अपने साहस से झांसी की रानी ने छुड़ा दिए थे अंग्रेजों के छक्के, जानें कैसे मनु से बनी वीरांगना लक्ष्मीबाई

Diksha Bhanupriy
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lakshmibai

Rani Lakshmibai Jayanti: बुंदेले हरबोलो के मुंह हमने सुनी कहानी थी खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी.. यह हर व्यक्ति के अंदर देशभक्ति का जज्बा भरने वाली वो पंक्तियां है, जिन्हें हम सभी बचपन से सुनते आए हैं। यह पंक्ति उस वीरांगना से जुड़ी हुई है जिसने भारत की भूमि से अंग्रेजों को खदेड़ने के लिए युद्ध लड़ा और उन्हें खूब छकाया। जब तक वह जिंदा रही उन्होंने अंग्रेजों को अपने गढ़ पर आंख उठाकर नहीं देखने दिया।

19 नवंबर 1834 यह वही दिन था जब बनारस के एक मराठी परिवार में रानी लक्ष्मी बाई का जन्म हुआ। उनके माता-पिता ने उनका नाम मणिकर्णिका रखा था और प्यार से उन्हें मनु बुलाया जाता था। यही प्यारी सी मनु आगे चलकर रानी लक्ष्मी बाई के नाम से प्रसिद्ध हुई।

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"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है।