बीवी की बताकर बेच दी सरकारी जमीन, खरीददार लगा रहा अफसरों की चौखट पर दस्तक

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भोपाल। नियतखोरों की कोशिशों को सरकारी अफसर-कर्मचारी कामयाब करने में जुटे हुए हैं। जमीनी हेराफेरी से अनजान औऱ नावाकिफ लोग शातिरों का निशाना बन रहे हैं। चोरी साबित होने के बाद भी पुलिस कुसुरवारों को बचाने में लगी हुई है। ठगी के शिकार हो चुके लोग अफसरों की चौखटों पर चक्कर लगाते थक चुके हैं। उन्हें लग रहा है कि अब इंसाफ के लिए राष्ट्रपति-प्रथानमंत्री की शरण में जाना पड़ेगा।

मामला राजधानी से लगे ग्राम तूमड़ा का है। यहां खसरा नम्बर 26 पर स्थित 0.1600 हेक्टेयर जमीन सरकारी है और नजूल में इसका रिकॉर्ड दर्ज है। जमीनों की कालाबाजारी करने के माहिर मासूम खान ने इस जमीन को अपनी पत्नी नन्हीं बी की बताते हुए शाहजहानाबाद निवासी रिजवान खान को बेच दी। सरकारी कार्यवाही से बेखौफ मासूम ने इसकी रजिस्ट्री और नामांतरण की भी तैयारी कर दी। लेकिन इसी दौरान रजिस्ट्रार दफ्तर ने इस जमीन के सरकारी होने की बात कहकर इसकी रजिस्ट्री करने से इंकार कर दिया।

फिर शुरू फरियाद का दौर

सरकारी जमीन को 80 हजार रुपए में बेच दिए जाने की शिकायत रिजवान ने थाना टीला जमालपुरा में 31 मई को की थी लेकिन पुलिस ने न तो इस मामले में कोई कार्यवाही की और न ही ठगी का शिकार हुए रिज़वान को कोई राहत मिल पाई। इसके बाद से ही रिजवान कभी एसपी तो कभी कलेक्टर के सामने अपना दुखड़ा सुनाते रहते हैं। गुरुवार को उन्होंने इस मामले को लेकर पुलिस महानिरीक्षक को शिकायत की तो उन्होंने मामला फिर टीला थाने की तरफ रवाना कर दिया है। जहां से फिर मामले को दबाने औऱ जमीन के सौदागर मासूम खान को बचाने की कोशिश शुरू कर दी गई है।

अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत

सरकारी जमीन को निजी बताकर बेचने के मामले में पटवारी, गिरदावर, तहसीलदार और निचले कर्मचारियों की बड़ी भूमिका बताई जा रही है। बताया जाता है कि इस जमीन के लिए बनाई गई भू-अधिकार और ऋण पुस्तिका में कहीं भी इस बात की टीप नहीं लगाई गई है कि उक्त जमीन शासकीय है। इस जमीन का नामांतरण नन्हीं बी के नाम पर हो जाना भी अधिकारियों की मिलीभगत साबित करती है। कारण यह बताया जाता है कि नामांतरण प्रक्रिया पूरी करने के लिए तहसीलदार, गिरदावर और पटवारी की जिम्मेदारी और भूमिका होती है।

अब प्रधानमंत्री गुहार लगाने की तैयारी

ठगी के शिकार हुए रिजवान खान का कहना है कि एक नियतखोर ने उन्हें धोखे से सरकारी जमीन बेच दी। अधिकारी-कर्मचारी इस धोखाधड़ी में शामिल हैं। थाने से लेकर पुलिस के आला अफसरों तक इसकी शिकायत कर चुका हूं। कलेक्टर की जनसुनवाई में बात रखी गई लेकिन कहीं से कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मैं अब इस मामले की शिकायत प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को कर इंसाफ की गुहार लगाऊंगा।