जमीन के स्वामित्व को लेकर वन विभाग और आदिवासी आमने-सामने

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भोपाल

एक बार फिर वन विभाग और आदिवासी आमने सामने आ गई है। मामला इटारसी से 20 किलोमीटर दूर का है जहां वन विभाग के अधिकारियों का एक नया कारनामा सामने आया है। यहां पिछली तीन पीढ़ी से खेती करने वाले आदिवासियों की जमीन को नापकर वन विभाग ने अपनी बताकर आदिवासियों को जमीन से बेदखली करने की कार्यवाही का फरमान जारी कर दिया।

नेशनल हाइवे 69 केसला के वन ग्राम धासई के आदिवासियों द्वारा पिछले 7 दशक से भी ज्यादा समय से जिस भूमि पर खेती की जा रही थी अचानक उस भूमि को वन विभाग के अधिकारियों ने नापकर अपना बता दिया, जिसके चलते वर्षो से खेती कर अपना जीवन चलाने वाले किसानों के सामने भारी समस्या आ गई है। ऐसे में आदिवासी किसानों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है जिस भूमि पर वो वर्षो से खेती करते चले आ रहे हैं, अचानक वन विभाग को उसकी याद कैसे आ गई जबकि राजस्व के रिकार्ड में भी उक्त भूमि आदिवासियों के नाम पर दर्ज होने के प्रमाण भी आदिवासियों के पास उपलब्ध है। इनका कहना है कि ये तीन पीढ़ी से यहां खेती करते आ रहे हैं और अब वन विभाग जबरन इसे अपनी बताने पर आमादा है। आदिवासी किसानों का कहना है कि वो अपनी जमीन किसी हालत में नहींं छोड़ेंगे।

इस मामले में वन विभाग का कहना है कि अभी विभाग ने सिर्फ जमीन के नक्शे के हिसाब से सत्यापन कराया है। न तो किसी आदिवासी को तो बेदखल किया गया है न कोई कार्यवाही की गई है। अब फॉरेस्ट रिकॉर्ड और रेवेन्यू रिकॉर्ड के हिसाब से जांच की जाएगी, फिर कार्रवाई होगी।

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