ये है भारत का कुंवारा किला, यहां आज भी छुपा है मुगलों का बेशकीमती खजाना

राजस्थान भारत के प्रसिद्ध और खूबसूरत राज्यों में से एक है। यहां घूमने फिरने के लिए बहुत सारे स्थान मौजूद हैं। आज हम आपके यहां के कुंवारा किला के बारे में बताते हैं।

भारत एक ऐसा देश है जिसका इतिहास और संस्कृति हमेशा सही लोगों के बीच चर्चा का विषय रहे हैं। भारत की संपन्न ऐतिहासिक विरासतों का दीदार करने और यहां के इतिहास को जानने के लिए देश के अलग-अलग कोने से नहीं बल्कि विदेशों से भी पर्यटक पहुंचते हैं। घूमने फिरने के लिए यहां बहुत कुछ मौजूद है जो लोगों को आकर्षित करने का काम करता है।

प्राकृतिक खूबसूरती से भरपूर स्थान की बात करें या फिर ऐतिहासिक महलों और स्मारकों की हिंदुस्तान में वह सब कुछ मौजूद है जो लोगों को आकर्षित करने का काम करता है। जब आप यहां के उत्तराखंड, हिमाचल और केरल जैसे क्षेत्र में जाएंगे तो आपको अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता का दीदार करने को मिलेगा। वहीं मध्य प्रदेश से लेकर राजस्थान और गुजरात में कई सारे ऐतिहासिक स्थल हैं जहां जाने के बाद आपको इतिहास से रूबरू होने का मौका मिलेगा। आज हम आपको ऐसे ही एक इतिहास से जुड़े किले के बारे में बताते हैं, जो कुंवारा किला के नाम से मशहूर है।

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कहां है कुंवारा किला (Kunwara Kila)

हम जिस किले की बात कर रहे हैं वह राजस्थान के अलवर शहर में मौजूद है। अलवर राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध जिलों में से एक है जिसे अपनी ऐतिहासिक इमारत और खूबसूरती के लिए पहचाना जाता है। यहां अरावली की पहाड़ियों में बाला किला मौजूद है जो कुंवारा किला के नाम से प्रचलित है। इस किले में आज भी खजाना छिपे होने की बात कही जाती है।

क्यों कहा जाता है कुंवारा किला

वैसे तो यह अलवर का बाला किला है लेकिन लोग इसे कुंवारा किला के नाम से ही पहचानते हैं। यह नाम मिलने के पीछे भी एक खास वजह है। दरअसल, अरावली की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच मौजूद इस किले से कभी भी कोई युद्ध नहीं लड़ा गया। यही कारण है कि इसे कुंवारा किला कहा जाता है। इसकी वास्तुकला और सुंदरता इतनी मनमोहक है कि आपका दिल बाग बाग हो जाएगा।

यहां जहांगीर ने गुजारा समय

इसके संबंध में जो जानकारी मिलती है उसके मुताबिक 15वीं शताब्दी में हसन खान मेवाती ने इसका निर्माण शुरू किया था। इसके बाद कई शासक आते रहे और यह किला उनके अधीन रहा। यह अरावली की पहाड़ियों पर लगभग 960 फीट की ऊंचाई पर मौजूद है। यहां से पूरे शहर के अद्भुत दृश्य देखने को मिलते हैं। 5 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ यह किला बहुत ही अद्भुत है। यहां पर कई सारे मंदिर, महल और अनोखी संरचनाओं मौजूद है।

यहां है 6 प्रवेश द्वार

इसमें एक या दो नहीं बल्कि 6 प्रवेश द्वार है। इन्हें जय पोल, सूरज पोल, चांद पोल, लक्ष्मण पोल, अंधेरी पोल और कृष्ण पोल के नाम से पहचाना जाता है। इतना ही नहीं इस किले में दीवारों पर 446 छेद हैं जो बंदूक रखने के लिए इस्तेमाल किए जाते थे। यहां से कभी कोई युद्ध तो नहीं लड़ा गया लेकिन दुश्मनों पर गोलियां बरसाने के लिए ये छेद बनाए गए थे।

यहां छुपा है मुगलों का खजाना

यहां कई मंदिर और महल मौजूद है, जिनमें राजा महाराजा रहा करते थे। बताया जाता है कि जहांगीर में अपने निर्वासन के समय यहां पर कुछ समय गुजरा था। वह यहां के सलीम महल में रुके थे। इसके जगह बारे में कई रोचक कहानियां प्रसिद्ध है। कोई कहता है कि जहांगीर ने यहां पर अपना खजाना छुपाया था जो सोना चांदी और बेशकीमती रत्नों से भरा हुआ है। लोग इसे कुबेर के खजाने के नाम से भी पहचानते हैं। बताया जाता है कि जहांगीर ने आसपास के जंगल या फिर सुरंग में अपना खजाना छुपा दिया था। हालांकि, इसका कोई तो सबूत इतिहास में मौजूद नहीं है। जब आप यहां जाएंगे तो आपको म्यूजियम में बेशकीमती हथियारों की प्रदर्शनी देखने को मिलेगी।


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Diksha Bhanupriy

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"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है।

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