नई व्यवस्था: मप्र में 18 जिलों के उपभोक्ता आधार दिखाकर कहीं से भी ले सकेंगे राशन

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भोपाल। प्रदेश के 18 जिलों में अब हितग्राही किसी भी राशन दुकान (कन्ट्रोल) से राशन ले सकेंगे| सरकार आधार आधारित राशन वितरण व्यवस्था शुरू कर रही है। नई व्यवस्था 18 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू की गई है, अब इसे पूरे प्रदेश में लागू करने की प्लानिंग पर काम होगा। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर ने दावा किया है कि इस तरह की योजना लागू करने वाला मप्र देश का पहला राज्य बन जाएगा। 

शनिवार को मीडिया से चर्चा करते हुए मंत्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर ने बताया कि आधार आधारित राशन वितरण व्यवस्था को प्रयोग के तौर पर देवास जिले में लागू किया गया था। इसके अच्छे परिणाम सामने आने के बाद इंदौर, उज्जैन और शहडोल संभाग के 18 जिलों में जुलाई में ही इसे लागू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अगस्त में रीवा संभाग के 4 जिलों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।  नई व्यवस्था के बाद इन जिलों के उपभोक्ता प्रदेश के किसी भी शहर या वार्ड से आधार कार्ड दिखाकर राशन ले सकेंगे। मंत्री तोमर ने बताया कि व्यवस्था लागू होने के बाद इन जिलों के गरीब-मजदूर उपभोक्ता प्रदेश में कहीं भी रहें, उन्हें राशन मिलता रहेगा। सिर्फ उन्हें अपना आधार कार्ड दिखाना होगा। 

परिवार के सदस्य को राशन लेने अधिकृत कर सकता है मुखिया 

उन्होंने यह भी बताया कि जिन उपभोक्ताओं का आधार कार्ड लिंक नहीं हुआ है, उन्हें भी राशन से वंचित नहीं किया जाएगा। ऐसे उपभोक्ता राशन दुकान पर ही ई-केवाईसी कराकर राशन ले सकेंगे। दुकानों पर उपभोक्ता के नाम से दर्ज गलत आधार नंबर को भी सुधारा जा सकेगा। जिन गरीब लोगों के आधार कार्ड नही बने हैं वो समग्र आईडी के ज़रिए राशन ले सकेंगे। वहीं जिन दुकानों पर इंटरनेट की कनेक्टिविटी नहीं हैं। उन उपभोक्ताओं को ऑफलाइन राशन दिया जाएगा। मंत्री ने बताया कि नई व्यवस्था में मुखिया परिवार के दूसरे सदस्य को राशन लेने के लिए अधिकृत कर सकेगा। इस व्यवस्था से दोहरे और बोगस परिवारों को सूची से हटाना आसान होगा। मंत्री ने कहा कि अभी पांच करोड़ 86 लाख गरीब परिवारों को राशन दिया जा रहा है।

 

किसानों की सुनेगी सरकार 

मंत्री ने बताया कि किसानों को उपार्जन में आने वाली परेशानी को लेकर विभाग द्वारा प्रदेश में भी किसान संगोष्ठी की जाएगी। 21 जुलाई से किसान संगोष्ठि झाबुआ में शुरू करेंगे। सरकार अब किसानों की समस्याएं सुनकर उनके संबंध में निर्णय लेगी। इसमें किसानों से पूछा जाएगा कि उपार्जन में क्या दिक्कतें आ रही हैं। इसके बाद प्रदेशभर में संगोष्ठियां की जाएंगी।