16 मार्च को जारी हो सकती है BJP उम्मीदवारों की पहली लिस्ट, कई सांसदों के कटेंगें टिकट

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भोपाल

चुनाव आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही राजनैतिक दलों की तैयारियों में तेजी आ गई है। दलों में टिकटों को लेकर जबरदस्त मंथन किया जा रहा है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद लोकसभा चुनाव में बीजेपी कोई रिस्क लेने के मूड में नही है, इसके लिए प्रत्याशियों के चयन के लिए सावधानी बरत रही है। खबर है कि होली से पहले यानी आगामी पांच छह दिनों में बीजेपी एमपी समेत देश भर में करीब 150 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी कर सकती है। इसमें प्रथम चरण के तहत जिन लोकसभा सीटों पर चुनाव होने हैं उन प्रत्याशियों के नाम होंगे।साथ ही वे प्रत्याशी होंगे जिनका नाम पहले से ही निश्चित माना जा रहा है।

दरअसल, 16 मार्च को पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की अध्यक्षता में केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक होनी है। 16 मार्च के बाद 18 मार्च को भी अमित शाह ने केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक बुलाई है।सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में इस पर अंतिम फैसला होगा।  पार्टी हर प्रत्याशी को प्रचार के लिए कम से कम एक महीने का समय देना चाहती है। माना जा रहा है कि होली से पहले भाजपा लोकसभा चुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर देगी। सूत्रों के मुताबिक 16 मार्च को उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की कई लोकसभा सीटों के लिए भाजपा उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी जाएगी। उम्मीदवारों को लेकर पार्टी के अंदर कई स्तरों पर चर्चाओं का दौर जारी है।

वही पार्टी इस बार उन सांसदों के टिकट काटने की तैयारी में है जिनका कामकाज अच्छा नहीं रहा।चुंकी विधानसभा चुनाव के दौरान कई सांसदों का विरोध किया गया था, कईयों को प्रदर्शन का भी सामना करना पड़ा था, वही सर्वे रिपोर्ट में भी इन सांसदों का परफॉरमेंस ठीन नही रहा , जिसके चलते पार्टी कोई रिस्क लेने के मूड में नही है। वर्तमान में भाजपा के पास 29  में से 26  सीटें है, इस बार भाजपा का लक्ष्य 15  से ज्यादा सीटे हासिल करने का है। 

इन नेताओं के टिकट पर संकट

भोपाल-विदिशा पर पार्टी को नए प्रत्याशियों की तलाश है। प्रदेश की दो लोकसभा सीटों पर सर्वे में भाजपा को मजबूत बताया गया है। यह सीट भोपाल और विदिशा की हैं। विदिशा से सांसद और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज न लड़ने का ऐलान कर चुकी हैं। भोपाल सांसद आलोक संजर के खिलाफ कोई माहौल नहीं है। सर्वे में यह सीट सुरक्षित बताई गई है। इस सीट पर आलोक शर्मा का नाम भी सामने आ रहा है। 

चंबल-ग्वालियर में कटेगा टिकट

विधानसभा चुनाव एवं सर्वे रिपोर्ट को आधार माने तो इस बार चबल ग्वालियर अंचल की तीन लोकसभा सीटें मुरैना, भिंड एवं ग्वालियर इस बार खतरे मे हैं। मुरैना से अनूप मिश्रा, भिंड के डॉ. भागीरथ प्रसाद का टिकट काटा जा सकता है। ग्वालियर सांसद और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर चूंकि पार्टी में ताकतवर हैं, इसिलए वे भोपाल या फिर किसी और सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। 

सागर-खजुराहो में होगा बदलाव

बुंदेलखंड अंचल की सागर एवं खजुराहो लोकसभा सीट में भाजपा की स्थित खराब नहीं है। सर्वे रिपोर्ट में यहां पार्टी की जीतने की संभावना व्यक्त की गई है। पर इन दोनों सीटों पर भाजपा अपने प्रत्याशी बदल सकती है। इनमें से खजुराहो के सांसद नागेंद्र सिंह विधानसभा का चुनाव जीत चुके हैं। सांगर सांसद लक्ष्मीनारायण यादव की उम्र टिकट कटने का कारण बन सकता है। इससीट से इस बार बीजेपी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल का नाम भी सामने आ रहा है। 

डेंजर जोन में ये सीटे

विधानसभा सीट के गणित के मुताबिक बीजेपी के लिए लोकसभा की एक दर्जन से ज्यादा सीटें डेंजर ज़ोन में आ गई हैं।इनमें मुरैना, भिंड, ग्वालियर, दमोह, छिंदवाड़ा, धार, खरगौन, झाबुआ-रतलाम, राजगढ़, मंडला, शहडोल की सीट शामिल हैं।

इन सांसदों के कट सकते है टिकट

मुरैना : सांसद अनूप मिश्रा को पार्टी दोबारा उतारने के मूड में नहीं है। यहां विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को आठ में से सात और भाजपा को मात्र एक सीट मिली है। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर यहां लौट सकते हैं।

