आदिम-जाति कल्याण विभाग की शालाओं के संचालन को लेकर गाइडलाइन जारी

विद्यालयों में विद्यार्थियों को इस प्रकार से आमंत्रित किया जायेगा, कि विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या एक-साथ अधिक न हो। विद्यालय में विद्यार्थियों की उपस्थिति अनिवार्य नहीं होगी।

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| आदिम-जाति कल्याण विभाग की शालाओं को शैक्षणिक सत्र 2020-21 में सत्र शुरू करने और शालाओं के संचालन के संबंध में विभाग द्वारा दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं। बोर्ड की परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए कक्षा-10वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों के लिये विद्यालय नियमित रूप से पूरे निर्धारित समय तक के लिये संचालित होंगे।

विद्यालयों में विद्यार्थियों को इस प्रकार से आमंत्रित किया जायेगा, कि विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या एक-साथ अधिक न हो। विद्यालय में विद्यार्थियों की उपस्थिति अनिवार्य नहीं होगी। यह माता-पिता अथवा अभिभावकों की सहमति पर निर्भर करेगा। विद्यार्थी के लिये दी गई सहमति पूरे सत्र के लिये मान्य होगी। कक्षा-9वीं एवं 11वीं के लिये विद्यार्थियों की दर्ज संख्या एवं उपलब्ध अध्यापन कक्ष के आधार पर प्राचार्य द्वारा स्थानीय स्तर पर कक्षाओं के संचालन के संबंध में निर्णय लिया जा सकेगा। समय-समय पर जारी विभागीय आदेश अनुसार ऑनलाइन अथवा दूरस्थ शिक्षण अध्यापन की पद्धति के रूप में बना रहेगा। जो विद्यार्थी विद्यालय की अपेक्षा ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से पढ़ना चाहते हैं, उन्हें ऐसा करने की अनुमति दी जायेगी।

विभाग द्वारा विभागीय विद्यालयों में शैक्षणिक तथा गैर-शैक्षणिक स्टाफ को शत-प्रतिशत उपस्थित रहने के निर्देश जारी किये गये हैं। आदिम-जाति कल्याण विभाग के छात्रावास एवं आवासीय विद्यालयों के छात्रावासों को खोले जाने की अनुमति नहीं होगी। आवासीय विद्यालयों को डे-स्कूल के रूप में खोला जा सकेगा। यदि विद्यालय द्वारा परिवहन सुविधा का प्रबंध किया जा रहा है, तो वाहनों में समुचित भौतिक दूरी सुनिश्चित की जायेगी और सेनेटाइजेशन की पर्याप्त व्यवस्था की जायेगी।