MP की इन सीटों पर तय हुआ मुकाबला, जानिए प्रत्याशी की ताकत और कमजोरी

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भोपाल| मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव को लेकर सियासत तेज हो गई है| कांग्रेस ने अभी तक 9 सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है, वहीं  भाजपा 18 सीटों पर नाम तय कर चुकी है। 11 सीटों पर प्रत्याशियों के नामों को लेकर मंथन का दौर जारी है। शेष सीटों पर जल्द ही दोनों पार्टियां नामों का ऐलान करेगी| लेकिन अब तक घोषित हुए प्रत्याशियों में 6 सीटों पर मुकाबला तय हो गया है| जहां एक दूसरे के खिलाफ प्रत्याशियों ने जीत के लिए मैदान में ताल ठोक दी है| देश भर की नजरें इस समय मध्य प्रदेश की हाई प्रोफाइल सीटों पर है, जिसके चलते यह चुनाव रोचक हो गया है| आइए जानते उन छह सीटों के बारे में जहां प्रत्याशी आमने सामने हैं| 

MP की इन सीटों पर तय हुआ मुकाबला, जानिए प्रत्याशी की ताकत और कमजोरी

शहडोल 

शहडोल लोकसभा सीट इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में है| यहां  बीजेपी के मौजूदा सांसद ज्ञान सिंह ने टिकट न मिलने से बगावत की राह पकड़ ली है| बीजेपी ने ज्ञान सिंह का टिकट काटकर हिमाद्री सिंह को दिया है जो कि हाल ही में कांग्रेस से बीजेपी में आई हैं|  विंध्य क्षेत्र रीवा और सीधी के बाद शहडोल भी महत्वपूर्ण लोकसभा सीटों में से एक है। अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार के लिए आरक्षित इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है। ज्ञान सिंह यहां के सांसद हैं। 2016 के उपचुनाव में उन्होंने हिमाद्रि सिंह को हराया था| अब चुनाव से ठीक पहले हिमाद्रि भाजपा में आ गई और उन्हें टिकट मिल गया | वहीं कांग्रेस ने भी भाजपा से कांग्रेस में आईं प्रमिला सिंह को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है| कुल मिलाकर दो महिला उम्मीदवारों के बीच कडा मुकाबला देखने को मिलेगा, दोनों ही नेत्री इस चुनाव में अपनी ही पुरानी पार्टियों के खिलाफ मैदान में है| इसलिए यहां का चुनाव रोचक बन गया है| 

टीकमगढ़ 

इस सीट पर दोनों ही पार्टियां भाजपा और कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं| भाजपा ने जहां तीसरी बार डॉ. वीरेंद्र खटीक पर विश्वास जताते हुए प्रत्याशी घोषित कर दिया। वहीं कांग्रेस ने इस बार महिला पर भरोसा जताकर किरण अहिरवार को प्रत्याशी घोषित कर दिया। अब दोनों के बीच सीधी टक्कर होगी। विरोध के बाद भी खटीक को तीसरी बार पार्टी ने मैदान में उतारा है| इससे पहले वे एक बार सांसद, दूसरी बार केंद्रीय राज्यमंत्री रह चुके। पहली बार 2009 में टीकमगढ़ लोकसभा सीट हाेते ही पार्टी ने उन्हें टीकमगढ़ का लोकसभा प्रत्याशी के रूप में उतारा था। जिस पर वे दो पंचवर्षीय चुनाव में खरे उतरे। लेकिन इस बार उनके लिए अपनों से ज्यादा खतरा है| वहीं किरण अहिरवार पृथ्वीपुर ग्राम मड़िया की रहने वाली है। पूर्व में ससुर स्व. हरदास अहिरवार जनपद अध्यक्ष रह चुके है। वर्तमान में पूरा परिवार परिष्ठ अधिकारियों के पद है। वर्तमान में किरण अहिरवार मप्र महिला कांग्रेस प्रदेश सचिव के पद पर है। जिन पर कांग्रेस पार्टी ने भरोसा जताकर टीकमगढ़ लोकसभा सीट से प्रत्याशी घोषित किया है। 

