‘पातालकोट’ की सौदेबाजी पर सवाल, मिश्रा बोले, ‘छुपे हुए चेहरे भी ठप हों जो ईमानदार बनकर लूट रहे’

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भोपाल| मुख्यमंत्री कमलनाथ के गृह जिले में सामने आये पिछली सरकार में किये गए गड़बड़झाले के बाद सरकार में हड़कंप मच गया है| पातालकोट में पर्यटन विभाग ने नियमों की धज्जियां उड़ा कर भ्रष्टाचार का जो खेल किया उस पर अब तक सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की है। आदिवासी बहुल पातालकोट के ऊपरी हिस्से बीजाढाना को दिल्ली की निजी कंपनी यूरेका कैंप आउटस प्राइवेट लिमिटेड को जिस तरह सौंपा गया वह यह बताता है कि मध्य प्रदेश में नियम कायदे नाम की कोई चीज नहीं। पातालकोट का ऊपरी गांव बीजाढाना दिल्ली की एक कंपनी को 20  साल के लिए 11  लाख में लीज पर दे दिया गया है। यह वही पॉइंट है जहां से पातालकोट की गहराई को देखा जा सकता है| नियमों की अनदेखी कर अधिकारीयों ने कंपनी को जमीन का कब्जा दिलवा दिया|  प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने भी अधिकारियों की इस मिली भगत पर सवाल उठाये हैं| 

केके मिश्रा ने जारी बयान में कहा अत्यंत क्षमाभाव के साथ में भी इस अभिव्यक्ति के लिए मज़बूर हूं कि क्या एक वरिष्ठ  अधिकारी, वह भी तत्कालीन मुख्यमंत्री जी की नज़दीकी कोटरी में भी अव्वल दर्जे पर काबिज़ हो,वह अपने मुख्यमंत्री को न बताए और इतनी बड़ी सौदेबाज़ी को अंजाम दे सकता है| तत्कालीन पर्यटन मंत्री व पर्यटन विभाग के अध्यक्ष कल ही उन्हें इसकी जानकारी होने की अनभिज्ञता दर्शा चुके हैं|  एक नागरिक के नाते मेरा प्रदेश के यशस्वी और अपनी दृढ़इच्छाशक्ति के साथ प्रदेश की जर्जर हो चुकी आर्थिक स्थिति में भी पार्टी के वचन -पत्र को दिखाई देने वाले क्रियान्वयन को ज़मीनी अंजाम दे रहे(लफ़्फ़ाजी नहीं) मुख्यमंत्री माननीय कमलनाथ जी से विन्रम निवेदन है कि अब वे इसके पीछे प्रदेश के उन छुपे हुए चेहरों को भी “ठप” करें जो (ई) मानदारी का चेहरा लगाकर 15 सालों  से प्रदेश को लूटते रहे|

मिश्रा ने कहा मुख्यमंत्री जी अब यह भी सार्वजनिक होना अत्यंत आवश्यक है कि इस सौदेबाजी को करने वाली “यूरेका कैम्पआउटस प्राइवेट लिमिटेड” कहीं कोई फर्जी कंपनी तो नहीं है?इसके संचालक कौन हैं, किस प्रदेश के हैं| यह सार्वजानिक होना चाहिए| उन्होंने कहा कांग्रेस पार्टी ने अपने विपक्ष का दायित्व निभाते हुए राजधानी भोपाल के “मिंटो हॉल”के सम्मान को बचा लिया था अन्यथा प्रदेश की अस्मिता का यह सम्मान भी राजनैतिक डकैती की भेंट में स्वाहा हो जाता| इस प्रकरण में भी इन्हीं अधिकारी की संलिप्तता होने के स्पष्ट प्रमाण थे|