इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला, दस साल बाद फिर मैदान में ये दो दिग्गज

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भोपाल। मध्य प्रदेश की मुरैना लोकसभा सीट पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों ने अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। इस सीट पर दोनों ही दल के कद्दावर नेता चुनाव लड़ रहे हैं। बीजेपी से केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को टिकट दिया गया है। वहीं, उनका मुकाबला कांग्रेस के रामनिवास रावत करेंगे। इस सीट पर 2009 में रावत को तोमर धूल चटा चुके हैं। एक बार फिर दस साल बाद दोनों नेता आमने सामने हैं। राजनीति के पंडितों का मानना है कि रावत के पास 2009 का बदला लेने का इस बार मौका है। 

2009 में हुए लोकसभा चुनाव में तोमर ने इस सीट से रावत को करीब एक लाख वोटों से हराया था। इसके बाद 2014 मोदी लहर के प्रभाव में वर्तमान सांसद अनूप मिश्रा ने कांग्रेस के ब्रिंदावन सिंह सिकरवार को 1.30 लाख वोटों से हराया था। खास बात यह है कि गत 2014 के चुनाव में दूसरे स्थान पर रही बसपा ने इस बार रामलखन कुशवाह को प्रत्याशी बनाया है, जिसके चलते चुनावों में स्थिति इस बार भी त्रिकोणीय नजर आ रही है। हालांकि अभी मुरैना-श्योपुर सीट पर 16 अप्रेल को नोटिफिकेशन जारी कर नामांकन दाखिल होना शुरू होंगे, लेकिन तीनों पार्टियों से उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई है। 

1996 से है बीजेपी का गढ़

मुरैना लोकसभा सीट पर बीजेपी का 1996 से कब्जा है। 1996 में इस सीट पर बीजेपी के अशोक अर्गल ने बड़ी जीत हासिल की थी। उन्होंने करीब 40 हजार वोटों से कांग्रेस प्रत्यासी को मात दी थी। यह सीट 2009 तक आरक्षित थी लेकिन 2009 के बाद से इस सीट को सामान्य सीट में बदल दिया गया और तोमर ने इस सीट पर 2009 में ही जीत का परचम लहरा दिया। मुरैना लोकसभा में मुरैना और श्योपुर जिले की आठ विधानसभा सीटें – माधवपुर, विजयपुर, सबलगढ़, जौरा, सुमावली, मुरैना, दिमनी और अंबाह (एससी) शामिल हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्मस्थली और खूंखार डकैत पान सिंह तोमर, मुरैना ने एक बार चंबल क्षेत्र से डकैतों को खत्म करने के लिए गांधीवादी नेता और सामाजिक कार्यकर्ता सुब्बाराव के संरक्षण में जौरा में 100 से अधिक डकैतों का सामूहिक आत्मसमर्पण देखा था।

सड़क निर्माण का किया काम

बीजेपी ने सत्ता में आने के बाद यहां सड़कों का जाल बिछाने, पानी सप्लाई जैसे बुनियादी जरूरतों पर काम किया। लेकिन फिर भी इस क्षेत्र को पिछड़ा माना जाता है। अभी यहां कई कार्य होना बाकी हैं। इस क्षेत्र के सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी, किसान आत्महत्या, परिवहन सुविधा, और ग्रमामीण क्षेत्र से संपर्क सही तरह से नहीं होने बड़ी समस्या है। मुरैना वह जिला है जहां से सेना में भर्ती होने के लिए सबसे अधिक युवा आते हैं लेकिन फिर भी यहां कोई बड़ा शैक्षणिक संस्थान नहीं है। पर्याप्त कृषि भूमि के साथ, मुरैना संसदीय क्षेत्र को पंचायती राज मंत्रालय की 2006 की अधिसूचनाओं के अनुसार पिछड़े क्षेत्रों में से एक घोषित किया गया है। जनादेश तय करने में जातिगत समीकरण की प्रमुख भूमिका होने के साथ, बहुसंख्यक मतदाता आबादी SC, ठाकुर और कुछ ब्राह्मणों में विभाजित है।

बीजेपी के खिलाफ है यहां माहौल

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बार यहां का माहौल बीजेपी के पक्ष में नजर नहीं आ रहा है। वर्तमान सांसद अनूप मिश्रा की लगातार निष्क्रयता के कारण स्थानीय लोगों में गुस्सा है। पार्टी ने उनका टिकट भी इस वजह से काट दिया है। जिससे पह नाराज होकर कांग्रेस के संपर्क में बने हैं। हालांकि, मिश्रा उनके संसदीय क्षेत्र में विकासकार्य करवाने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने सड़कों, फ्लाईओवरों का निर्माण किया है, किसानों को बोनस और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) फार्मूले के माध्यम से उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने में मदद करने की कोशिश की है। लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है