होशंगाबाद सीट

इस सीट पर तीन जिले होशंगाबाद, नरसिंहपुर और रायसेन के आठ विस सीटें आती हैं। होशंगाबाद, पिपरिया, सोहागपुर, सिवनीमालवा, उदयपुरा (रायसेन), नरसिंहपुर, तेंदूखेड़ा, गाडरवारा विधानसभा शामिल हैं। संसदीय क्षेत्र में करीब 17 लाख वोटर हैं। भाजपा और कांग्रेस ने हाेशंगाबाद-नरसिंहपुर सीट के लिए प्रत्याशी घाेषित कर दिए हैं। भाजपा ने अपना प्रत्याशी सांसद उदय प्रताप सिंह काे ही फिर से बनाया है। वे पिछले 10 साल से सांसद हैं। वहीं कांग्रेस ने इस सीट पर अपना प्रत्याशी शैलेंद्र दीवान काे बनाया है। शैलेंद्र दीवान बाेहानी नरसिंहपुर के हैं। इस समय वे कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव हैं। इस सीट से कई दिग्गज नेता टिकट चाह रहे थे| विधानसभा चुनाव में नरसिंहपुर जिले में कांग्रेस की तीन सीट दिलाने में इनकी अहम् भूमिका रही। इसके अलावा पिता के कारण राजनीतिक पकड़ और पहचान मजबूत है। दोनों नेताओं के बीच अच्छा मुकाबला देखने को मिलेगा| 

बालाघाट 

बालाघाट सीट से बीजेपी ने बोध सिंह भगत का टिकट काट कर ढाल सिंह बिसेन को टिकट दे दिया है| ढाल सिंह बीजेपी के पुराने कद्दावर नेता हैं और उमा भारती सरकार में मंत्री रह चुके हैं| बिसेन का मुकाबला कांग्रेस के मधु भगत से होगा| बालाघाट से उन्हें टिकट मिलने की बड़ी वजह ये है कि इस क्षेत्र में पवार वोट ज़्यादा हैं और ढाल सिंह पवार जाति से ही हैं| वो शिवराज सरकार में मंत्री रहे गौरीशंक बिसेन के करीबी माने जाते हैं| हालांकि इस सीट से खुद बिसेन की बेटी मौसम बिसेन भी दावेदारों की कतार में थीं| लेकिन पार्टी ने वंशवाद के खिलाफ स्टैंड लेते हुए उन्हें टिकट नहीं दिया| कांग्रेस ने परसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक मधु भगत को प्रत्याशी बनाया है। दोनों के बीच कडा मुकाबला होगा| बोध सिंह और गौरिशंका बिसेन खेमे के बीच की खींचतान में ढाल सिंह को टिकट मिला है, लेकिन इस खींचतान का फायदा कांग्रेस उठा सकती है| 

मंदसौर

मंदसौर-नीमच लोकसभा क्षेत्र तीन ज़िलों के क्षेत्र मिलाकर बना है| इसमें मंदसौर, नीमच के साथ रतलाम की जावरा सीट शामिल है| मालवा का इलाका संघ की नर्सरी माना जाता है क्योकि जनसंघ के जमाने में पहले दो सांसदों में से एक उमाशंकर त्रिवेदी यही से सांसद थे| भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष कुशाभाव ठाकरे, पूर्व सीएम सुंदरलाल पटवा, वीरेंद्र कुमार सखलेचा और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ.लक्ष्मीनारायण पांडेय भी यही से आते थे| इन दिवंगत नेताओं के कारण धीरे- धीरे यह आरएसएस का गढ़ बन गया| इसलिए भाजपा के लिए यहां जीत आसान होती है| इस सीट पर 2009 में कांग्रेस से मीनाक्षी नटराजन ने इस सीट पर 1977 से लगातार 11 बार मैदान में रहकर 8 बार जीत हासिल करने वाले भाजपा के दिग्गज डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे को पटखनी दी। 2014 के चुनाव में भी कांग्रेस ने मीनाक्षी पर भरोसा जताकर मैदान में उतारा, लेकिन वे भाजपा के सुधीर गुप्ता से पराजित हो गईं। इस बार फिर मीनाक्षी और सुधीर गुप्ता आमने-सामने हैं।

बैतूल 

बैतूल लोकसभा सीट पर कांग्रेस को लंबे समय से जीत का इंजतार है। यह क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य है। यहां संघ की गहरी पैठ है। बीजेपी ने इस बार फर्जी जाति प्रमाणपत्र मामले के चलते विवादों में घिरी सांसद ज्योति धुर्वे का टिकट काट कर एक शिक्षक पर भरोसा जताया है, वहीं कांग्रेस ने अपेक्षाकृत युवा चेहरे को मैदान में उतार कर मुकाबले को और रोचक बना दिया है। अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित इस सीट पर पिछले आठ चुनावों में से भाजपा ने सात बार जीत हासिल की है। वर्तमान में यहां से श्रीमती धुर्वे सांसद हैं। भाजपा ने यहां से आरएसएस के दुर्गादास उइके को टिकट दिया है। जबकि कांग्रेस ने उनके सामने वकालत की पढ़ाई पूरी कर चुके 32 वर्षिय उम्र के वकील रामू टेकाम को टिकट दिया है। वह युवा आदिवासी नेता हैं और बैतूल में अपनी सक्रियता को लेकर काफी चर्चित हैं।