों को डायवर्सन के उपरांत शोधित कर जल संरचना में छोड़ा जाएगा। जल संरचनाओं को व्यवसाय व रोजगार मूलक बनाने के उद्देश्य से पर्यटन, मत्स्य पालन, सिंघाड़े का उत्पादन जैसी संभावनाओं का स्पष्टतः निर्धारण किया जाएगा। चिन्हित जल संरचनाओं की मोबाइल ऐप से जियो टैगिंग भी की जाएगी।

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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