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विदेश डेस्क।

ब्रेक्जिट के मुद्दे पर फिलहाल घमासान थमता दिखाई नहीं दे रहा है।ऐसे में  ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरेसा मुश्किलों से घिरती नजर आ रही है। दरअसल, ब्रेक्जिट समझौते पर 25 नवंबर को होने वाले संभावित सम्मेलन से पहले ब्रिटिश पीएम थेरेसा मे को बृहस्पतिवार को तगड़ा झटका लगा। उनकी कैबिनेट के ब्रेक्जिट सचिव डोमिनिक राब और भारतीय मूल के मंत्री शैलेश वारा और दो अन्य मंत्रियों ने यूरोपीय संघ (ईयू) से अलग होने के लिए प्रस्तावित मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया।

राब ने कहा ‘घोषणापत्र में हमने देश से जो वादे किए थे, उसके बाद में प्रस्तावित सौदे की शर्तों पर समझौता नहीं कर सकते हैं। आप ऐसे ब्रेक्जिट मंत्री के हकदार हैं जो आपके समझौते को दृढता के साथ आगे बढ़ा सके। मुझे पक्का इस्तीफा देना चाहिए।’ टेरेसा की कैबिनेट से गुरुवार को यह दूसरा इस्तीफा है। इससे पहले उत्तरी आयरलैंड के मंत्री शैलेश वारा ने भी समझौते को लेकर पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफों के बीच ब्रेक्जिट समर्थक जैकब रीस मोग ने हाउस ऑफ कामंस में 62 वर्षीय मे को सीधे चुनौती दी। उन्होंने कंजरवेटिव पार्टी में उनके नेतृत्व के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव का पत्र सौंपा। मे के विरोधियों को अविश्वास वोट के लिए पार्टी के सांसदों से 48 पत्रों की जरुरत है।

उत्तरी आयरलैंड के मंत्री शैलेश वारा ने भी समझौते पर असहमति जताते हुए पद से इस्तीफा दे दिया। वारा ने प्रस्तावित ब्रेक्जिट समझौते के कारण पद से इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे में वारा ने लिखा है, ‘यह समझौता ब्रिटेन को आधे में छोड़ रहा है। इसमें कोई समय सीमा तक नहीं है कि हम फिर कब से संप्रभु राष्ट्र बनेंगे। दोनों मंत्रियों ने अपना इस्तीफा ट्विटर पर सार्वजनिक किया है।

इससे पहले थेरेसा ने बुधवार को कहा था कि यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ ब्रेक्जिट समझौते पर बने गतिरोध के संबंध में अपने कैबिनेट सहयोगियों से घंटों की बातचीत के बाद अब उन्हें सभी का साथ मिल गया है। थेरेसा पहले ही कह चुकी हैं कि वह कोई भी फैसला देशहित में ही लेंगी। ऐसा कोई भी कदम जिससे देश को नुकसान हो वह नहीं उठाने वाली हैं और न ही देश के बंटवारे का घातक कदम वह उठाएंगी।