भोपाल।
नसबंदी के विवादास्पद आदेश के बाद तुरत फुरत हटाई गई एनआरएचएम की डायरेक्टर छवि भारद्वाज पर तो सरकार ने कार्रवाई कर दी लेकिन विभागीय मंत्री को छुआ तक नहीं। दरअसल एनआरएचएम की डायरेक्टर छवि भारद्वाज द्वारा जारी किए गए आदेश में मैदानी अमले को पुरुष नसबंदी का टारगेट दिए जाना और ऐसा न होने पर वेतन वृद्धि रोकने तथा सेवा से बर्खास्त करने तक का जो प्रावधान था, उसकी जानकारी स्वास्थ मंत्री तुलसी सिलावट को भी थी।

सूत्रों की मानें तो तुलसी सिलावट की स्वीकृति के बाद ही छवि भारद्वाज ने यह आदेश जारी किया था। खुद मंत्री ने यह स्वीकार किया था कि यह आदेश जनजागृति पैदा करेगा और इसके माध्यम से लोग नसबंदी कराने के लिए प्रेरित होंगे। जब यह आदेश निकाला गया तो एनआरएचएम कार्यकर्ताओं ने अपने संगठन के माध्यम से मंत्री से इंदौर में मुलाकात भी की और उन्हें इस बात का ज्ञापन भी सौंपा कि ऐसा आदेश तुरंत वापस लिया जाए।

प्रमुख सचिव के नाम से दिए गए इस ज्ञापन की प्रति एमपी ब्रेकिन्ग के पास है। मंत्री ने तब संगठन को यह आश्वस्त भी किया था कि ऐसी कोई भी कड़ी कार्रवाई सिर्फ पेपरों में रहेगी न कि अमलीजामा पहनाई जाएगी ।लेकिन जब मीडिया में यह आदेश लीक हुआ तो आनन-फानन में सारी गड़बड़ी का ठीकरा आईएएस अधिकारी छवि भारद्वाज पर फोड़ दिया गया। ईमानदार और निर्भीक कार्यशैली के लिए अपनी अलग छवि रखने वाली छवि भारद्वाज अब मंत्रालय में ओएसडी के पद पर बिठाई गई है जबकि मंत्री जी यथावत स्वास्थ्य मंत्री ही है।