MP : किसे मिलेगी भाजपा की कमान, दौड़ में शामिल ये दिग्गज नेता

भोपाल। मध्यप्रदेश में संगठन चुनाव की प्रकिया शुरू होते ही बीजेपी का अगला प्रदेशाध्यक्ष कौन होगा इसको लेकर चर्चाएं शुरु हो गई है। वही इस पद के लिए कई दावेदार भी सक्रिय हो गए है और जोर-आजमाइश करने में जुट गए है।दावेेदारों की भोपाल से दिल्ली तक दौड़ लगी हुई है। हर कोई इस पद के लिए अपने आप को फिट बताने में जुटा हुआ है। सवाल ये भी है कि BJP वर्तमान प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह को रिपीट करेगी या फिर कोई नया कमान संभालेगा। फिलहाल प्रदेशाध्यक्ष की दौड़ में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा, पार्टी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और नरोत्तम मिश्रा प्रबल दावेदार माने जा रहे है। 

अगर बात प्रभात झा की करे तो वे पहले भी प्रदेशाध्यक्ष रह चुके हैं। संगठन में काम करने का बेहतर अनुभव है। प्रदेशाध्यक्ष रहते हुए सर्वाधिक दौरे किए। फिलहाल राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। संघ नेताओं के करीबी होने के कारण दावेदारी मजबूत है पर उम्र बंधन के कारण दौड़ से बाहर हो सकते हैं।वही कैलाश मालवा से प्रबल दावेदार हैं, मंत्री पद छोड़कर संगठन का काम संभाला। राष्ट्रीय महासचिव हैं। फिलहाल पश्चिम बंगाल के प्रभारी हैं। लोकसभा चुनाव में बेहतर परिणाम भी दिए। हाईकमान के भी करीबी हैं।

इसके अलावा भी कई नाम है। जिसमें पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह और खजुराहो से सांसद वीडी शर्मा का नाम भी शामिल है।पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान की ओर से पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह का नाम आगे बढ़ाया जा रहा है।वरिष्ठता के लिहाज से भी वे सांसद होने के साथ ही संगठन के कई पदों पर रह चुके हैं। नेता प्रतिपक्ष ब्राह्मण होने के कारण सिंह के साथ जातिगत संतुलन बैठाने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। वही संघ की पसंद के खजुराहो से सांसद वीडी शर्मा के नाम की भी चर्चाएं जोरों पर है।फिलहाल प्रदेश संगठन में भी महामंत्री हैं। 

राकेश सिंह को मिल सकता है दोबारा मौका

सुत्रों की माने तो राकेश सिंह के दोबारा प्रदेशाध्यक्ष बनने के ज्यादा चांस है। राकेश सिंह चार बार जबलपुर से सांसद चुने गये हैं और लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक हैं। राकेश सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के भी करीबी माने जाते है। राकेश सिंह कई संसदीय समितियों के सदस्य भी रहे हैं।मध्य प्रदेश के राजनीतिक मानचित्र को अच्छी तरह से समझते हैं।वही मोदी कैबिनेट में मंत्री पद नहीं देने से उम्मीद है कि उन्हें संगठन में ही रखा जाए।