सालों से धूल खा रही शहीद की मूर्ति, घरवाले मजदूरी को मजबूर, शासन-प्रशासन बेपरवाह

बड़वानी, हेमंत नागझिरिया। देश अपना गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है और इस समय हर तरफ देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों को सब नमन कर रहे हैं। लेकिन आज हम आपको बताते हैं बड़वानी के एक ऐसे शहीद की दास्तां, जिनकी मूर्ति सालों से धूल खा रही है। न तो जनप्रतिनिधियों को, न ही प्रशासन को उनकी सुध लेने की फुर्सत है। वहीं शहीद के परिजन अपना पेट पालने के लिए मजदूरी करने को मजबूर हैं।

पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन के विधानसभा क्षेत्र में सीआरपीएफ जवान संतोष चौहान साल 2010 में बम ब्लास्ट में शहीद हो गए थे। उस समय सरकार और जनप्रतिनिधियों ने कई वादे किये थे, लेकिन आज हाल ये है कि शहीद  के परिवार को मजदूरी करने पीथमपुर जाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, सरकार ने शहीद की मूर्ति स्थापित करने की बात कही थी। वो मूर्ति कबकी बनकर आ भी गई और कई सालों तक गर्ल्स हॉस्टल में धूल खाती रही। लेकिन किसी को फुर्सत नहीं मिली कि शहीत की मूर्ति स्थापित करा दे। आखिरकार घरवालों ही अब वो मूर्ति ले आए हैं और गांववालों ने मिलकर तय किया है कि वे ही मूर्ति स्थापित कर देंगे।

शहीद के परिवारवालों का कहना है कि न तो उनके परिवार को राशन प्राप्त हो रहा है, ना ही उनके पास गैस सिलेंडर है। परिवार का गुजारा मजदूरी करके हो रहा है।वहीं आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र बड़वानी में दो सांसद राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी और गजेन्द्र पटेल व केबिनेट मंत्री प्रेम सिंह पटेल के होते हुए भी शहीद की मूर्ति धूल खा रही है। ऐसे में सवाल लाजमी है कि क्या इस साल किसी को शहीद संतोष चौहान की याद आएगी या वो हमेशा के लिए भुला दिए जाएंगे।