गजल-ओ-कलाम से आगे की दुनिया जानना चाहता है हर कोई!

भोपाल। खान अशु।

मंचों की दुनिया, शेर-ओ-कलाम की अदायगी, उनका अंदाज, उनकी बात और उनका हर नजरिये पर नज़र रखने का हुनर हर वह शख्स जानता है, समझता है, मानता है, जो उनकी शायरी का मुरीद है। शौहरत की बुलंदियों पर पहुंचे इस शख्स के अंदर और उसके आसपास ऐसी भी कई बातें बिखरी पड़ी हैं, जिन्हें लोग करीब से जानना चाहते हैं। इसी कसक को पूरा करने एक सिलसिला शुरू हो गया, जो राहत को करीब से जानने की राहतें बिखेरने लगा है। 

सारी दुनिया में अपने शेर-ओ-कलाम और खास अंदाज-ए-अदायगी के लिए जाने, पहचाने और चाहे जाने वाले मशहूर और मकबूल शायर डॉ. राहत इंदौरी संभवत: पहले शायर कहे जाएंगे, जिनकी निजी जिंदगी को करीब से जानने की ललक लोगों में पैदा हुई है। इस चाहत और ख्वाहिश को पूरा करने के लिए उनके चाहने वालों ने चंद लफ्जों में राहत की शख्सियत को उकेरने और गागर में सागर भरने की कोशिश की है। पिछले महीने मंजर-ए-आम पर आई उनकी ऑटो बायोग्राफी के बाद एक और किताब रस्म-ए-इजरा की तरफ बढ़ रही है, जो राहत को करीब से जानने का मौका देगी। इसके चंद कदम पर ही राहत की इनसाइड बातों को लेकर एक पुस्तक अपनी मंजिल की तरफ चल पड़ी है।

ऑटो बॉयोग्राफी से नई शुरूआत

दीपक रूहानी द्वारा तैयार की गई ऑटो बॉयोग्राफी राहत साहब का रस्म-ए-इजरा इसी माह साहित्य आज तक के मंच से हुआ है। दर्जनभर शेर-ओ-गजल की राहतभरी किताबों के बीच इस ऑटो बॉयोग्राफी ने राहत के चाहने वालों की कई जिज्ञासाओं को मिटाने और उनको करीब से जानने की ललक को पूरा किया है। बेस्ट सेलर में शामिल हुई राहत साहब को करीब से देखने, पढऩे और उससे फैजयाब होने की लालसा अब भी लोगों में बनी हुई है।

हिदायत ला रहे कलंदर

करीब ढ़ाई साल की मेहनत के बाद इंदौर के सीनियर जर्नलिस्ट हिदायत उल्लाह खान राहत के लिए कलंदर की कहानी को किताब की शक्ल देने में कामयाब हुए हैं। उनकी कलंदर राहत के उन लम्हों को समेटे हुए है, जिसमें राहत की शख्सियत करीब से समझी जा सकेगी। हिदायत बताते हैं कि राहत साहब से जुड़े करीब 50 किस्सों को 225 पन्नों में समेटने की कोशिश की गई है। वे कहते हैं कि अखबारी मर्यादाओं का ख्याल रखते हुए कम में कहकर ज्यादा समझाने की एक छोटी सी कोशिश की जा रही है, जो राहत के चाहतमंदों के लिए बहुत राहतें बनकर सामने आएगी। इस किताब में राहत के पहले मुशायरे और नशिस्त से लेकर अंतर्राष्ट्रीय मंच तक कलाम पढऩे और उस्ताद शायरों से लेकर जाजम पर बैठने वाले साथियों और श्रोताओं तक का जिक्र किया गया है। किताब का विमोचन एक बड़े आयोजन जश्र-ए-राहत की शक्ल में 4 दिसंबर को इंदौर के अभय प्रशाल में होगा। जिसके गवाह बनने के लिए देश-दुनिया के बड़े शायरों की मौजूदगी रहेगी। 

राहत इनसाइड भी चल पड़ी कदम

राहत इंदौरी सिर्फ मुसव्विर, फनकार, गजलों की शहंशाई की काबिलियत नहीं रखते, बल्कि रिश्तों की अदायगी और उनकी असल पहचान भी उनकी जिंदगी का एक अहम हिस्सा है। महीने में 25 दिन घर से बाहर रहकर मंचों की मसरूफियत के बाद भी करीब के रिश्तों की खबर रखना उनके बड़प्पन का हिस्सा कहा जा सकता है। दोस्तों का साथ, मददगारों की मेहरबानियां और अपनी असल जमीन को याद रखने के उनके सैकड़ों किस्सों को संजोए हुए राहत इनसाइड, उनके भांजे सीनियर पत्रकार खान अशु ने तैयार की है। लगातार किताबों की बारिश में राहत की इन बारिशों को फिलहाल थामकर रखा गया है, जो चंद कदमों के चलने के बाद ही मंजर-ए-आम पर आएगी। खान अशु का मानना है कि शायर की मकबूलियत और उनकी मंच की जिंदगी सभी जानते हैं लेकिन उनके अंदर छिपी हजारों बातों का बाहर आना भी इसलिए जरूरी हो जाता है कि यही सब बातें मिलकर किसी इंसान की शख्सियत को मुकम्मल करने की अहम भूमिका निभाती हैं।