तेजी से बढ़ रहा वायु प्रदूषण का स्तर, खराब हवा का रेस्पिरेटरी सिस्टम पर पड़ रहा गहरा असर, ऐसे करें पहचान

Shashank Baranwal
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Air Pollution

Air Pollution: इन दिनों देश के कई हिस्सों में वायु प्रदूषण का कहर जारी है। जो कि हर उम्र के लोगों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। वायु प्रदूषण के कारण सीने में दर्द और आंखों में जलन जैसी तमाम समस्याएं हो रही हैं। वायु प्रदूषण हमारे शरीर के रेस्पिरेटरी सिस्टम पर ज्यादा बुरा असर डालता है। अगर समय रहते इसका इलाज नहीं किया तो आपके शरीर के लिए खतरनाक हो सकता है। वहीं निम्न लक्षण रेस्पिरेटरी सिस्टम से संबंधित बीमारियां होने की स्थिति को बताते हैं।

ये हैं लक्षण

  • अगर चलते समय या सीढ़ी चढ़ते समय आपकी सांस फूल रही है।
  • नाक बहना, खांसी, गले में जलन रेस्पिरेटरी संबंधी बीमरियां होने की पहचान होती हैं।
  • वायु प्रदूषण के बढ़ने के बाद अगर आपको सूखी खांसी की समस्या होने पर रेस्पिरेटरी सिस्टम संबंधी समस्या की पहचान होती है।
  • प्रदूषण बढ़ने के कारण यदि स्वस्थ इंसान के फेफड़े में जलन या सूजन की समस्या रेस्पिरेटरी सिस्टम संबंधी बीमारियां होने की पहचान होती है।
  • वायु प्रदूषण के कारण खर्राटे बढ़ जाना रेस्पिरेटरी संबंधी समस्या की पहचान होती है।
  • हवा में मौजूद धूल के कण से होने वाली एलर्जी रेस्पिरेटरी संबंधी समस्या की पहचान होती है।

आपको बता दें कोविड 19 महामारी ने फेफड़े पर बुरा असर डाला है। वहीं वायु प्रदूषण होने पर लोगों की रेस्पिरेटरी सिस्टम संबंधी समस्या और बढ़ जाती है। अगर आपको भी इन लक्षणों से सामना करना पड़ रहा है तो बिना देरी किए किसी अच्छे पल्मोनोलॉजी से संपर्क करें।

(Disclaimer: यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। MP Breaking News इसकी पुष्टि नहीं करता है)


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पत्रकारिता उन चुनिंदा पेशों में से है जो समाज को सार्थक रूप देने में सक्षम है। पत्रकार जितना ज्यादा अपने काम के प्रति ईमानदार होगा पत्रकारिता उतनी ही ज्यादा प्रखर और प्रभावकारी होगी। पत्रकारिता एक ऐसा क्षेत्र है जिसके जरिये हम मज़लूमों, शोषितों या वो लोग जो हाशिये पर है उनकी आवाज आसानी से उठा सकते हैं। पत्रकार समाज मे उतनी ही अहम भूमिका निभाता है जितना एक साहित्यकार, समाज विचारक। ये तीनों ही पुराने पूर्वाग्रह को तोड़ते हैं और अवचेतन समाज में चेतना जागृत करने का काम करते हैं। मशहूर शायर अकबर इलाहाबादी ने अपने इस शेर में बहुत सही तरीके से पत्रकारिता की भूमिका की बात कही है– खींचो न कमानों को न तलवार निकालो जब तोप मुक़ाबिल हो तो अख़बार निकालो मैं भी एक कलम का सिपाही हूँ और पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूँ। मुझे साहित्य में भी रुचि है । मैं एक समतामूलक समाज बनाने के लिये तत्पर हूँ।

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