प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना में MP की उपलब्धि, 4500 विकास कार्य पूरे कर टॉप पर, बाकी राज्यों को पीछे छोड़ा

Atul Saxena
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MP News : मध्य प्रदेश के लिहाज से ये खबर बड़ी है और सुकून देने वाली है कि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश देश में सबसे आगे है। 4500 विकास कार्य पुरे कर मध्य प्रदेश में टॉप 10 राज्यों में अपना पहला स्थान बनाया है जबकि 450 विकास कार्यों के साथ महाराष्ट्र 10 वे नंबर पर है।

योजना में 1074 गांव शामिल , केंद्र से मिले 210 करोड़ 90 लाख रुपये 

प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना में ऐसे 1074 गाँवों को शामिल किया गया है जिनमें अनुसूचित जाति की जनसंख्या 50 प्रतिशत या उससे ज्यादा है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने हर गाँव के लिए 20 लाख रुपये का आवंटन उपलब्ध कराया है। इन 1074 ग्रामों में विकास के लिए रूपये 210 करोड़ 90 लाख केन्द्र सरकार से मिले है। इस राशि के साथ कन्वर्जेन्स कर 4500 विकास कार्य पूरे कर लिए गये हैं तथा 3000 कार्य चल रहे हैं।

योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति बहुल गाँवों में समग्र रूप से विकास

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति बहुल गाँवों में समग्र रूप से विकास सुनिश्चित करना है। इन गाँवों के लिए सामाजिक सुरक्षा, पोषण, सड़कें, आवास, विद्युत प्रदाय, स्वच्छता, ईंधन की उपलब्धता, कृषि, वित्तीय समावेश, डिजिटल सुविधा, जीवन-यापन और कौशल विकास से संबंधित करीब 50 ऐसे निगरानी योग्य संकेतक तैयार किए गए हैं जिनके आधार पर गाँव के विकास की समीक्षा की जा रही है।

2014-15 से प्रारंभ हुई है प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना 

केन्द्र सरकार की सभी संबंधित योजनाओं और राज्य सरकार की योजनाओं को मिलाकर गाँव विकास रोडमैप तैयार किया गया है। यह योजना वर्ष 2014-15 से प्रारंभ की गई है। शुरूआत में इसमें प्रदेश के 327 गाँवों को शामिल किया गया था। वर्ष 2022 से योजना मापदण्ड में बदलाव कर न्यूनतम 500 जनसंख्या वाले गाँवों में अनुसूचित जाति समुदाय की कम से कम 40 प्रतिशत संख्या का मापदण्ड रखा गया है। इस आधार पर प्रदेश के 619 गाँवों को शामिल करने की कार्रवाई चल रही है।

समन्वय समितियों का गठन

जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना कन्वर्जेन्स समिति और गाँवों में सरपंच की अध्यक्षता में कन्वर्जेन्स समितियाँ गठित की गई हैं। इन समितियों द्वारा सभी संबंधितों से योजना, उसके उदेश्य, क्रियान्वयन, फंड की व्यवस्था विभिन्न विभागों को उनकी नियमित योजना और प्राप्त होने वाले बजट के कन्वर्जेन्स आदि विषयों पर चर्चा कर गाँव विकास योजना तैयार कर विकास की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। जिला स्तर पर जिला कलेक्टर योजना के प्रभारी एवं ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम सभा को योजना को जिम्मेदारी दी गई है।

योजना में मुख्य रूप से इन दो कार्यों पर फोकस 

इस योजना में मुख्य रूप से दो प्रकार के कार्य किये जाते हैं। पहला ग्राम की विकास योजना तैयार कर ग्राम के समुचित अधोसंरचनात्मक विकास के लिए विभिन्न विकास विभागों की योजनाओं का कियान्वयन कराना। ऐसे कार्यों के लिए जिनमें विकास कार्यों के लिए धनराशि उपलब्ध होने में दिक्कत हो, वहाँ गैप-फिलिंग निधि से कार्य कराना।

इस योजना के तहत गाँव में होते हैं ये कार्य 

इस योजना में गाँवों के लोगों को विभिन्न विकास विभागों की योजनाओं का लाभ दिलाना। जैसे स्कूल जाने योग्य बच्चों का प्रवेश शालाओं में कराना। सभी बच्चों का टीकाकरण कराना। वृद्धावस्था एवं दिव्यांग जन पेंशन के लिए सभी पात्रों के बैंक खाते खुलवाना, आधार कार्ड बनवाना आदि। इसके अलावा पेयजल एवं सफाई व्यवस्था, ठोस एवं तरल कचरे के निराकरण, आँगनवाड़ियों में शौचालयों का निर्माण, आँगनवाड़ी भवनों का निर्माण, बारहमासी सड़कों का निर्माण, सोलर लाईट एवं स्ट्रीट लाईट की व्यवस्था करने जैसे कार्य किये जा रहे हैं।

मध्य प्रदेश टॉप पर , महाराष्ट्र अंतिम पायदान पर 

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के हिसाब से मध्य प्रदेश 4500 विकास कार्य पूरे कर देश के टॉप 10 राज्यों में पहले स्थान पर है, 3906 विकास कार्य के साथ कर्नाटक दूसरे, 3292  विकास कार्यों के साथ राजस्थान तीसरे, 2853  विकास कार्य के साथ तमिलनाडु चौथे, 2621 विकास कार्य के साथ छत्तीसगढ़ पांचवे, 2480 विकास कार्य के साथ उड़ीसा छठवे, 1322 विकास कार्य के साथ हिमाचल प्रदेश सातवे, 935 विकास कार्य के साथ उत्तर प्रदेश आठवे, 725 विकास कार्य के साथ असम नौवे और 450 विकास कार्य के साथ महाराष्ट्र दसवे स्थान पर है।


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पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं ....

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