मध्यप्रदेश की जनता के लिए संकटमोचक बनकर आये है कमलनाथ

MP News : राजनीति में ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि चुनाव से तीन महीने पहले ही जनता खुलकर कह दे कि किसकी सरकारी आएगी, लेकिन आज मध्यप्रदेश में ‘किस ओर बैठेगा राजनीति का ऊट’ वाली कहावत बिलकुल गलत साबित होती दिख रही है। मध्यप्रदेश में 2018 के चुनाव में कमलनाथ के नेतृत्व में 15 साल बाद कांग्रेस ने सत्ता हासिल की थी। मुख्यमंत्री के रूप में कमलनाथ ने जिस तरह से प्रदेश को नई दिशा देने की शुरुआत की उसमें सबसे पहले 27 लाख किसानों का कर्ज माफ़ और 100 रुपये में 100 यूनिट बिजली एक ठोस कदम था। जिसको जनता आज भी बार-बार याद कर रही है।

आज किसी भी सामान्य राजनीति के जानकार से मध्यप्रदेश की बात कर ली जाए तो उनका कहना है कि मध्यप्रदेश बीजेपी के कार्यालय की रौनक चुनाव परिणाम आने के तीन महीने पहले से ही फीकी पड़ती दिखाई दे रही है, दूसरी ओर देखे तो लगातार कमलनाथ के नेतृत्व में भाजपा के कई बड़े नेता और जमीनी कार्यकर्ता कांग्रेस में आ रहे है। कमलनाथ भी अपनी सभी जनसभाओं में लगातार शिवराज सिंह चौहान से सवाल करते दिखाई देते है कि आखिर शिवराज सिंह ने प्रदेश को दिया क्या है? जिसका कोई भी ठोस जवाब ना तो भाजपा संगठन और ना ही खुद शिवराज सिंह ही मुखर होकर दे पा रहे है।

कमलनाथ ने युवाओं को भ्रष्टाचार और कमीशन मुक्त भर्ती प्रकिया पूरा करने का दिया वचन 

कमलनाथ की जनसभाओं में एकबात सामान्य हो गई है कि कमलनाथ जैसे ही बेरोजगारी या भ्रष्टाचार की बात करते है तो जनता आगे की बात सुनने से पहले ही आक्रोश में कमलनाथ की हां में हां मिलाने लगती है। हाल ही में इंदौर में हुए युवा-महापंचायत में कमलनाथ ने युवाओं को भ्रष्टाचार और कमीशन मुक्त भर्ती प्रकिया पूरा करने का वचन दिया और ये तक कह दिया कि शिवराज सरकार में हुई भर्तियों की जांच वो प्रदेश के युवाओं से ही कराएंगे।

अगर बीजेपी से कांग्रेस में शामिल होने वालें नेताओं की बात करे तो पिछले छः महीनों से लगातार हर दिन कोई ना कोई बड़ा नेता कमलनाथ में विश्वास रखने की बात करते हुए कांग्रेस में शामिल हो रहा है। ज़ब भाजपा के स्थानीय नेताओं को थोड़ा जोर करके और कुरेदकर बात की जाती है, तो वो भी अंदर की बात नाम ना बताने की शर्त पर कहते है कि इसबार कांग्रेस का आना तय है।

शिवराज को 18 साल तक लाड़ली बहना की क्यों नहीं आई याद 

कमलनाथ कहते है कि शिवराज और भाजपा के पास झूठ और घोषणाओं  एक मशीन है। जोकि डबल स्पीड से चल रही है। कमलनाथ की योजनाओं और शिवराज की योजनाओं पर ज़ब जनता में बात होती है तो जनता भी अब शिवराज कि बात करते हुए कहती है, कि 18 साल तक शिवराज को लाड़ली बहना क्यों याद नहीं आई?  शिवराज के द्वारा गैस-सिलिंडर के दाम कम करने पर भी जनता का कहना यही है कि ज़ब ये काम किया ही जा सकता था तो फिर चुनाव से पहले ही क्यों किया जा रहा है जबकि महंगाई तो बहुत पहले से है। जनता का कहना है कि ये काम भी शिवराज सिंह पूरी ईमानदारी से नहीं कर रहे है। देखा जाए तो जनता भी बहुत ठोस सवाल खड़े कर रही है। क्योंकि लगातार अखबारों में ये खबरे आ रही है कि सभी को सस्ते गैस-सिलिंडर नहीं मिल रहे है। जनता का कहना है कि ज़ब कमलनाथ नें नारी सम्मान योजना में 1500 रूपये महीने देने की बात कही और गैस-सिलेंडर के दामों को सरकार बनने पर मात्र 500रु में देने की घोषणा की ज़मीनी स्तर पर नारी सम्मान योजना के फॉर्म भरवाना शुरु किया, तब शिवराज ने केवल डर के कारण लाड़ली बहना योजना की घोषणा की है। जिससे मालूम होता है कि CM शिवराज मानों केवल कमलनाथ की घोषणाओं के इंतजार में ही थे और उनसे आगे दिखने की वजह से ही उन्होंने अपनी घोषणाओं की शुरुआत की है।

मध्यप्रदेश में बनेगी कांग्रेस की सरकार

आखिर में अगर संगठन की बात की जाए तो भारतीय जनता पार्टी का संगठन भी शिवराज की घोषणाओं को लेकर उत्साहित नजर नहीं आ रहा है और ना ही गलियों और नुकड्डो पर शिवराज सिंह की योजनाओं पर कोई चर्चा दिख रही है। इसका सबसे बड़ा कारण कमलनाथ की सक्रियता और रणनीति है। जिसकी वजह से शिवराज सिंह के लिए जनता में घोर अविश्ववास है। इसबार एक ही चीज घूम फिरकर दिख रही है कि कमलनाथ को जनता का आशीर्वाद चुनाव के 3महीने पहले से ही मिल चुका है, और इसका बड़ा कारण है 2020 में भारतीय जनता पार्टी के द्वारा जबरन और खरीद फरोक्त करके कांग्रेस की सरकार को गिराना जिसका आक्रोश जनता पिछले 3 सालों से अपने अंदर दबाएं हुए है। आज जनता खुद ही कमलनाथ को प्रदेश के लिए संकटमोचक मान रही है। यही वजह है कि शिवराज की तमाम घोषणाओं और उद्घाटनों के बाद भी शिवराज सिंह किसी भी तरह से कमलनाथ को ज़मीन पर चुनौती नहीं दे पा रहे है। और फिर कुछ महीनें पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी कहा था कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनेगी और 150 सीटें हम यहां जीतेंगे। जोकि सच होता दिख रहा है।


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Amit Sengar

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मुझे अपने आप पर गर्व है कि में एक पत्रकार हूँ। क्योंकि पत्रकार होना अपने आप में कलाकार, चिंतक, लेखक या जन-हित में काम करने वाले वकील जैसा होता है। पत्रकार कोई कारोबारी, व्यापारी या राजनेता नहीं होता है वह व्यापक जनता की भलाई के सरोकारों से संचालित होता है। वहीं हेनरी ल्यूस ने कहा है कि “मैं जर्नलिस्ट बना ताकि दुनिया के दिल के अधिक करीब रहूं।”

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