साहित्यिकी : इन कविताओं से कीजिए नए साल का स्वागत

New Year 2023 : हम नए साल में प्रवेश कर रहे हैं और इस बार 1 जनवरी के दिन रविवार पड़ रहा है। तो अपने पढ़ने की आदत को दुरुस्त करने के लिए इससे अच्छा अवसर क्या हो सकता है। नए साल का स्वागत करते हुए हम आज पढ़ेंगे प्रसिद्ध कवि हरिवंशराय बच्चन और केदारनाथ अग्रवाल की एक एक कविता जो नूतन वर्ष पर ही आधारित है। तो आइये पढ़ते हैं ये कविताएं-

आओ, नूतन वर्ष मना लें / हरिवंशराय बच्चन

आओ, नूतन वर्ष मना लें!

गृह-विहीन बन वन-प्रयास का
तप्त आँसुओं, तप्त श्वास का,
एक और युग बीत रहा है, आओ इस पर हर्ष मना लें!
आओ, नूतन वर्ष मना लें!

उठो, मिटा दें आशाओं को,
दबी छिपी अभिलाषाओं को,
आओ, निर्ममता से उर में यह अंतिम संघर्ष मना लें!
आओ, नूतन वर्ष मना लें!

हुई बहुत दिन खेल मिचौनी,
बात यही थी निश्चित होनी,
आओ, सदा दुखी रहने का जीवन में आदर्श बना लें!
आओ, नूतन वर्ष मना लें!

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गए साल की / केदारनाथ अग्रवाल

गए साल की
ठिठकी ठिठकी ठिठुरन
नए साल के
नए सूर्य ने तोड़ी।

देश-काल पर,
धूप-चढ़ गई,
हवा गरम हो फैली,
पौरुष के पेड़ों के पत्ते
चेतन चमके।

दर्पण-देही
दसों दिशाएँ
रंग-रूप की
दुनिया बिम्बित करतीं,
मानव-मन में
ज्योति-तरंगे उठतीं।