कमलनाथ ने बताई राजनीति में आने की कहानी

भोपाल| कभी कोई घटना किस तरह से व्यक्ति की जिंदगी को ही बदल देती है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को एक किस्से के माध्यम से खुद के सक्रिय राजनीति में आने का खुलासा किया। कमलनाथ ने बताया कि 1979 में जब वे छिंदवाड़ा जिले के सौन्सर से पाडुर्ना जा रहे थे| रास्ते में कुछ गांव के लोग सड़क पर खड़े होकर उनका तीन घंटे से इंतजार कर रहे थे। कमलनाथ ने गाड़ी रोकी और लोगों से उनके खड़े होने का कारण पूछा तो गांव वालों ने बताया कि सड़क से आधा किलोमीटर उनका गांव है। उन्हें पानी लेने के लिए 12 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है, इसीलिए उनकी लड़कों की शादी नहीं हो पा रही है, क्योंकि लड़की वाले कहते हैं कि हमारी बेटी इतनी दूर से पानी नहीं लाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उसी दिन मैंने तय कर लिया था कि चुनावी राजनीति के जरिए लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराऊगा और आज छिंदवाड़ा में जो स्थिति है, वह सबके सामने है। कमलनाथ ने यह बात भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय जल सम्मेलन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि पानी की उपलब्धता सरकार के सामने आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौती है और हम सब यदि सब मिलकर सामना करें तो निश्चित ही सफलता दूर नहीं।इस अवसर पर जल पुरुष और मैग्सेसे पुरस्कार प्राप्त प्रोफेसर राजेन्द्र सिंह ने कहा कि कमलनाथ से उनके 1990 से संबंध है और कमलनाथ जी का पर्यावरण के प्रति कितना गहरा जुड़ाव है, इसका एक उदाहरण गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली राज्य में फैले अरावली पर्वत कमलनाथ जी वजह से ही सुरक्षित हैं। पर्यावरण मंत्री रहते समय कमलनाथ ने 7 मई 1992 को यह आदेश दिया था कि अरावली पर्वत  से अवैध खनन बंद किया जाए ।उसी अभिसूचना के कारण आज तक अरावली पर्वत सुरक्षित है और वहां पर हरियाली है।