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भोपाल।

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान का आज 60 वां जन्मदिवस है। चौहान प्रदेशभर में मामा के नाम से जाने जाते है। उनका जन्मदिन सिहोर जिले के बुधनी में 5 मार्च, 1959 को हुआ था।सुबह से ही सोशल मीडिया से लेकर घर तक बधाईयों का तांता लगा हुआ है। समर्थकों द्वारा जगह जगह प्रदेशभर में बधाई पोस्टर लगाए है।इसी बीच सत्ता जाने के बाद पहली बार अपने जन्मदिन पर शिवराज एक बड़ा संकल्प लेने जा रहे है।उन्होंने उनके जन्मदिन के अवसर से निर्धन और असहाय पीड़ितो के इलाज के लिए एक गैर राजनैतिक कोष की स्थापना का संकल्प लिया है जिससे पैसों के आभाव में गरीब लोगां का इलाज कराया जा सके।इससे प्रदेश के लाखों लोगों को फायदा मिलेगा।

शिवराज ने बताया कि बतौर मुख्यमंत्री सदैव ऐसे लोगों की सहायता की है, जो निर्धन और असहाय रहे, लेकिन विगत 2 महीने से नई भूमिका में रहते इस पीड़ा को समझ रहे है इसलिए मुख्यमंत्री के तौर पर मिले स्मृति चिन्हो को दानकर जो राशि एकत्र होगी उससे निर्धन और असहाय पीड़ितो की सहायता की जाएगी। उन्होने इस पवित्र कार्य के लिए जनसहयोग की अपेक्षा की है।

जिंदगी का एक साल कम हो गया

शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा- साथियों, मेरा जन्मदिन है, जिन्दगी का एक साल और कम हो गया। बचे हुए जीवन में और बेहतर कर पाऊं, इसके लिए एक नए संकल्प की शुरुआत कर रहा हूं। आपका सहयोग अपेक्षित है। यह छोटा-सा प्रयास आपके सहयोग से महाप्रयास बन जायेगा। आइये, अपने गरीब भाइयों-बहनों के कल्याण के लिए कदम बढ़ाएं।

स्मृति चिन्हों से जुटाएंगे राशि 

शिवराज सिंह ने कहा- मुख्यमंत्री के तौर पर मिले स्मृति चिन्हो को दानकर जो राशि एकत्र होगी उससे निर्धन और असहाय पीड़ितो की सहायता की जाएगी। इस पवित्र कार्य के लिए जनसहयोग की अपेक्षा की है। स्मृति चिन्हों को आज सुबह 8.30 बजे बी-8, 74 बंगले से दान हेतु दिया जाएगा और एकत्रित राशि से कोष की स्थापना की जाएगी।

13 साल तक सीएम रहे शिवराज

शिवराज सिंह चौहान 13 वर्षों तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और इस दौरान उन्हें देश-विदेश से कई तोहफे और स्मृति चिन्ह मिले हैं। शिवराज सिंह चौहान को बतौर मुख्यमंत्री रहते मिले तोहफों और स्मृति चिन्हों को अपने साथियों को देने का फैसला किया है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा- बतौर मुख्यमंत्री उन्होंने कोशिश की थी कि गरीब और असहाय लोगों की सहायता की जा सके और इसलिए समाज के इस तबके के लिए कई योजनाएं बनाईं। अब वो मुख्यमंत्री नहीं हैं, लेकिन गरीबों के लिए कुछ करने की इच्छा अभी भी है। इसलिए मुख्यमंत्री के तौर पर मिले स्मृति चिन्हों को दान करके जो राशि एकत्र होगी उससे निर्धन और असहाय पीड़ितों की सहायता की जाएगी।

कदमों से नापा संसदीय क्षेत्र 

 1991 में तत्कालीन सांसद अटल बिहारी बाजपेई द्वारा विदिशा लोकसभा सीट से त्यागपत्र देने के बाद सबसे पहले शिवराज यहां से लोकसभा का उपचुनाव लड़े और जीते। जब शिवराज सांसद थे, तो उस समय केन्द्र में कांग्रेस की सरकार थी। इस लिए संसदीय क्षेत्र में केन्द्र सरकार के खिलाफ बिगुल बजाए रखने और अपनी पहचान बनाने के लिए वे लगातार दौरे करते रहे। ये दौरे भी कोई गाड़ी-घोड़े से नहीं होते थे। उन्होंने कई बार विभिन्न मुद्दों पर पूरे संसदीय क्षेत्र की पदयात्राएं करके अपने कदमों से नापा है। 

मामा के नाम से है प्रसिद्ध 

 वे पूरे विदिशा संसदीय क्षेत्र में शिवराज सिंह पांव-पांव वाले भैया के नाम से पहचाने जाने लगे। शिवराज सिंह छात्र जीवन से ही राजनीति से जुड़े रहे हैं। 1976-77 में आपातकाल के दौरान वे जेल भी गए। 1992 में शिवराज सिंह चौहान का साधना सिंह से विवाह हुआ था। वे दो बेटों-कार्तिकेय सिंह चौहान और कुणाल सिंह चौहान के पिता हैं। प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान को नाम से कम और मामा के नाम से ज्यादा जाना जाता है।