15 सालों में कर्जा ले-लेकर भाजपा सरकार पीती रही घी : कांग्रेस

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भोपाल

कांग्रेस के सत्ता में आते ही सबसे बड़ी चुनौती मध्यप्रदेश का कर्जा है। लगातार कर्ज लेने के कारण प्रदेश की वित्तिय स्थिति ठीक नही है।वर्तमान में प्रदेश पर पौने दो लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज है। इस बढ़े हुए कर्ज को लेकर अब भाजपा-कांग्रेस में बयानबाजी शुरु हो गई है। दोनों एक दूसरे पर जमकर हमले बोल रहे रहे है। कांग्रेस ने पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया के बयान को बेहद गैर जिम्मेदाराना बताया है। कांग्रेस का कहना है कि यदि भाजपा सरकार को खाली खजाना मिला था तो वह 15 साल तक क्या करती रही थी? कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि इन 15 सालों में कर्जा ले-लेकर भाजपा सरकार घी पीती रही।

दरअसल, पूर्व वित्तमंत्री जयंत मलैया ने शनिवार को कांग्रेस द्वारा मध्यप्रदेश की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठाने औऱ श्ववेत पत्र लाने पर कहा था कि 15 साल पहले कांग्रेस ने जिस हालत में खजाना दिया था,आज हमने भी उन्हें वैसी ही स्थिति में लौटाया है। उन्होंने कहा कि मप्र पर राष्ट्रीयकृत बैंकों का 34 से 36 हजार करोड़ रुपए का कर्ज बाकी है। सब कुछ मिलाकर देखा जाए तो मप्र एक लाख 65 हजार करोड़ रुपए के कर्ज में है और करीब दो हजार करोड़ रुपए का आेवर ड्रॉफ्ट है। यदि कर्जमाफी होती है तो विकास के सारे काम बंद हो जाएंगे। इस पर प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता ने पलटवार करते हुए कहा है कि जयंत मलैया का यह बेहद गैर जिम्मेदाराना बयान है। खजाना भरने के लिये इतने दिनों में भाजपा सरकार ने उपाय क्यों नहीं किये? यदि भाजपा सरकार का वित्तीय प्रबंधन ठीक होता तो उनके शासन काल में कर्जा सात गुना क्यों बढ़ गया? कर्जा ले-लेकर भाजपा सरकार घी पीती रही। नर्मदा यात्रा, वृक्षारोपण, जनआशीर्वाद यात्रा आदि में सैकड़ों करोड़ की फिजूलखर्ची की। पूरे कार्यकाल में छोटे-छोटे आयोजन बड़े-बड़े डोम बनाकर किये गये।

गुप्ता ने कहा कि सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर टैक्स से और शराब की दुकानें खोलकर अरबों रूपये जनता से लिये। ये पैसे कहां गये? क्यों सरकार को जाते-जाते भी 8 सौ करोड़ रूपये कर्ज लेना पड़ा? जाहिर है कि वित्तीय प्रबंधन खराब था और अब नई सरकार को खाली खजाना मिला है। गुप्ता ने कहा कि वर्ष 2003 में प्रदेश पर 23 हजार करोड़ का कर्ज था जो भाजपा सरकार के जाते-जाते एक लाख 91 हजार करोड़ रूपये हो गया। वर्तमान में मध्यप्रदेश की जीडीपी साढ़े सात लाख करोड़ तक पहुंच गई है। मलैया भ्रम फैलाकर जनता का ध्यान भटकाना बंद कर अपनी हार के कारणों पर गंभीरता से विचार करें तो बेहतर होगा।

कांग्रेस के भाजपा से चार सवाल

-खजाना भरने के लिये इतने दिनों में भाजपा सरकार ने उपाय क्यों नहीं किये?

-यदि भाजपा सरकार का वित्तीय प्रबंधन ठीक होता तो उनके शासन काल में कर्जा सात गुना क्यों बढ़ गया? 

-सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर टैक्स से और शराब की दुकानें खोलकर अरबों रूपये जनता से लिये। ये पैसे कहां गये?

-क्यों सरकार को जाते-जाते भी 8 सौ करोड़ रूपये कर्ज लेना पड़ा?

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