रतलाम : कांग्रेस सांसद कांतिलाल भूरिया की इस आदिवासी सीट पर भी भाजपा को तीन और कांगे्रस को पांच सीट पर बढ़त मिली है। 2014 में यहां से भाजपा के दिलीप सिंह भूरिया जीते थे, लेकिन उनके निधन के बाद उपचुनाव में भूरिया की बेटी निर्मला हार गई थीं।

भिंड : कांग्रेस से आकर भाजपा से सांसद बने डॉ. भागीरथ प्रसाद के खिलाफ सर्वे में माहौल ठीक नहीं बताया गया है। विधानसभा चुनाव में यहां भाजपा को मात्र दो सीट मिली है। कांग्रेस को पांच और एक पर बहुजन समाज पार्टी जीती है। यहां के सर्वे में भी पार्टी नया चेहरा तलाश रही है। पूर्व सांसद अशोक अर्गल और लालसिंह आर्य का नाम विचारक्षेत्र में है।

दमोह : सांसद प्रहलाद पटेल यहीं से चुनाव लड़ना चाहते हैं पर विधानसभा चुनाव में यहां की आठ में से भाजपा को मात्र तीन सीट मिली हैं। चार पर कांग्रेस और एक पर बसपा के जीतने से समीकरण बिगड़ गए हैं।

छिंदवाड़ा : मुख्यमंत्री कमलनाथ की पारंपरिक सीट में सभी विधायक कांग्रेस के जीते है। भाजपा यहां से किसी बड़े नेता को चुनाव में उतारने की तैयारी में है।

बालाघाट : सांसद बोधसिंह भगत के खिलाफ एंटी इनकमबेंसी नहीं है पर विधानसभा चुनाव में यहां भाजपा को तीन सीट मिली है। पार्टी सूत्रों की मानें तो भगत को एक मौका मिल सकता है या नीता पटेरिया को भी पार्टी आजमा सकती है।

मंडला : फग्गनसिंह कुलस्ते की सीट को इस बार खतरे में बताया गया है। अब पार्टी यहां से राज्यसभा सदस्य सम्पतिया उईके के नाम पर भी विचार कर रही है। ऐसे हालात में कुलस्ते राज्यसभा भेजने के विकल्प पर बातचीत चल रही है।

राजगढ़ : सर्वे में सांसद रोडमल नागर के खिलाफ अनुकूल माहौल नहीं है। विधानसभा में भी भाजपा को मात्र दो सीटों पर बढ़त मिली। पांच कांग्रेस के पास और एक पर निर्दलीय प्रत्याशी को जीत मिली है। पार्टी देख रही है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह कहां से चुनाव लड़ते हैं, उसके बाद राजगढ़ का फैसला किया जाएगा।

खंडवा : सांसद नंदकुमार सिंह चौहान के लोकसभा क्षेत्र में भी भाजपा को मात्र तीन विधायक मिल पाए। कांग्रेस के चार और एक निर्दलीय विधायक हैं। यहां से पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस भी टिकट की दौड़ में हैं।

खरगोन : आदिवासी सीट खरगोन लोकसभा में भाजपा का मात्र एक विधायक जीतकर आया है। पार्टी यहां भी नए चेहरे को उतारने की तैयारी में है।

धार : पार्टी के सर्वे में सांसद सावित्री ठाकुर के खिलाफ भी अनुकूल माहौल नहीं बताया है। जय युवा आदिवासी शक्ति (जयस) के कारण इस सीट पर पार्टी कोई नए चेहरे को आजमा सकती है। पूर्व मंत्री रंजना बघेल भी यहां से टिकट की दौड़ में है।

गुना : कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की गुना-शिवपुरी सीट में विधानसभा सीटों के लिहाज से देखा जाए तो कांग्रेस को पांच और भाजपा को तीन सीटें मिली हैं पर वोट प्रतिशत के लिहाज से देखा जाए तो भाजपा के खाते में ज्यादा वोट आए हैं। इसके विपरीत कई सीटें ऐसी हैं जहां विधानसभा सीट और वोट के लिहाज से भाजपा पिछड़ रही है।

देवास, विदिशा और खजुराहो में भी नए चेहरे आएंगे

देवास से मनोहर ऊंटवाल विधायक बन गए। पार्टी यहां से केंद्रीय मंत्री थावरचंद गेहलोत को उतार सकती है। कांग्रेस नेता गोपाल इंजीनियर को भी पार्टी में लाए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। विदिशा से सुषमा स्वराज के चुनाव नहीं लड़ने की दशा में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी विकल्प माना जा रहा है। खजुराहो से नागेंद्र सिंह के विधायक बनने के बाद यहां से उमेश शुक्ला और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा के नाम पर चर्चा चल रही है। मंदसौर में भी सुधीर गुप्ता का विकल्प तलाश जा रहा है।